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रमजान की तैयारियां पूरी, चांद का दीदार बाकी
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Thu, 25 May 2017 10:49 PM IST
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मुबारक माह रमजान की आमद के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मुस्लिमों के घर और इबादतगाहें रमजान के इस्तकबाल के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बस इंतजार है तो रमजान के चांद का। शुक्रवार को चांद दिखाई देने पर शनिवार का पहला रोजा हो सकता है। अगर चांद नजर नहीं आता है तो रविवार का पहला रोजा होना तय है।
रमजान माह में रोजा रखना इस्लाम के पांच अहम अरकान में से एक हैं। नमाज की तरह रोजा भी हर बालिग मुस्लिम पर फर्ज है। रमजान को सब महीनों में अफजल बताया गया है। इसी महीने में कुरआन नाजिल हुई थी। हदीस में बताया गया है कि रहमतों और बरकतों के इस महीने में नेकियों का सवाब 70 गुना ज्यादा बढ़ा दिया जाता है। यही वजह है कि रमजान में रोजा रखने के साथ साथ कुरआन की तिलावत, नवाफिल नमाज जैसी बाकी इबादतें भी कसरत से की जाती हैं। बहरहाल रमजान की आमद को देखते हुए मुस्लिमों के घरों और मस्जिदों में भरपूर तैयारियां की गई हैं। ज्वालापुर सहित आस पास के देहात में रमजान की आमद को लेकर रूहानी माहौल बना हुआ है। चूंकि रमजान के महीने में मस्जिदों में आम दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा नमाजी पहुंचते हैं, लिहाजा तरावीह के लिए भी कुरआन पढने और सुनाने वाले हाफिजों का इंतजाम अलग से किया गया है।
ज्वालापुर के मदरसा इस्लामिया रशीदिया के मोहतमिम मौलाना इकबाल कासमी ने बताया कि शुक्रवार को यदि चांद दिखाई देता है या मुल्क के किसी हिस्से से चांद दिखने की खबर आती है तो शनिवार को पहला रोजा हो सकता है। अगर शुक्रवार को चांद की कोई खबर नहीं मिलती है तो शनिवार की रात से तरावीह शुरू करते हुए रविवार का पहला रोजा हो जाएगा।
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रमजान माह में रोजा रखना इस्लाम के पांच अहम अरकान में से एक हैं। नमाज की तरह रोजा भी हर बालिग मुस्लिम पर फर्ज है। रमजान को सब महीनों में अफजल बताया गया है। इसी महीने में कुरआन नाजिल हुई थी। हदीस में बताया गया है कि रहमतों और बरकतों के इस महीने में नेकियों का सवाब 70 गुना ज्यादा बढ़ा दिया जाता है। यही वजह है कि रमजान में रोजा रखने के साथ साथ कुरआन की तिलावत, नवाफिल नमाज जैसी बाकी इबादतें भी कसरत से की जाती हैं। बहरहाल रमजान की आमद को देखते हुए मुस्लिमों के घरों और मस्जिदों में भरपूर तैयारियां की गई हैं। ज्वालापुर सहित आस पास के देहात में रमजान की आमद को लेकर रूहानी माहौल बना हुआ है। चूंकि रमजान के महीने में मस्जिदों में आम दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा नमाजी पहुंचते हैं, लिहाजा तरावीह के लिए भी कुरआन पढने और सुनाने वाले हाफिजों का इंतजाम अलग से किया गया है।
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ज्वालापुर के मदरसा इस्लामिया रशीदिया के मोहतमिम मौलाना इकबाल कासमी ने बताया कि शुक्रवार को यदि चांद दिखाई देता है या मुल्क के किसी हिस्से से चांद दिखने की खबर आती है तो शनिवार को पहला रोजा हो सकता है। अगर शुक्रवार को चांद की कोई खबर नहीं मिलती है तो शनिवार की रात से तरावीह शुरू करते हुए रविवार का पहला रोजा हो जाएगा।
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