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अब हाईकोर्ट ने लगाई खनन पर रोक

Fri, 16 Dec 2016 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Fri, 16 Dec 2016 10:33 PM IST
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बाद अब नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा में खनन पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि खनन होने पर डीएम और एसडीएम जिम्मेदार होंगे। हाईकोर्ट ने यूपी उत्तराखंड की परिसंपत्तियों को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पांच दिसंबर को यह आदेश दिए हैं। वहीं मातृसदन ने प्रशासन पर आदेश को छिपाने का आरोप लगाया है।

मातृसदन में पत्रकार से बातचीत में स्वामी शिवानंद ने बताया कि इससे गंगा में खनन को लेकर एक बार फिर पूरी स्थिति स्पष्ट हो गई है। साथ ही प्रशासन जिस शासनादेश की दुहाई देकर पीसीबी के फैसले को चुनौती देने का दावा कर रहा है, वह शासनादेश भी हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्वत: निष्प्रभावी हो जाता है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रशासन को हर हाल में खनन बंद कराना होगा। जहां तक बाढ़ का पानी पहुंचता है, वहां से भी खनन नहीं हो सकता। आदेश का पालन न होने पर जिलाधिकारी और संबंधित उप जिलाधिकारी को हाईकोर्ट की अवमानना झेलने के लिए तैयार रहना होगा।
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परिसंपत्तियों को लेकर दाखिल हुई थी याचिका
यूपी और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर एक जनहित याचिका उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद सलीम की ओर से नैनीताल हाईकोर्ट में दायर की गई थी। जिसमें उत्तराखंड सरकार को पक्षकार बनाया गया था। याचिका की सुनवाई करते हुए पांच दिसंबर को जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस आलोक सिंह ने परिसंपत्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। साथ ही गंगा में खनन पर रोक लगाते हुए यह साफ किया है कि आदेश का पालन न होने पर डीएम और एसडीएम व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
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इच्छा मृत्यु के संबंध में भेजी थी चिट्ठी
पिछले दिनों इच्छामृत्यु की अनुमति के संबंध में मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने राष्ट्रपति सहित पांच माननीयों को चिट्ठी भेजी थी। इनमें चीफ जस्टिस ऑफ उत्तराखंड को भी पत्र भेजा गया था। हालांकि ये फैसला परिसंपत्तियों को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दिया गया है। लेकिन माना ये भी जा रहा है कि मातृसदन की चिट्ठी का संज्ञान भी हाईकोर्ट की ओर से लिया गया है। खुद स्वामी शिवानंद भी ऐसा मानते हैं।

लगातार हो रहा खनन
स्वामी शिवानंद ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण संरक्षण की धारा-5 लागू की गई है। इसके बावजूद श्यामपुर, बिशनपुर, भोगपुर आदि क्षेत्रों में गंगा में खनन किया जा रहा है। क्रशर भी लगातार चल रहे हैं। बृहस्पतिवार की रात भी रानीमाजरा में जेसीबी से खनन किया गया। वहीं श्यामपुर में बुग्गियों से खनन सामग्री ले जाई गई। उन्होंने बताया कि मातृसदन की ओर से लगातार पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी दी जा रही है। इसके बावजूद कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसके परिणाम अधिकारियों को भुगतने होंगे।


आईएफएस चतुर्वेदी का शोषण कर रहे सीएम
हरिद्वार। भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के बार बार तबादले को लेकर मातृसदन ने मुख्यमंत्री हरीश रावत पर निशाना साधा है। आईएफएस चतुर्वेदी की ओर से मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए स्वामी शिवानंद ने सवाल उठाए कि आयोग का गठन होने के बाद बिना किसी ठोस कारण बार बार तबादला करने वाले मुख्यमंत्री होते कौन हैं। उन्होंने प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों के उत्पीड़न शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रष्ट अधिकारी जिले से लेकर शासन तक में मौज कर रहे हैं।
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