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कागजों में नाम, मैदान से गायब
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 21 Dec 2015 11:55 PM IST
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धनौरी/पथरी। पंचायतीराज अधिनियम में महिलाओं को आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके तहत जिले में हो रहे पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में महिलाएं चुनाव भी लड़ रही हैं। लेकिन स्थिति यह है कि महिला प्रत्याशी केवल कागजों तक सिमटी हुई है। मैदान में पूरी कमान इनके पति और परिजन कमान संभाले हुए हैं। बैनर, पोस्टरों तक से इनकी फोटो गायब हैं।
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इन दिनों जिले के सभी छह ब्लॉकों (बहादराबाद, रुड़की, नारसन, भगवानपुर, लक्सर और खानपुर) में पंचायत चुनाव की बयार बह रही है। बड़ी संख्या में महिलाएं जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रही हैं। पथरी क्षेत्र के कई गांवों में प्रचार के दौरान पुरुष तो दिखाई देते हैं लेकिन अधिकतर महिला प्रत्याशी प्रचार से नदारद हैं। धनौरी क्षेत्र में तो अधिकतर महिलाओं के प्रचार अभियान की पूरी कमान उनके पति और परिजन संभाले हुए हैं। प्रचार सामग्री तक से उन्हें दूर रखा गया है।
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राजपुर में ग्राम प्रधान का चुनाव रुखसाना लड़ रही हैं। बैनर पर उनका नाम तो हैं लेकिन फोटो उनके पति जुल्फिकार का लगा है। इसी गांव में प्रधान पद की उम्मीदवार समीदा बेगम के प्रचार पटों पर उनके स्थान पर उनके पति आदि हुसैन का फोटो लगा है। पूरणपुर साल्हापुर में खुर्शीदा प्रधान पद की प्रत्याशी हैं लेकिन फोटो उनके पति फुरकान अली का लगी हैं। ऐसे पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स पूरे जिले में नजर आ रहे हैं। इनके बारे में महिला प्रत्याशी के पति जुल्फिकार का कहना है कि उनके यहां महिलाओं को पर्दानशीं रखने का चलन है। उनका फोटो सार्वजनिक नहीं किया जाता। इसलिए ऐसा किया गया है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि महिलाओं के नाम पर राजनीति तो कर रहे हैं। लेकिन महिलाओं के लिए यह कैसी जागरूकता है। वह जनप्रतिनिधि चुनी तो जा सकती हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से अपनी बात तक नहीं कह सकती।
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