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शहर में ऑटो-विक्रम रूट निर्धारण का विरोध
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ऑटो-विक्रम टेंपो महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने परिवहन मंत्री चंदन राम दास से देहरादून स्थित उनके निवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने हरिद्वार जिला प्रशासन की ओर से ऑटो-विक्रम के जबरन रूट निर्धारण किए जाने का विरोध किया।
महासंघ के महामंत्री राजेश भट्ट ने कहा कि हरिद्वार की भौगोलिक स्थिति देहरादून से एकदम अलग है। दो वर्षों के लॉकडाउन से त्रस्त ऑटो-विक्रम चालकों एवं मालिकों को बमुश्किल रोजगार का अवसर मिला है। वाहन स्वामी बैंकों की किश्त तक जमा नहीं कर पाए। अब चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। रूट निर्धारण होने से यात्री को बार-बार आटो-विक्रम बदलने पड़ेंगे। सुरेश राणा ने कहा कि ऑटो-विक्रम को कांटेक्ट कैरिज परमिट 40 किलोमीटर और 25 किलोमीटर के दायरे में दिए गए हैं। ऐसे में रूट निर्धारण करना अनुचित है। 2014 में कुछ वाहनों को रूट परमिट दिए गए थे लेकिन 6 माह बाद कांटेक्ट कैरिज परमिट में बदलना पड़ा। परिवहन मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मामले में एआरटीओ और जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में प्रिंस लोहाट, सुरेश राणा, राजेंद्र यादव, कुलदीप सैनी, संजीव कुमार और रामकुमार शामिल रहे।
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महासंघ के महामंत्री राजेश भट्ट ने कहा कि हरिद्वार की भौगोलिक स्थिति देहरादून से एकदम अलग है। दो वर्षों के लॉकडाउन से त्रस्त ऑटो-विक्रम चालकों एवं मालिकों को बमुश्किल रोजगार का अवसर मिला है। वाहन स्वामी बैंकों की किश्त तक जमा नहीं कर पाए। अब चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। रूट निर्धारण होने से यात्री को बार-बार आटो-विक्रम बदलने पड़ेंगे। सुरेश राणा ने कहा कि ऑटो-विक्रम को कांटेक्ट कैरिज परमिट 40 किलोमीटर और 25 किलोमीटर के दायरे में दिए गए हैं। ऐसे में रूट निर्धारण करना अनुचित है। 2014 में कुछ वाहनों को रूट परमिट दिए गए थे लेकिन 6 माह बाद कांटेक्ट कैरिज परमिट में बदलना पड़ा। परिवहन मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मामले में एआरटीओ और जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में प्रिंस लोहाट, सुरेश राणा, राजेंद्र यादव, कुलदीप सैनी, संजीव कुमार और रामकुमार शामिल रहे।
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