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नगर निगम में ठप रहा कामकाज
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Mon, 28 Nov 2016 10:31 PM IST
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नगर आयुक्त और कर्मचारी नेताओं के बीच धक्कामुक्की का मामला सोमवार को तूल पकड़ गया। नगर आयुक्त के समर्थन में उतरे कर्मचारी नेताओं के दूसरे गुट ने विरोध में दफ्तर बंद कराए और कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दिया। वहीं पहले गुट ने दफ्तर खुलवाकर काम काज सुचारु करने का प्रयास किया। निगम परिसर में दिन भर हंगामा चलता रहा। दफ्तर बंद कराने और खुलवाने के दौरान कर्मचारी नेताओं और कर्मचारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। कर्मचारी संगठनों के आमने-सामने आने से नगर निगम में दिनभर काम नहीं हुआ। 30 नवंबर तक कार्रवाई न होने पर एक दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
सफाई कर्मचारियों की तरह अन्य संविदा कर्मियों को नियमित करने की मांग को लेकर शनिवार को कर्मचारी नेता मुरली मनोहर और नामित पार्षद सचिन बेनीवाल के साथ नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे थे। वार्ता के दौरान कर्मचारी नेताओं और नगर आयुक्त के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। आरोप है कि मुरली मनोहर और सचिन बेनीवाल ने धक्का मुक्की करते हुए नगर आयुक्त के साथ अभद्रता की है। उनकी मेज पलटने का प्रयास भी किया। नगर आयुक्त पूरे मामले से शासन को अवगत करा चुके हैं।
सोमवार को अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस, उत्तरांचल स्वच्छकार कर्मचारी संघ, उत्तरांचल स्वायत्तशासी कर्मचारी महासंघ, नगर निकाय कर्मचारी महासंघ से जुड़े कर्मचारी नेता संयुक्त मोर्चा के बैनर तले नगर निगम पहुंचे और दफ्तर बंद कराते हुए गेट के बाहर धरना देकर बैठ गए। कुछ देर बाद साझा मंच से जुड़े कर्मचारी नेताओं ने दफ्तर खुलवाने का प्रयास किया। इस दौरान गैराज में कुछ कर्मचारियों से नोकझोंक हुई। कर्मचारी नेताओं ने कुछ लोगों पर जबरन काम ठप करने का आरोप लगाया। इसके बाद दफ्तर खुलते और बंद होते रहे। हालांकि दफ्तरों में काम काज लगभग ठप रहा। कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा ने प्रशासन और शासन को ज्ञापन भी भेजा। जिसमें 30 नवंबर तक कार्रवाई न होने पर एक दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गई। शाम तक नगर निगम परिसर में नारे गूंजते रहे। दफ्तर बंद होने के चलते नगर निगम अपने काम लेकर पहुंचने वाले लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
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सरकार को बदनाम कर रहे कुछ लोग
नगर निगम गेट के बाहर धरने पर पहुंचे सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन किरणपाल वाल्मीकि ने कहा कि कुछ लोग कांग्रेस सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उनकी शिकायत मुख्यमंत्री हरीश रावत से की जाएगी। नामित पार्षद रमेश चंद्र छाछर और कर्मचारी नेता सुरेंद्र तेश्वर ने कहा कि अधिकारियों के साथ अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। टंकार कौशल ने कहा कि कर्मचारी पूरी तरह नगर आयुक्त के साथ हैं। राधेश्याम छाछर और सुनील राजौर ने भी कार्रवाई की मांग की। भल्ला कालेज के शिक्षणेत्तर कर्मचारी दीपक उप्रेती के नेतृत्व में अपना समर्थन देने धरना स्थल पर पहुंचे। चिकित्सा स्वास्थ्य, ऋषिकुल आयुर्वेदिक, गुरुकुल, रोडवेज जैसी विभागों के संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। धरने पर सुधाकर भट्ट, नंदन सिंह रावत, इंद्र सिंह रावत, राजन शर्मा, आत्मा राम, आनंद कांगड़ा, राजेश छाछर, अखिलेश शर्मा, हरीश ध्यानी, नवीन, मनोज, विनोद शर्मा, सुषमा कौशिक, प्रवीण तेश्वर आदि मौजूद रहे।
बंद कराने पर भड़का रिटायर्ड कर्मचारी
दफ्तर बंद कराने के दौरान कर्मचारी नेताओं और कर्मचारियों के बीच कई बार नोकझोंक हुई। दूसरी बार दफ्तर बंद कराने पहुंचे कर्मचारी नेताओं को एक रिटायर्ड कर्मचारी के गुस्से का शिकार होना पड़ा। काफी दिन से पेंशन के लिए चक्कर काट रहे एक रिटायर्ड कर्मचारी सोमवार को बजट आने की सूचना पर जानकारी लेने दफ्तर पहुंचे थे। इसी बीच कर्मचारी नेता दफ्तर बंद कराने वहां पहुंचे और सभी को दफ्तर से बाहर निकलने के लिए बोला। इस बात पर रिटायर्ड कर्मचारी भड़क उठा। अन्य कर्मचारी नेताओं ने उन्हें बमुश्किल शांत कराया।
तीन गुटों में बंटे नगर निगम के कर्मचारी
नगर आयुक्त से अभद्रता के मामले में कर्मचारी तीन गुटों में बंटे नजर आए। एक गुट ने दफ्तर बंद कराते हुए विरोध प्रदर्शन किया। दूसरे गुट ने कामकाज तो नहीं किया लेकिन दफ्तर जरूर खोले। कर्मचारियों का एक तीसरा गुट ऐसा भी रहा जिसने विरोध और समर्थन से दूरी बनाए रखे। ऐसे कई कर्मचारी मैदान में धूप सेकते नजर आए।
सफाई कर्मचारियों की तरह अन्य संविदा कर्मियों को नियमित करने की मांग को लेकर शनिवार को कर्मचारी नेता मुरली मनोहर और नामित पार्षद सचिन बेनीवाल के साथ नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे थे। वार्ता के दौरान कर्मचारी नेताओं और नगर आयुक्त के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। आरोप है कि मुरली मनोहर और सचिन बेनीवाल ने धक्का मुक्की करते हुए नगर आयुक्त के साथ अभद्रता की है। उनकी मेज पलटने का प्रयास भी किया। नगर आयुक्त पूरे मामले से शासन को अवगत करा चुके हैं।
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सोमवार को अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस, उत्तरांचल स्वच्छकार कर्मचारी संघ, उत्तरांचल स्वायत्तशासी कर्मचारी महासंघ, नगर निकाय कर्मचारी महासंघ से जुड़े कर्मचारी नेता संयुक्त मोर्चा के बैनर तले नगर निगम पहुंचे और दफ्तर बंद कराते हुए गेट के बाहर धरना देकर बैठ गए। कुछ देर बाद साझा मंच से जुड़े कर्मचारी नेताओं ने दफ्तर खुलवाने का प्रयास किया। इस दौरान गैराज में कुछ कर्मचारियों से नोकझोंक हुई। कर्मचारी नेताओं ने कुछ लोगों पर जबरन काम ठप करने का आरोप लगाया। इसके बाद दफ्तर खुलते और बंद होते रहे। हालांकि दफ्तरों में काम काज लगभग ठप रहा। कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा ने प्रशासन और शासन को ज्ञापन भी भेजा। जिसमें 30 नवंबर तक कार्रवाई न होने पर एक दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गई। शाम तक नगर निगम परिसर में नारे गूंजते रहे। दफ्तर बंद होने के चलते नगर निगम अपने काम लेकर पहुंचने वाले लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
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सरकार को बदनाम कर रहे कुछ लोग
नगर निगम गेट के बाहर धरने पर पहुंचे सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन किरणपाल वाल्मीकि ने कहा कि कुछ लोग कांग्रेस सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उनकी शिकायत मुख्यमंत्री हरीश रावत से की जाएगी। नामित पार्षद रमेश चंद्र छाछर और कर्मचारी नेता सुरेंद्र तेश्वर ने कहा कि अधिकारियों के साथ अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। टंकार कौशल ने कहा कि कर्मचारी पूरी तरह नगर आयुक्त के साथ हैं। राधेश्याम छाछर और सुनील राजौर ने भी कार्रवाई की मांग की। भल्ला कालेज के शिक्षणेत्तर कर्मचारी दीपक उप्रेती के नेतृत्व में अपना समर्थन देने धरना स्थल पर पहुंचे। चिकित्सा स्वास्थ्य, ऋषिकुल आयुर्वेदिक, गुरुकुल, रोडवेज जैसी विभागों के संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। धरने पर सुधाकर भट्ट, नंदन सिंह रावत, इंद्र सिंह रावत, राजन शर्मा, आत्मा राम, आनंद कांगड़ा, राजेश छाछर, अखिलेश शर्मा, हरीश ध्यानी, नवीन, मनोज, विनोद शर्मा, सुषमा कौशिक, प्रवीण तेश्वर आदि मौजूद रहे।
बंद कराने पर भड़का रिटायर्ड कर्मचारी
दफ्तर बंद कराने के दौरान कर्मचारी नेताओं और कर्मचारियों के बीच कई बार नोकझोंक हुई। दूसरी बार दफ्तर बंद कराने पहुंचे कर्मचारी नेताओं को एक रिटायर्ड कर्मचारी के गुस्से का शिकार होना पड़ा। काफी दिन से पेंशन के लिए चक्कर काट रहे एक रिटायर्ड कर्मचारी सोमवार को बजट आने की सूचना पर जानकारी लेने दफ्तर पहुंचे थे। इसी बीच कर्मचारी नेता दफ्तर बंद कराने वहां पहुंचे और सभी को दफ्तर से बाहर निकलने के लिए बोला। इस बात पर रिटायर्ड कर्मचारी भड़क उठा। अन्य कर्मचारी नेताओं ने उन्हें बमुश्किल शांत कराया।
तीन गुटों में बंटे नगर निगम के कर्मचारी
नगर आयुक्त से अभद्रता के मामले में कर्मचारी तीन गुटों में बंटे नजर आए। एक गुट ने दफ्तर बंद कराते हुए विरोध प्रदर्शन किया। दूसरे गुट ने कामकाज तो नहीं किया लेकिन दफ्तर जरूर खोले। कर्मचारियों का एक तीसरा गुट ऐसा भी रहा जिसने विरोध और समर्थन से दूरी बनाए रखे। ऐसे कई कर्मचारी मैदान में धूप सेकते नजर आए।