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पांच साल का हिसाब मांग रही सड़कें
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Wed, 11 Jan 2017 11:22 PM IST
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विधानसभा चुनाव में यूं तो तमाम मुद्दे जनता के हैं, लेकिन भेल रानीपुर विधानसभा में बदहाल सड़कें विधायक से पांच साल का हिसाब मांग रही हैं। इस विधानसभा में सड़कों की हालत बद से बदतर है। रोशनाबाद, हेतमपुर, आन्नेकी गांवों में सड़कों के किनारे नालियों तक नहीं हैं। गंदा पानी सड़कों के बीचों बीच से बह रहा है। पांच साल में भी सड़क व नालियों की समस्याएं हल न होने से लोगों में खासी नाराजगी है।
जिला मुख्यालय से सटे तमाम गांव रानीपुर विधानसभा में आते हैं। मुख्यालय से औरंगाबाद जाने वाला मार्ग जगह-जगह गड्ढों में तब्दील है। सबसे पहले रोशनाबाद गांव में ही बदहाली सड़कों पर साफ नजर आती है। मुख्य मार्ग पर सड़क के दोनों तरफ नालियां ही नहीं है। जिससे गंदा पानी सड़क के बीच बहता है। हेतमपुर और आन्नेकी में तो पैदल सड़क से गुजरना मुश्किल हो जाता है। यहां सड़क कहीं भी सूखी नहीं है। कई जगह सड़क गंदा तालाब नजर आती हैं। यहां ग्रामीण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। रोशनाबाद निवासी राजेंद्र व मुकेश का कहना है कि सड़क बनाने की मांग पांच सालों में बार-बार विधायक और अफसरों से की गई, लेकिन हालात जस के तस हैं। हेतमपुर गांव के अनिल, कालूराम और नवीन ने बताया कि एक दशक से नालियां नहीं बनी। पिछले चुनाव में सभी प्रत्याशियों ने सड़क व नालियां बनवाने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा विधायक आदेश चौहान ने कोई काम नहीं कराया। आन्नेकी निवासी शिवराम, सुरेश आदि ने आरोप लगाया कि विधायक ने आसपास गांवों में अपने करीबी लोगों की प्राइवेट गलियां बनवा दी, पर सार्वजनिक मार्ग बार बार मांग करने के बाद भी नहीं बनवाया।
ग्रामीण खुद डलवाते रहे मिट्टी
। टिहरी विस्थापित कालोनी से हेतमपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर ग्रामीणों ने परेशान होकर खुद ही मिट्टी का भराव कराया। जनप्रतिनिधियों और अफसरों के कान पर जूं नहीं रेंगी। जिला मुख्यालय के सबसे नजदीक होने के बावजूद क्षेत्र के बदतर हालात पर तरस आता है। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।
जिला मुख्यालय से सटे तमाम गांव रानीपुर विधानसभा में आते हैं। मुख्यालय से औरंगाबाद जाने वाला मार्ग जगह-जगह गड्ढों में तब्दील है। सबसे पहले रोशनाबाद गांव में ही बदहाली सड़कों पर साफ नजर आती है। मुख्य मार्ग पर सड़क के दोनों तरफ नालियां ही नहीं है। जिससे गंदा पानी सड़क के बीच बहता है। हेतमपुर और आन्नेकी में तो पैदल सड़क से गुजरना मुश्किल हो जाता है। यहां सड़क कहीं भी सूखी नहीं है। कई जगह सड़क गंदा तालाब नजर आती हैं। यहां ग्रामीण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। रोशनाबाद निवासी राजेंद्र व मुकेश का कहना है कि सड़क बनाने की मांग पांच सालों में बार-बार विधायक और अफसरों से की गई, लेकिन हालात जस के तस हैं। हेतमपुर गांव के अनिल, कालूराम और नवीन ने बताया कि एक दशक से नालियां नहीं बनी। पिछले चुनाव में सभी प्रत्याशियों ने सड़क व नालियां बनवाने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा विधायक आदेश चौहान ने कोई काम नहीं कराया। आन्नेकी निवासी शिवराम, सुरेश आदि ने आरोप लगाया कि विधायक ने आसपास गांवों में अपने करीबी लोगों की प्राइवेट गलियां बनवा दी, पर सार्वजनिक मार्ग बार बार मांग करने के बाद भी नहीं बनवाया।
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ग्रामीण खुद डलवाते रहे मिट्टी
। टिहरी विस्थापित कालोनी से हेतमपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर ग्रामीणों ने परेशान होकर खुद ही मिट्टी का भराव कराया। जनप्रतिनिधियों और अफसरों के कान पर जूं नहीं रेंगी। जिला मुख्यालय के सबसे नजदीक होने के बावजूद क्षेत्र के बदतर हालात पर तरस आता है। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।
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