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पांच दिन में खुले दफ्तर, खाली लौटे फरियादी
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Wed, 02 Nov 2016 10:17 PM IST
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दिवाली की पांच दिन की छुट्टियों के बाद सरकारी कार्यालय तो खुले लेकिन कामकाज नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के दौरे के कारण अधिकांश अफसर वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त रहे। अफसर कार्यालयों में नहीं बैठे तो कर्मचारी भी काम के प्रति गंभीर नजर नहीं आए। ऐसे में दूर दराज से पहुंचे फरियादियों को सरकारी कार्यालयों से निराश होकर लौटना पड़ा।
दीपावली को देखते हुए बाजार में एक पखवाड़े से त्योहारी सीजन का खुमार छाया हुआ था। निजी कंपनियों और प्रतिष्ठानों में जहां दीपावली पर टारगेट पूरा करने के लिए मारामारी मची हुई थी, वहीं सरकारी दफ्तरों में छुट्टी से पहले ही छुट्टियों जैसा माहौल था। धनतेरस पर भ्रम की स्थिति में कुछ दफ्तर खुले तो कुछ बंद रहे। इसके बाद 29 अक्तूबर से दफ्तरों में अवकाश चला आ रहा था। छोटी और बड़ी दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज के बाद बुधवार को पांचवें दिन दफ्तर खुले। आम लोगों को उम्मीद थी कि बुधवार को कई दिन बाद दफ्तर खुलने से सरकारी कामकाज होगा। इसी उम्मीद के साथ जिला मुख्यालय, तहसील और विकास भवन के कार्यालयों में बड़ी संख्या में फरियादी उमड़े।
बुधवार को कहीं भी कोई अधिकारी नहीं मिला। अधिकांश अफसरों के कार्यालय खाली पड़े थे या फिर ताले लटके रहे। बुधवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत के हरिद्वार दौरे पर रहने से अधिकारी वीआईपी ड्यूटी पर रहे। प्रमाणपत्र, एनओसी, पेंशन जैसे काम हो जाएंगे। अधिकांश दफ्तर अफसरों से खाली मिलने से काम नहीं हो पाए। एक हफ्ते से काम नहीं होने से दफ्तरों में फाइलों के ढेर लग गए। प्रमाणपत्रों के अलावा योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार भी मंद पड़ गई। अब दफ्तर खुले तो वीआईपी ड्यूटी से राहत मिलने पर ही फाइलों का निपटारा संभव है।
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कहीं लटके प्रमाणपत्र तो कहीं किसान कार्ड
सरकारी दफ्तरों में हफ्तेभर से छुट्टियों की स्थिति होने से मूल निवास, आय और जाति प्रमाणपत्रों के कार्य लटके पड़े हैं। बुधवार को धारीवाला से तहसील पहुंचे नरेश चौहान ने बताया कि कृषि कार्ड के लिए एनओसी की जरूरत है। तीन बार पहले भी तहसील आ चुके हैं, कभी सरकारी छुट्टी तो कभी अधिकारी दफ्तर में नहीं मिलते हैं। ऐसे में कृषि कार्य के लिए ऋण लेने में दिक्कत आ रही है।
प्रमाणपत्रों के आवेदन जारी
पुराने काम भले ही लटके हों, लेकिन राहत की बात यह रही कि नए आवेदन बदस्तूर जारी रहे। तहसील के जनाधार केंद्रों पर मूल निवास, आय व जाति प्रमाण पत्र के आवेदन करने वालों की भीड़ लगी रही।
दीपावली को देखते हुए बाजार में एक पखवाड़े से त्योहारी सीजन का खुमार छाया हुआ था। निजी कंपनियों और प्रतिष्ठानों में जहां दीपावली पर टारगेट पूरा करने के लिए मारामारी मची हुई थी, वहीं सरकारी दफ्तरों में छुट्टी से पहले ही छुट्टियों जैसा माहौल था। धनतेरस पर भ्रम की स्थिति में कुछ दफ्तर खुले तो कुछ बंद रहे। इसके बाद 29 अक्तूबर से दफ्तरों में अवकाश चला आ रहा था। छोटी और बड़ी दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज के बाद बुधवार को पांचवें दिन दफ्तर खुले। आम लोगों को उम्मीद थी कि बुधवार को कई दिन बाद दफ्तर खुलने से सरकारी कामकाज होगा। इसी उम्मीद के साथ जिला मुख्यालय, तहसील और विकास भवन के कार्यालयों में बड़ी संख्या में फरियादी उमड़े।
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बुधवार को कहीं भी कोई अधिकारी नहीं मिला। अधिकांश अफसरों के कार्यालय खाली पड़े थे या फिर ताले लटके रहे। बुधवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत के हरिद्वार दौरे पर रहने से अधिकारी वीआईपी ड्यूटी पर रहे। प्रमाणपत्र, एनओसी, पेंशन जैसे काम हो जाएंगे। अधिकांश दफ्तर अफसरों से खाली मिलने से काम नहीं हो पाए। एक हफ्ते से काम नहीं होने से दफ्तरों में फाइलों के ढेर लग गए। प्रमाणपत्रों के अलावा योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार भी मंद पड़ गई। अब दफ्तर खुले तो वीआईपी ड्यूटी से राहत मिलने पर ही फाइलों का निपटारा संभव है।
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कहीं लटके प्रमाणपत्र तो कहीं किसान कार्ड
सरकारी दफ्तरों में हफ्तेभर से छुट्टियों की स्थिति होने से मूल निवास, आय और जाति प्रमाणपत्रों के कार्य लटके पड़े हैं। बुधवार को धारीवाला से तहसील पहुंचे नरेश चौहान ने बताया कि कृषि कार्ड के लिए एनओसी की जरूरत है। तीन बार पहले भी तहसील आ चुके हैं, कभी सरकारी छुट्टी तो कभी अधिकारी दफ्तर में नहीं मिलते हैं। ऐसे में कृषि कार्य के लिए ऋण लेने में दिक्कत आ रही है।
प्रमाणपत्रों के आवेदन जारी
पुराने काम भले ही लटके हों, लेकिन राहत की बात यह रही कि नए आवेदन बदस्तूर जारी रहे। तहसील के जनाधार केंद्रों पर मूल निवास, आय व जाति प्रमाण पत्र के आवेदन करने वालों की भीड़ लगी रही।