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एसटीएफ से वाहन छुड़ा ले गए खनन माफिया
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 29 Feb 2016 12:29 AM IST
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हरिद्वार/रुड़की। राजाजी टाइगर रिजर्व की एसटीएफ टीम ने रविवार सुबह पार्क से सटे बुग्गावाला क्षेत्र में छापा मारा तो सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रालियों में खनन सामग्री भरी जा रही थी। टीम ने वाहनों को कब्जे में लेने की कोशिश की तो माफिया भिड़ गए और अधिकतर वाहन छुड़ाकर ले गए। केवल तीन ट्रैक्टर ट्रालियां टीम पुलिस के हवाले कर पाई। पार्क प्रशासन ने दावा किया कि आसपास के क्षेत्रों में लगे क्रशर मालिकों की शह पर खनन किया जा रहा था। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। राजस्व प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को भी रिपोर्ट भेज दी है।
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राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को रविवार तड़के सूचना मिली की बुग्गावाला क्षेत्र में पार्क से सटी मोहंड रौ और चिल्लावाली नदी में बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है। पार्क की एसटीएफ टीम, बेरीवाड़ा, हरिद्वार, धौलखंड और चिल्लावाली रेंज के कर्मियों के साथ छापा मारने नदी में उतरी तो 100 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रालियों देखकर होश उड़ गए। कर्मियों ने खनन बंद कराया और ट्रैक्टर ट्रालियां ले जाने की तैयारी करने लगे। इसी बीच मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी। एक क्रशर संचालक की अगुवाई में मौके पर पहुंचे लोगों ने कर्मियों के कब्जे से ट्रैक्टर ट्रालियां छुड़ानी शुरू की। इस दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक हो गई। सूचना पर बुग्गावाला थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। इसी बीच भीड़ छंट गई और टीम में शामिल कर्मियों ने तीन ट्रैक्टर-ट्रालियां पुलिस के हवाले की। उसके बाद राजाजी टाइगर रिजर्व के वन्य जीव प्रतिपालक कोमल सिंह, सहकर्मियों के साथ लौट आए। कोमल सिंह ने बताया कि राजाजी की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन खनन पार्क की सीमा से सौ मीटर की दूरी पर ही किया जा रहा था। इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है। अवैध खनन में संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है। पार्क के उपवन संरक्षक किशनचंद ने बताया कि तीन स्टोन क्रशर के मालिकों समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। टीम में एसटीएफ के रेंजर विनय राठी, फॉरेस्टर राजबीर सिंह, पूरण सिंह, देवसिंह बिष्ट, रामपाल चौहान, सुरेंद्र सिंह नेगी, अमित कुमार, अश्विनी आदि शामिल रहे।
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इनसेट
पट्टों की आड़ में अवैध खनन
उप वन्य जीव प्रतिपालक किशनचंद ने बताया कि छापे के दौरान जब खनन करने वालों से पूछताछ की गई तो उन्होंने खनन के लिए दो पट्टे आवंटित होने की बात टीम को बताई। लेकिन कोई भी अनुमति पत्र नहीं दिखा पाया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में इस समय कोई पट्टा अस्तित्व में नहीं है। पट्टे की अनुमति कहीं और उसका सीमांकन कहीं और होना पाया गया है।
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