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पितरों को तर्पण देने गंगा घाट पहुंचे श्रद्वालु
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नारायणी शिला पर तर्पण करते लोग ।
- फोटो : HARIDWAR
बुधवार को प्रतिपदा के साथ श्राद्ध पक्ष शुरू हो गए हैं। बुधवार को पहले दिन हरिद्वार के विभिन्न गंगा घाटों पर लोग अपने पितरों को तर्पण देने पहुंचे।
देवपुरा स्थित विश्व प्रसिद्ध नारायणी शिला पर पहुंचकर लोगों ने पितरों का तर्पण किया। विद्वान पंडितों ने पूरे विधि विधान के साथ तर्पण कराया। श्रद्धालु सुबह पांच बजे से ही गंगा घाटों कुशा, नाइसोता, सुभाष, बिरला, दक्ष मंदिर घाट पर काफी संख्या में श्रद्धालु पितरों का तर्पण करने पहुंचे। पितृपक्ष का समापन 17 सितंबर को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर होगा। 19 साल बाद ऐसा संयोग बना है कि दो अश्विन अधिकमास होने से श्राद्ध के एक महीने बाद शारदीय नवरात्र शुरू होंगे। वैसे हर साल श्राद्ध पक्ष खत्म होते ही नवरात्र शुरू हो जाता था।
ज्योतिषाचार्य पंडित विकास जोशी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पितरों को याद करते हुए उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान कर अपनी श्रद्धा, आस्था और कृतज्ञता प्रकट करेंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि पितृ पक्ष इस बार 16 के बजाय 17 दिन के होंगे। इसकी वजह पूर्णिमा तिथि का एक सितंबर को अनंत चतुर्दशी की दोपहर से प्रारंभ होना है। जो लोग अपने पितरों के निमित्त पूर्णिमा से पितृ मोक्ष अमावस्या तक नियमित रूप से तर्पण और श्राद्ध आदि कर्मकांड करेंगे, उनके लिए पितृ पक्ष 17 दिन का रहेगा, जबकि जो लोग अगले दिन प्रतिपदा से तर्पण शुरू करेंगे, उनके लिए यह पक्ष 16 दिन का ही रहेगा।
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देवपुरा स्थित विश्व प्रसिद्ध नारायणी शिला पर पहुंचकर लोगों ने पितरों का तर्पण किया। विद्वान पंडितों ने पूरे विधि विधान के साथ तर्पण कराया। श्रद्धालु सुबह पांच बजे से ही गंगा घाटों कुशा, नाइसोता, सुभाष, बिरला, दक्ष मंदिर घाट पर काफी संख्या में श्रद्धालु पितरों का तर्पण करने पहुंचे। पितृपक्ष का समापन 17 सितंबर को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर होगा। 19 साल बाद ऐसा संयोग बना है कि दो अश्विन अधिकमास होने से श्राद्ध के एक महीने बाद शारदीय नवरात्र शुरू होंगे। वैसे हर साल श्राद्ध पक्ष खत्म होते ही नवरात्र शुरू हो जाता था।
ज्योतिषाचार्य पंडित विकास जोशी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पितरों को याद करते हुए उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान कर अपनी श्रद्धा, आस्था और कृतज्ञता प्रकट करेंगे।
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ज्योतिषाचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि पितृ पक्ष इस बार 16 के बजाय 17 दिन के होंगे। इसकी वजह पूर्णिमा तिथि का एक सितंबर को अनंत चतुर्दशी की दोपहर से प्रारंभ होना है। जो लोग अपने पितरों के निमित्त पूर्णिमा से पितृ मोक्ष अमावस्या तक नियमित रूप से तर्पण और श्राद्ध आदि कर्मकांड करेंगे, उनके लिए पितृ पक्ष 17 दिन का रहेगा, जबकि जो लोग अगले दिन प्रतिपदा से तर्पण शुरू करेंगे, उनके लिए यह पक्ष 16 दिन का ही रहेगा।
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