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नहीं छुड़ाई जमानत राशि, वन विभाग की भरेगी तिजौरी
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पेड़ काटने के नाम पर जमा जमानत राशि से वन विभाग की तिजौरी भरने वाली है। हरिद्वार वन प्रभाग क्षेत्र में अपनी निजी जमीन से लगभग साढ़े आठ हजार पेड़ों को काटने के नाम पर जमा 21 लाख रुपये की धनराशि को वन विभाग जब्त करने जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि पेड़ काटने वालों ने वन विभाग की उन शर्तों का पालन नहीं किया, जिसके तहत यह राशि वापस की जानी थी। जमानत राशि छोड़ दी, लेकिन पेड़ नहीं लगाए।
वन विभाग निजी जमीन से प्रतिबंधित पेड़ काटने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ देता है। इसमें प्रमुख शर्त यह होती है कि एक पेड़ काटने के एवज में दो पौधे लगाकर उनकी तीन साल तक परवरिश करनी होती है। इसके लिए एक पेड़ को काटने की एवज में ढाई सौ रुपये के हिसाब से जमानत राशि जमा करनी पड़ती है। इसमें डाक विभाग से एनएससी बनाकर वन प्रभाग के दफ्तर में जमानत के तौर पर देनी होती है। काटे गए एक पेड़ की जगह दो पेड़ के हिसाब से लगाकर और उन्हें तीन साल तक तैयार करने के बाद कार्यालय में आवेदन करना पड़ता है। वन विभाग की ओर से काटे गए पेड़ों के सापेक्ष दोगुना पेड़ तैयार करने की जांच पड़ताल करने के बाद जमानत के रूप में रखी गई यह एनएसी छोड़ दी जाती है।
वर्ष 2002 से लेकर 2017 तक हरिद्वार वन प्रभाग क्षेत्र में लगभग 8400 ऐसे पेड़ काटे गए हैं, जिनकी जगह दोगुना पेड़ तैयार करने के नाम पर रखी गई राशि छुड़वाने के लिए लोग नहीं पहुंचे। इससे शासन के आदेश पर दो सितंबर को अंतिम नोटिस जारी कर 15 दिन में जमानत में रखी गई एनएससी को छुड़ाने के लिए लोगों से अपील की गई थी, लेकिन इनमें से एक भी व्यक्ति ने जमानत राशि छुड़वाने के लिए आवेदन नहीं किया है। ऐसे में अब जमानत के रूप में रखी गई 21 लाख रुपये की राशि को वन विभाग ने जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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जमानत राशि छुड़वाने के लिए लोग जब अपील करने के बाद भी नहीं आ रहे हैं तो उसे जब्त किया जाएगा। इससे आने वाला पैसा पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए खर्च किया जाएगा। जिसमें पौधरोपण से लेकर अन्य कार्य वन प्रभाग क्षेत्र में किए जाएंगे।
- नीरज शर्मा, डीएफओ, हरिद्वार
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वन विभाग निजी जमीन से प्रतिबंधित पेड़ काटने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ देता है। इसमें प्रमुख शर्त यह होती है कि एक पेड़ काटने के एवज में दो पौधे लगाकर उनकी तीन साल तक परवरिश करनी होती है। इसके लिए एक पेड़ को काटने की एवज में ढाई सौ रुपये के हिसाब से जमानत राशि जमा करनी पड़ती है। इसमें डाक विभाग से एनएससी बनाकर वन प्रभाग के दफ्तर में जमानत के तौर पर देनी होती है। काटे गए एक पेड़ की जगह दो पेड़ के हिसाब से लगाकर और उन्हें तीन साल तक तैयार करने के बाद कार्यालय में आवेदन करना पड़ता है। वन विभाग की ओर से काटे गए पेड़ों के सापेक्ष दोगुना पेड़ तैयार करने की जांच पड़ताल करने के बाद जमानत के रूप में रखी गई यह एनएसी छोड़ दी जाती है।
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वर्ष 2002 से लेकर 2017 तक हरिद्वार वन प्रभाग क्षेत्र में लगभग 8400 ऐसे पेड़ काटे गए हैं, जिनकी जगह दोगुना पेड़ तैयार करने के नाम पर रखी गई राशि छुड़वाने के लिए लोग नहीं पहुंचे। इससे शासन के आदेश पर दो सितंबर को अंतिम नोटिस जारी कर 15 दिन में जमानत में रखी गई एनएससी को छुड़ाने के लिए लोगों से अपील की गई थी, लेकिन इनमें से एक भी व्यक्ति ने जमानत राशि छुड़वाने के लिए आवेदन नहीं किया है। ऐसे में अब जमानत के रूप में रखी गई 21 लाख रुपये की राशि को वन विभाग ने जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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जमानत राशि छुड़वाने के लिए लोग जब अपील करने के बाद भी नहीं आ रहे हैं तो उसे जब्त किया जाएगा। इससे आने वाला पैसा पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए खर्च किया जाएगा। जिसमें पौधरोपण से लेकर अन्य कार्य वन प्रभाग क्षेत्र में किए जाएंगे।
- नीरज शर्मा, डीएफओ, हरिद्वार