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गन्ना किसानों का हल्ला बोल

Sun, 01 Dec 2013 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, लक्सर
अमर उजाला ब्यूरो, लक्सर Updated Sun, 01 Dec 2013 12:56 AM IST
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 Sugarcane farmers Halla Bol

शुगर मिल का पेराई सत्र शुरू कराने और बकाया 22 करोड़ के गन्ना भुगतान को लेकर भड़के किसानों ने प्रदर्शन कर जुलूस निकाला। एसडीएम की मौजूदगी में प्रधान गन्ना प्रबंधक को ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें प्रशासन और मिल प्रबंधन को दो दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया गया। मांगें पूरी न होने पर किसानों ने शुगर मिल में तालाबंदी कर कामकाज ठप कराने की चेतावनी दी।

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लक्सर एसडीएम ने किसानों को 25 नवंबर तक पेराई सत्र शुरू किए जाने की तारीख निर्धारित कराने का वादा किया था। लेकिन पेराई सत्र को लेकर कोई घोषणा नहीं हो सकी। इस पर शनिवार को किसानों का गुस्सा भड़क उठा। किसान सुबह गन्ना समिति कार्यालय पर एकत्र हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सूचना मिलते ही एसडीएम उत्तम सिंह चौहान और तहसीलदार शाहिद हुसैन मौके पर पहुंचे।
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किसानों ने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि यदि उनका मिल प्रबंधन पर कोई दबाव नहीं है तो किसानों को अपने तरीके से काम करने दिया जाए। यही नहीं किसानों ने मांग रखी कि यदि पेराई सत्र शुरू नहीं करना है तो मिल पर किसानों का बकाया 22 करोड़ रुपया अविलंब दिलाया जाए। इसके बाद किसान नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में शुगर मिल पहुंचे। यहां किसानों ने जमकर हंगामा किया। प्रतिनिधि के रूप में प्रधान गन्ना प्रबंधक कामेश कुमार किसानों के बीच वार्ता करने पहुंचे। लेकिन किसानों ने प्रदर्शन जारी रखा।
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एसडीएम के समझाने पर बमुश्किल किसान शांत हुए। इसके बाद किसानों ने प्रधान गन्ना प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा, जिसमें बकाया भुगतान कराने के अलावा अविलंब पेराई सत्र शुरू किए जाने की मांग की गई। ऐसा न होने पर किसानों ने दो दिसंबर को मिल में तालाबंदी कर सभी कामकाज ठप कराने की चेतावनी दी। प्रदर्शन करने वालों में रफल सिंह, कुशल पाल सिंह, राज सिंह, जयपाल फौजी, कुंवर रोहताश, जगमेर सिंह आदि शामिल रहे।


पैसे नहीं तो करोड़ों का निर्माण कैसे
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और मिल प्रबंधन के सामने उस समय मुसीबत खड़ी हो गई जब किसानों ने बकाया चल रहे 22 करोड़ देने के बजाय मिल में किए जा रहे करोड़ों के निर्माण कार्य पर सवाल उठा दिए। किसानों का कहना था कि मिल प्रबंधन बकाया भुगतान जारी करने के लिए पैसे न होने का रोना रो रहा है तो मिल में चल रहे करोड़ों के निर्माण कार्यों का पैसा कहां से आ रहा है। किसानों के इस सवाल पर मिल प्रबंधन फंसता नजर आया। किसी तरह किसानों को जल्द ही भुगतान करने का आश्वासन देकर शांत किया गया।

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