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Haridwar News: चेक बाउंस मामले में छह माह की जेल, 3.60 लाख का जुर्माना
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रोशनाबाद। न्यायिक मजिस्ट्रेट/प्रथम अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) तनुजा कश्यप की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को छह माह के साधारण कारावास और 3.60 लाख के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि में से 3.55 लाख परिवादी को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे, जबकि पांच हजार रुपये राजकोष में जमा होंगे। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
सुभाष नगर, ज्वालापुर निवासी केशवचंद्र जोशी ने अदालत में परिवाद दाखिल करते हुए बताया था कि वीरेंद्र वर्मा निवासी जगजीतपुर, कनखल ने बीमारी के इलाज और पारिवारिक जरूरतों के लिए वर्ष 2016-17 में उनसे कुल 3.40 लाख रुपये उधार लिए थे। उधार की रकम वापस करने के लिए उसने 14 फरवरी 2019 को ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का 3.40 लाख रुपये का चेक दिया था। चेक बैंक में भुगतान के लिए लगाया, लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित होकर वापस हो गया। इसके बाद परिवादी की ओर से वीरेंद्र को कानूनी नोटिस भेजकर रकम का भुगतान करने को कहा गया, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया। इसके बाद अदालत की शरण ली।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने वीरेंद्र वर्मा को धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने उसे छह माह के साधारण कारावास के साथ 3.60 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में 3.40 लाख के नकद लेनदेन का उल्लेख सामने आने पर अदालत ने संबंधित आयकर प्राधिकारी को इसकी सूचना भेजने के भी आदेश दिए हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में नकद लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को भेजने के निर्देश दिए।
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सुभाष नगर, ज्वालापुर निवासी केशवचंद्र जोशी ने अदालत में परिवाद दाखिल करते हुए बताया था कि वीरेंद्र वर्मा निवासी जगजीतपुर, कनखल ने बीमारी के इलाज और पारिवारिक जरूरतों के लिए वर्ष 2016-17 में उनसे कुल 3.40 लाख रुपये उधार लिए थे। उधार की रकम वापस करने के लिए उसने 14 फरवरी 2019 को ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का 3.40 लाख रुपये का चेक दिया था। चेक बैंक में भुगतान के लिए लगाया, लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित होकर वापस हो गया। इसके बाद परिवादी की ओर से वीरेंद्र को कानूनी नोटिस भेजकर रकम का भुगतान करने को कहा गया, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया। इसके बाद अदालत की शरण ली।
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सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने वीरेंद्र वर्मा को धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने उसे छह माह के साधारण कारावास के साथ 3.60 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में 3.40 लाख के नकद लेनदेन का उल्लेख सामने आने पर अदालत ने संबंधित आयकर प्राधिकारी को इसकी सूचना भेजने के भी आदेश दिए हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में नकद लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को भेजने के निर्देश दिए।
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