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माघ स्नान का समापन आज
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Thu, 09 Feb 2017 10:36 PM IST
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महीनों में सबसे पवित्र माने जाने वाले माघ मास का समापन शुक्रवार को हो जाएगा। देश के विभिन्न भागों से आए श्रद्धालु पवित्र गंगा में स्नान के बाद अन्य धार्मिक कर्मकांड भी संपन्न कराएंगे। एक महीना धर्मनगरी में रुक कर स्नान करने वाले कल्पवासी उद्यापन करेंगे।
माघ मास में स्नान का महत्व कुंभ आदि पर्वों की भांति महत्व रखता है। प्रयाग तीर्थ पर तो कल्पवासियों का मेला कुंभ की तरह गंगा के मैदान में लगाया जाता है। हरिद्वार में रुक कर गंगा स्नान करने वालों की संख्या पिछले वर्षों से बढ़ती आ रही है। इस बार पूर्णिमा तिथि का क्षय हो गया है। चतुर्दशी और पूर्णिमा के स्नान तथा व्रत के दिन शुक्रवार को संपन्न हो जाएंगे। इस अवसर पर कर्ण छेदन, मुंडन और यज्ञोपवीत संस्कार भी किए जाते हैं। मकर संक्रांति से प्रारंभ हुए तिल पर्वों का भी पूूर्णिमा अंतिम दिन है। इस दिन श्रद्धालु एक बार फिर से तिल से बने पदार्थों का दान करेंगे। शुद्घ उद्यापन भी सक्षित्प रूप में कराए जाएंगे।
माघी पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी अधिक होता है, क्योंकि यह उत्तरायण में पड़ता है। शुक्रवार को होने वाला स्नान पुष्य नक्षत्र में पड़ेगा तथा चंद्रमा कर्क के रहेंगे। शास्त्रीय दृष्टि से पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों में श्रेष्ठ मान जाता है। पूर्णिमा स्नान के साथ ही फागुन मास शुरू हो जाएगा। मौसम बदले के बावजूद पूरे फागुन में शिशिर ऋतु बनी रहेगी।
माघ मास में स्नान का महत्व कुंभ आदि पर्वों की भांति महत्व रखता है। प्रयाग तीर्थ पर तो कल्पवासियों का मेला कुंभ की तरह गंगा के मैदान में लगाया जाता है। हरिद्वार में रुक कर गंगा स्नान करने वालों की संख्या पिछले वर्षों से बढ़ती आ रही है। इस बार पूर्णिमा तिथि का क्षय हो गया है। चतुर्दशी और पूर्णिमा के स्नान तथा व्रत के दिन शुक्रवार को संपन्न हो जाएंगे। इस अवसर पर कर्ण छेदन, मुंडन और यज्ञोपवीत संस्कार भी किए जाते हैं। मकर संक्रांति से प्रारंभ हुए तिल पर्वों का भी पूूर्णिमा अंतिम दिन है। इस दिन श्रद्धालु एक बार फिर से तिल से बने पदार्थों का दान करेंगे। शुद्घ उद्यापन भी सक्षित्प रूप में कराए जाएंगे।
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माघी पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी अधिक होता है, क्योंकि यह उत्तरायण में पड़ता है। शुक्रवार को होने वाला स्नान पुष्य नक्षत्र में पड़ेगा तथा चंद्रमा कर्क के रहेंगे। शास्त्रीय दृष्टि से पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों में श्रेष्ठ मान जाता है। पूर्णिमा स्नान के साथ ही फागुन मास शुरू हो जाएगा। मौसम बदले के बावजूद पूरे फागुन में शिशिर ऋतु बनी रहेगी।
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