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धर्म न तो मतों में, न पंथों में और न विवादों में: शंकराचार्य
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 10 Feb 2017 10:18 PM IST
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि ब्रह्मसत्ता का अनुभव करने से धर्म का अनुभव होता है। धर्म का अर्थ है ब्रह्मसत्ता का एकाकार होना। धर्म न तो मतों में है, न पंथों में और न ही तार्किक विवादों में। प्रत्यक्ष अनुभव हो जाए, वही धर्म है।
शारदा पीठाधीश्वर शुक्रवार की दोपहर कनखल के जगद्गुरु आश्रम में यति सम्राट आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन प्रकाशानंद महाराज के नौवें निर्वाण दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन भर अनेक ऐसे लोग मिलते हैं जो परमेश्वर, आत्मा, विश्व के गुप्त रहस्यों आदि के बारे में बात करते हैं। किसी से भी पूछा कि परमेश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन हुए अथवा नहीं, तो हां कहने वाले बहुत कम लोग नजर आते हैं। धर्म से जुड़े लोग प्राय: एक दूसरे की आलोचना करते या लड़ते हुए नजर आते हैं। हकीकत यह है कि ब्रह्मज्ञानियों के अनुसार बाहर की वस्तुओं से अंतर्मन को प्रसन्न नहीं किया जा सकता है। संसार की उपलब्धियों में सुख नहीं। सुख तो अंतर्मन की अनुभूति में मिलता है। जगद्गुरु ने कहा कि जो व्यक्ति एक व्यक्ति का दूसरे से विभेद करता है, वह ज्ञानी नहीं हो सकता। व्यक्ति का चरित्र, बुद्धि, गुण और नैतिक आचरण मिलकर व्यक्तित्व बनाते हैं। जिसका व्यक्तित्व अनेक व्यक्तियों को प्रभावित करे, उसमें चुंबकीय आकर्षण दिखाई पड़ता है। भले ही उसने कोई भी वेश धारण कर रखा हो। ज्ञानी व्यक्ति करोड़ों को प्रभावित कर सकता है, पर वह उस योगी से भिन्न है जिसने आत्म ज्ञान प्राप्त कर लिया है। गुरुदेव प्रकाशानंद महाराज आत्म ज्ञानी संत थे।
शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि अध्यात्म का ज्ञान जरूरी है। इसके बगैर सुखी जीवन नहीं बिताया जा सकता। ब्रह्मलीन प्रकाशानंद महाराज के निर्वाण दिवस पर प्रात: काल सुंदर कांड का पाठ किया गया। पूर्णाहूति के पश्चात स्वामी प्रकाशानंद महाराज की समाधि स्थित चरण पादुका पर पूजन हुआ।
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पूजन में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तराखंड भाजपा प्रभारी श्याम जाजू और संघ के क्षेत्र प्रचारक आलोक कुमार ने भाग लिया। इस अवसर पर हैदराबाद से आए स्वामी भगवत आश्रम, दिल्ली से आए आचार्य विद्या सागर, ऋषिकेश से आए जगदीश्वरानंद महाराज, द्वारिका से आए महंत शांतानंद महाराज आदि ने भी विचार रखे। न्यासी विनोद अग्रवाल, जगदीश गुप्ता, अभिषेक कौशिक, शिव कुमार त्यागी, कैलाश तिवारी, नारायण शास्त्री आदि ने कार्यक्रम में भाग लिया। सभी के प्रति आभार जगद्गुरु पारमार्थिक न्यास के महामंत्री रविंद्र सिंह भदौरिया ने व्यक्त किया।
शारदा पीठाधीश्वर शुक्रवार की दोपहर कनखल के जगद्गुरु आश्रम में यति सम्राट आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन प्रकाशानंद महाराज के नौवें निर्वाण दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन भर अनेक ऐसे लोग मिलते हैं जो परमेश्वर, आत्मा, विश्व के गुप्त रहस्यों आदि के बारे में बात करते हैं। किसी से भी पूछा कि परमेश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन हुए अथवा नहीं, तो हां कहने वाले बहुत कम लोग नजर आते हैं। धर्म से जुड़े लोग प्राय: एक दूसरे की आलोचना करते या लड़ते हुए नजर आते हैं। हकीकत यह है कि ब्रह्मज्ञानियों के अनुसार बाहर की वस्तुओं से अंतर्मन को प्रसन्न नहीं किया जा सकता है। संसार की उपलब्धियों में सुख नहीं। सुख तो अंतर्मन की अनुभूति में मिलता है। जगद्गुरु ने कहा कि जो व्यक्ति एक व्यक्ति का दूसरे से विभेद करता है, वह ज्ञानी नहीं हो सकता। व्यक्ति का चरित्र, बुद्धि, गुण और नैतिक आचरण मिलकर व्यक्तित्व बनाते हैं। जिसका व्यक्तित्व अनेक व्यक्तियों को प्रभावित करे, उसमें चुंबकीय आकर्षण दिखाई पड़ता है। भले ही उसने कोई भी वेश धारण कर रखा हो। ज्ञानी व्यक्ति करोड़ों को प्रभावित कर सकता है, पर वह उस योगी से भिन्न है जिसने आत्म ज्ञान प्राप्त कर लिया है। गुरुदेव प्रकाशानंद महाराज आत्म ज्ञानी संत थे।
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शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि अध्यात्म का ज्ञान जरूरी है। इसके बगैर सुखी जीवन नहीं बिताया जा सकता। ब्रह्मलीन प्रकाशानंद महाराज के निर्वाण दिवस पर प्रात: काल सुंदर कांड का पाठ किया गया। पूर्णाहूति के पश्चात स्वामी प्रकाशानंद महाराज की समाधि स्थित चरण पादुका पर पूजन हुआ।
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पूजन में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तराखंड भाजपा प्रभारी श्याम जाजू और संघ के क्षेत्र प्रचारक आलोक कुमार ने भाग लिया। इस अवसर पर हैदराबाद से आए स्वामी भगवत आश्रम, दिल्ली से आए आचार्य विद्या सागर, ऋषिकेश से आए जगदीश्वरानंद महाराज, द्वारिका से आए महंत शांतानंद महाराज आदि ने भी विचार रखे। न्यासी विनोद अग्रवाल, जगदीश गुप्ता, अभिषेक कौशिक, शिव कुमार त्यागी, कैलाश तिवारी, नारायण शास्त्री आदि ने कार्यक्रम में भाग लिया। सभी के प्रति आभार जगद्गुरु पारमार्थिक न्यास के महामंत्री रविंद्र सिंह भदौरिया ने व्यक्त किया।