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मंत्री ने सचिव को दिया स्ट्रीट लाइट घोटाला की जांच का आदेश

Sat, 07 Sep 2019 11:33 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 07 Sep 2019 11:33 PM IST
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Minister orders secretary to investigate street light scam
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने हरिद्वार के नगर निगम में स्ट्रीट लाइट के करोड़ों के घोटाले की सचिव शहरी विकास को जांच कराने के आदेश दिए हैं। मंत्री का आदेश लेकर भाजपा की महिला पार्षद और कुछ भाजपाई शुक्रवार को देहरादून में सचिव शैलेश बगोली से मिले।
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भाजपा की पार्षद अन्नु मेहता ने बताया कि सचिव ने निदेशक शहरी विकास निदेशालय उत्तराखंड को जांच कराने का लिखित में निर्देश दे दिया है। पार्षद योगेंद्र सैनी, भाजपा नेता एवं पार्षद पतियों अंकुर मेहता, मंयक गुप्ता व चिराग अरोड़ा ने मंत्री से मिलकर नगर निगम द्वारा की जा रही है स्ट्रीट लाइट घोटाला की जांच पर अविश्वास जताया था। इन लोगों का कहना था कि जो आरोपी हैं वहीं नगर निगम की जांच कमेटी में है। इसके बाद शहरी विकास मंत्री ने शासन स्तर से जांच कराने का आदेश सचिव शहरी विकास को दिया है। स्ट्रीट लाइट खरीद में घोटाले का यह आरोप तत्कालीन नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया के कार्यकाल का बताया जा रहा है।
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एक करोड़ 75 लाख में खरीदी थी स्ट्रीट लाइट
हरिद्वार। निगम निगम ने लगभग एक करोड़ 75 लाख रुपये की वर्ष 2017-18 और 19 में स्ट्रीट लाइटें खरीदी थीं। भाजपा पार्षदों का आरोप यह है कि नगर निगम ने स्ट्रीट लाइट खरीदने का जिस कंपनी को दिया। स्ट्रीट लाइट की सप्लाई किसी फर्म ने की और भुगतान किसी अन्य को किया गया है।
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एएमएनए ने छोड़ दी जांच
इधर स्ट्रीट लाइट खरीद में कथित घोटाले को लेकर नगर निगम स्तर पर गठित जांच कमेटी की अध्यक्ष अपर नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने शनिवार को जांच करने से हाथ खड़े कर दिए।

नगर आयुुक्त लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता जांच कमेटी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है। इसके बजाए उसने एक पत्र दिया है जिसमें जांच कमेटी पर ही अविश्वास प्रकट किया है, इसलिए उचित होगा कि जांच किसी तीसरे पक्ष से कराई जाए। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के निर्देश पर नगर आयुक्त उदय सिंह राणा ने स्ट्रीट लाइट में कथित घोटाले की जांच के लिए अपर नगर आयुक्त (एएमएनए) नुपुर वर्मा की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया था। जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता अंकुर मेहता को पांच अगस्त को कमेटी के समक्ष उपस्थित होने और साक्ष्य देने के लिए बुलाया था। लेकिन शिकायतकर्ता नहीं आया न ही जांच के लिए कोई शिकायती है तो जांच किसकी की जाए। शिकायतकर्ता ने जांच ने लिखित में जांच कमेटी पर अविश्वास व्यक्त किया है।
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