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संतों को आकर्षित करती रही राजनीति

Fri, 06 May 2016 12:25 AM IST
hridwar uttrakhanda india
hridwar uttrakhanda india Updated Fri, 06 May 2016 12:25 AM IST
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हरिद्वार। हरिद्वार की राजनीति भगवानधारी संतों को बहुत आकर्षित करती रही। कई संतों ने राजनीति में किस्मत आजमाई और मुकाम पाए। यहां सभी राजनीतिक मंचों पर संतों का दबदबा कायम रहा। पार्टी भले ही कोई भी रही हो, संतों के बगैर मंचों की शोभा कभी नहीं बनी।

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शांतिकुंज के डा. प्रणव पंड्या को राज्य सभा के लिए मनोनीत किया गया है। परमार्थ आश्रम के स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती भारत सरकार में गृह राज्य मंत्री के पद तक पहुंचे। भगवान आश्रम के अधिष्ठाता साक्षी महाराज कई बार संसद की शोभा बढ़ा चुके हैं। धीसा पंथी आचार्य जगदीश मुनि दो बार हरिद्वार के विधायक रहे। महंत घनश्याम गिरी ने हरिद्वार विधानसभा सीट रिकॉड मतों से जीती। स्वामी यतीश्वरानंद आज भी विधायक हैं। ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी कांग्रेस संगठन में प्रदेश स्तर के कई पदों पर पहले भी रहे और आज भी हैं। सतपाल ब्रह्मचारी और स्वामी वागीश्वरानंद को हरिद्वार का चेयरमैन बने का अवसर प्राप्त हुआ। पिछले लोकसभा चुनाव में स्वामी रामदेव ने पूरे देश में भ्रमण कर जिस प्रकार भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया, वह किसी से छिपा नहीं है। स्वामी सत्यमित्रानंद, स्वामी प्रकाशांनद, स्वामी परमानंद, कल्याणानंद सरस्वती, साध्वी ऋतंभरा, साध्वी मैत्रेयी गिरी, स्वामी अवधेशानंद आदि संघ और विहिप परिवार से गहरे जुड़े हुए हैं। स्वामी ऋषिश्वरानंद, शिव चैतन्य पुरी आदि संतों ने कई चुनावों में भाग लिया। संत महेंद्र सिंह प्रत्येक राजनीतिक मंच की शोभा बनते रहे। हरिद्वार में अखाड़ों से जुड़े तमाम संतों ने राम मंदिर आंदोलन के समय अपनी भूमिका निभाई। कांग्रेस और सपा के मंचों पर कई संतों ने बार-बार अध्यक्षता की। संतों का राजनीति से पुराना रिश्ता रहा है।

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