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घोंसलों में आने लगी गौरैया
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
Updated Wed, 01 Jul 2015 01:52 AM IST
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पिछले 20 दिनों में पक्षी प्रेमियों की ओर से खरीदे गए 425 से अधिक घोंसलों में से 40 फीसदी में गौरैया की चहचहाहट गूंजने लग गई है। गौरैया की सुरक्षा को लेकर लोगों के बढ़ते रुझान को देखते हुए गुरुकुल कांगड़ी विवि ने 300 नए घोंसले बनाने का आर्डर दिया है।
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गुुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय स्थित पक्षी संवाद प्रयोगशाला के मुख्य अन्वेषणकर्ता एवं प्रोफेसर दिनेश भट्ट ने पिछले दिनों किए सर्वे में नई जानकारियां जुटाई हैं। उन्होंने बताया कि खरीदे गए घोंसलों में से 20 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए हैं। इससे यह साबित होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी गौरैया की संख्या में भारी गिरावट आई है।
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उन्होंने कहा कि जिन घोंसला में अभी तक गौरैया नहीं आई हैं, वहां सितंबर अंत तक गौरैया अपने प्रजनन काल में डेरा डाल देगी। उन्होंने बताया कि बुधवार (आज) से देहरादून में घोंसले मिलने शुरू हो जाएंगे।
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इन बातों का रखें ध्यान
पक्षी वैज्ञानिक डा. विनय सेठी ने बताया कि लोग घोंसलों के पास जाकर गौरैया की वीडियो और फोटो खींच रहे हैं। लेकिन यह गलत है। इससे गौरैया भयभीत होकर घोंसलों से दूरी बनाने लग जाती है। उन्होंने कहा कि घोंसले की ऊंचाई जमीन से आठ फुट ऊंचाई पर होनी चाहिए। इस पर सीधी धूप और पानी नहीं पड़ना चाहिए।
दो घोंसलों के बीच 10 फुट की दूरी जरूरी है। घोंसले के भीतर तिनके और खाने का सामन नहीं रखें। गौरैया खुद तिनका लाती है।
मौजूद नहीं ठोस आंकड़े
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रोफेसर वीके शर्मा ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में गौरैया की संख्या से जुड़े ठोस आंकड़े किसी के पास नहीं है। इस दिशा में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने गौरैया बचाव अभियान से जुड़े पक्षी वैज्ञानिक डा. विनय सेठी को बधाई दी है।