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जुनून ने बनाई अलग पहचान

Tue, 07 Mar 2017 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Tue, 07 Mar 2017 11:03 PM IST
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धर्मनगरी हरिद्वार में भी ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने अपने बल पर अलग पहचान बनाकर और मिसाल कायम की। किसी ने छोटे से गांव से जीवन की शुरूआत करके दुनियाभर में अपनी प्रतिभा का परचम फहराया तो किसी ने समाज में गरीब बच्चियों को गले लगाकर उनके लिए ही अपना जीवन समर्पित कर दिया। आज समाज इन महिलाओं की प्रतिभा और समर्पण का कायल है। यह महिलाएं समाज के लिए प्रेरणस्रोत बन गई।  
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अनाथ बच्चियों का समर्पित किया जीवन      
 जगजीतपुर स्थित मातृ आंचल संस्था की संस्थापिका कमलेश भारती एक ऐसा नाम है, जिसने अपना पूरा जीवन अनाथ, असहाय और जरूरतमंद बच्चियों के नाम लिख दिया है।       
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पिछले करीब 20 वर्षों से बालिकाओं के पालन और संरक्षण का जिम्मा निभा रही कमलेश भारती ने मातृ आंचल की शुरूआत खड़ड़ी में सिर्फ तीन अनाथ बच्चियों की परवरिश से की थी। अब उनकी संस्था में करीब 90 बालिकाएं हैं।  इन बच्चियों के रहने खाने पीने से लेकर शिक्षा दीक्षा और शादी तक का पूरी जिम्मेदारी कमलेश भारती और उनके साथ स्वयंसेवक के रूप में काम करने वाले ममता अग्रवाल जैसे जुनूनी लोग निभाते हैं। कई बालिकाएं ऐसी भी हैं, जिन्होंने अपनी शिक्षा पूरी कर नौकरी पेशा और स्वरोजगार को अपनाया है। दो हफ्ते पहले भी दो अनाथ बालिकाओं की शादी पूरे रीति रिवाज के साथ संपन्न कराई गई। अक्सर पुलिस या अन्य संस्थाएं लावारिस मिलने वाली बच्चियों को मातृ आंचल संस्था के सुपुर्द कर देते हैं। संस्था में पहुंचने के बाद बालिका की पूरी जिम्मेदारी कमलेश भारती खुद संभाल लेती हैं। कमलेश भारती का कहना है कि उनका सारा जीवन इसी पुण्य काम में लगेगा।       
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गांव से निकलकर दुनिया में छा गई वंदना      
 इस समय भारतीय महिला हाकी टीम की कप्तान वंदना कटारिया ने देश ही नहीं बल्कि दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए हरिद्वार का नाम रोशन किया है। जिला मुख्यालय से सटे रोशनाबाद निवासी वंदना कटारिया ने गांव में ही स्थित स्टेडियम में सबसे पहले हॉकी की स्टिक पकड़ी थी। इसके बाद उसकी प्रतिभा को ऐसे पंख लगे कि सफलता का कारवां बढ़ता ही गया। मेरठ व लखनऊ स्थित स्टेडियम में वंदना की प्रतिभा को प्रशिक्षकों ने तराशा। पहले राष्ट्रीय स्तर फिर एशिया और पिछले साल सिंगापुर में हुई चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को जीत दिलाकर वंदना ने साबित कर दिया कि वह बेहतर खिलाड़ी ही नहीं बल्कि सूझ बूझ और तकनीकी रूप से समृद्ध कप्तान भी है। इस समय भोपाल में चल रहे ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही वंदना ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए देशभर की महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई दी। साथ ही ग्रामीण परिवेश में रहने वाली अपने जैसी प्रतिभावान लड़कियों के लिए एक संदेश भी दिया। उनका कहना है कि क्षेत्र कोई भी हो, अगर दिलचस्पी है तो अपनी प्रतिभा को संवरने का मौका जरूर देना चाहिए। बिना मेहनत के सफलता नहीं मिलती।
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