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उपलब्धि का जश्न भी नहीं मना सके रावत
hridwar uttrakhanda india
Updated Sun, 27 Mar 2016 11:25 PM IST
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हरिद्वार। अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत अर्द्धकुंभ मेले को केंद्र सरकार की बिना वित्तीय मदद के ही संपन्न कराने का जश्न नहीं मना सके। एक तिहाई मेला संपन्न भी हो चुका है अब केवल एक महीने का आयोजन शेष है। अर्द्धकुंभ मेला पूरा होने से पहले ही रावत सरकार की विदाई हो गई।
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एक जनवरी से अर्द्धकुंभ मेला प्रारंभ हुआ था। 30 अप्रैल तक होने वाले इस आयोजन के पांच प्रमुख स्नान हो चुके हैं जबकि पांच अभी होने हैं। अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत अर्द्धकुंभ मेले की तैयारियों को लेकर काफी उत्साहित थे। उन्होंने मेले के लिए बजट जुटाने से लेकर काम कराने में खुद व्यक्तिगत रुचि ली। उनके विशेष प्रयासों का ही परिणाम रहा कि ज्वालापुर में रेलवे पुल के पास बना नया पुल, बिरला घट वाला पुल और हिल बाईपास जैसी बड़ी सौगात केंद्र सरकार की बिना आर्थिक मदद के भी हरिद्वार को अर्द्धकुंभ के बहाने मिल सकी।
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राजनीतिक संकट से पहले भी अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अर्द्धकुंभ मेले के शेष बचे स्नानों की तैयारियों की समीक्षा की थी और अधिकारियों को निर्देश दिए थे। एक जनवरी को अर्द्धकुंभ के प्रारंभ होने के पूजन पर जब विवादों के बादल उठे तो सीएम ने दोबारा 12 जनवरी को विशेष पूजा कराई थी। हरकी पैड़ी स्थित रविदास मंदिर के जीर्णोद्धार का विवाद निपटाना भी अपदस्थ सीएम के अतिरिक्त प्रयासों का ही परिणाम था। अर्द्धकुंभ के नाम पर रावत सरकार ने हरिद्वार को काफी कुछ दिया जिसकी प्रशंसा हरिद्वार के संत समाज से लेकर सामान्य लोग भी करते रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति शासन लागू हो जाने के चलते हरीश रावत का अर्द्धकुंभ को मुख्यमंत्री के रूप में सकुशल संपन्न कराने का सपना पूरा नहीं हो सका। पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी और चेतन ज्योति आश्रम के संचालक स्वामी ऋषिश्वरानंद सरस्वती का कहना है कि अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत का कार्यकाल विकास के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
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