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सप्तसरोवर के घाटों पर फिर पहुंचा गंगाजल

Mon, 21 Mar 2016 12:16 AM IST
hridwar uttrakhanda india
hridwar uttrakhanda india Updated Mon, 21 Mar 2016 12:16 AM IST
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Sapta Sarovar then deliver on the ghats of Ganga
गूल से पहुंचाया जल - फोटो : अमर उजाला

हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार के घाटों पर आखिरकार गंगा पहुंच ही गईं। करीब पांच सालों से गंगाजल को तरस रहे इन घाटों पर जल लाने का काम राजाजी नेशनल पार्क ने किया है। घाटों पर जल पहुंचने से इस क्षेत्र के साधुओं और श्रद्धालुओं को अब परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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सप्तऋषि क्षेत्र में एक किलोमीटर दूर गंगा के बदले हुए रुख वाले स्थान से राजाजी नेशनल पार्क ने मजदूरों को लगाकर करीब पांच सौ मीटर गूल बनाकर गंगाजल को सप्तसरोवर क्षेत्र के घाटों तक पहुंचाया। शनिवार से इन घाटों पर पानी आने लगा। काम अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में पानी का प्रवाह यहां और भी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। गंगाजल विहीन घाटों पर पानी लाने के लिए राजाजी टाईगर रिजर्व ने मजदूर लगाए हैं। रेंजर डीपी उनियाल ने बताया संतों की भावनाओं सम्मान करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गंगाजल लाने के लिए गूल का निर्माण कर दिया गया है, कार्य अभी भी जारी है।
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संतों को आंदोलन रंग लाया
घाटों पर गंगा लाने की मांग को लेकर संतों का आंदोलन रंग लाया। संत बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी यहां के घाट सूखे पड़े थे। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से गंगा का रुख दूसरी तरफ हो गया था। जिससे सर्दी और गर्मी के मौसम में घाटों पर पानी नहीं होता। अर्द्धकुंभ मेला शुरू होने के बाद भी इन घाटों पर पानी नहीं पहुंचाया जा सका था। इसके विरोध में संतों को दो बार आमरण अनशन आंदोलन करना पड़ा। संतों का आंदोलन विधानसभा सत्र के दौरान भी उठा। आखिर सीएम हरीश रावत ने जिला प्रशासन और पार्क के अधिकारियों से बात करके घाटों तक जल पहुंचाने के निर्देश दिए थे।
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स्थायी समाधान नहीं
सप्तरोवर क्षेत्र में गंगा घाटों पर तात्कालिक रूप से पानी लाने में  सफलता तो मिल गई लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। बरसात में फिर इस नहर में मलबा भर जाएगा और फिर पहले जैसे स्थिति हो जाएगी। प्रशासन मुख्यमंत्री द्वारा संतों से किए गए घाटों पर जल प्रवाह बढ़ाने के वादे को पूरा करने के लिए लगभग पांच लाख रुपये नदी में बहाने की तैयारी है।

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जेसीबी चलाने पर भी उठ रहे सवाल
गीता कुटीर तपोवन के प्रबंधक शिवदास दुबे ने बताया कि नीलधारा की ओर केवल चार-पांच मजदूर लगे हुए थे। तीन दिन से नदी में जेसीबी भी काम कर रही थी। वहीं क्षेत्राधिकारी डीपी उनियाल ने जेसीबी के प्रयोग के आरोपों को गलत बताया।

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