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जांच एसआईएस को देने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 26 Aug 2016 12:05 AM IST
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ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज के फर्जीवाड़े की जांच एसआईएस (विशेष जांच प्रकोष्ठ) को देने की तैयारी की जा रही है। मामला पेचीदा और जांच का दायरा लगातार बढ़ने के साथ ही पुलिस अब तक केवल नौ छात्रों को ही गिरफ्तार कर पाई है। परीक्षा में मुन्ना भाई उपलब्ध कराने से लेकर दाखिला दिलाने तक फर्जीवाड़ा रचने वाला पूरा गैग अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। जांच में अभी फर्जीवाड़े की कई और परतें खुलनी जरूरी हैं।
मुन्ना भाई पकड़ में आने के बाद विश्वविद्यालय के निर्देश पर बनी जांच टीम ने एक के बाद एक पूरे तीन बैच के 31 दागी छात्रों को बेनकाब कर दिया। इनमें शुरूआत में जिन तीन छात्रों को ही पुलिस गिरफ्तार कर पाई है। उन्हें भी कालेज ने खुद पुलिस को सौंपा। जबकि मुकदमा 28 छात्रों पर दर्ज है। बाकी छात्रों से लेकर उनकी जगह परीक्षा देने वाले मुन्ना भाई और गैंग का कोई भी सदस्य पुलिस के हाथ नहीं आ पाया है। वहीं कालेज अब पुराने छात्रों की कुंडली खंगालने की भी पूरी तैयारी कर चुका है। ऐसे में फर्जीवाड़े का और ज्यादा विस्तार होना तय है। ऐसे में मामले की जांच एसआईएस से कराने की तैयारी की जा रही है। एसआईएस ही इस मामले में प्रदेश भर में बिछी सारी कड़िय़ां ढूंढ सकती है।
यूपी तक से हायर किए गए मुन्ना भाई
उत्तराखंड में यूपीएमटी परीक्षा में फर्जीवाड़े के लिए यूपी तक से मुन्ना भाई हायर किए गए हैं। गिरफ्तार छात्रों से पूछताछ और पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है। इतने बड़े पैमाने पर मुन्ना भाई जुटाने के लिए उत्तराखंड ही नहीं यूपी से भी मेडिकल के छात्रों को किराये पर लाया गया था। गिरफ्तार छात्रों ने पुलिस को बताया है कि उन्होंने परीक्षा में मुन्ना भाई बैठाकर पास कराने के लिए भारापुर भौरी निवासी अकरम, जहांगीर व सुलेमान को दो से तीन लाख रुपये प्रति छात्र दिए थे। ये तीनों भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
मुन्ना भाई पकड़ में आने के बाद विश्वविद्यालय के निर्देश पर बनी जांच टीम ने एक के बाद एक पूरे तीन बैच के 31 दागी छात्रों को बेनकाब कर दिया। इनमें शुरूआत में जिन तीन छात्रों को ही पुलिस गिरफ्तार कर पाई है। उन्हें भी कालेज ने खुद पुलिस को सौंपा। जबकि मुकदमा 28 छात्रों पर दर्ज है। बाकी छात्रों से लेकर उनकी जगह परीक्षा देने वाले मुन्ना भाई और गैंग का कोई भी सदस्य पुलिस के हाथ नहीं आ पाया है। वहीं कालेज अब पुराने छात्रों की कुंडली खंगालने की भी पूरी तैयारी कर चुका है। ऐसे में फर्जीवाड़े का और ज्यादा विस्तार होना तय है। ऐसे में मामले की जांच एसआईएस से कराने की तैयारी की जा रही है। एसआईएस ही इस मामले में प्रदेश भर में बिछी सारी कड़िय़ां ढूंढ सकती है।
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यूपी तक से हायर किए गए मुन्ना भाई
उत्तराखंड में यूपीएमटी परीक्षा में फर्जीवाड़े के लिए यूपी तक से मुन्ना भाई हायर किए गए हैं। गिरफ्तार छात्रों से पूछताछ और पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है। इतने बड़े पैमाने पर मुन्ना भाई जुटाने के लिए उत्तराखंड ही नहीं यूपी से भी मेडिकल के छात्रों को किराये पर लाया गया था। गिरफ्तार छात्रों ने पुलिस को बताया है कि उन्होंने परीक्षा में मुन्ना भाई बैठाकर पास कराने के लिए भारापुर भौरी निवासी अकरम, जहांगीर व सुलेमान को दो से तीन लाख रुपये प्रति छात्र दिए थे। ये तीनों भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
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