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..हरिद्वार कुंभ में स्नान करने आएगा किन्नर अखाड़ा
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आने वाले हरिद्वार कुंभ मेले में पहली बार किन्नर अखाड़ा भी स्नान करेगा। इस अखाड़े का सृजन प्रयाग कुंभ में देशभर के किन्नरों ने किया था। इस अखाड़े को जूना अखाड़े की ओर से अपने साथ स्नान का समय दिया गया है। इसी के साथ माईबाड़ों के सभी महामंडलेश्वर भी जूना अखाड़े के साथ डुबकी लगाएंगे।
किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी त्रिपाठी विगत दिनों हरिद्वार आकर कुंभ संबंधी व्यवस्थाओं की चर्चा जूना अखाड़े के साथ कर चुकी है। जूना अखाड़े के संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने बताया कि जूना अखाड़े ने प्रयाग में किन्नर अखाड़े को पूर्ण सम्मान दिया था। इस अखाड़े का स्नान जूना अखाड़े के साथ कराया गया था। हरिद्वार कुंभ में भी किन्नर अखाड़ा कुंभ के सभी स्नान अखाड़े के साथ करेगा। साथ ही माईबाड़ों के तमाम महामंडलेश्वर जूना अखाड़े के साथ डुबकी लगाने जाएंगे। इस प्रकार जूना अखाड़ा ऐसा अकेला अखाड़ा बन गया है, जिसके साथ तीन अखाड़े स्नान करेंगे। इन चारों अखाड़ों का समय हरिद्वार के प्रत्येक कुंभ स्नान पर अलग अलग होगा। जूना अखाड़े के पीछे आह्वान, अग्नि और किन्नर अखाड़े चलेंगे। सभी अखाड़ों के महामंडलेश्वर अग्रिम पंक्ति में शामिल रहेंगे। चारों आचार्य महामंडलेश्वर सबसे आगे अखाड़े के जुलूस का नेतृत्व करेंगे। इसी प्रकार अखाड़ों की पेशवाईयों और धर्म ध्वजाओं के समय भी किन्नर अखाड़ा उपस्थित रहेगा। चारों अखाड़ों के लिए कुंभ के मेला क्षेत्र में एक साथ भूमि आवंटन किया जाएगा। जूना अखाड़े ने इसकी सूचना पहले ही कुंभ मेला प्रशासन को देते हुए चार अखाड़ों के लिए अधिक जमीन की मांग की है।
स्नानों में अखाड़े के क्रम का विशेष महत्व
जूना के साथ अग्नि, आह्वान और किन्नर, निरंजनी अखाड़े के साथ आनंद, महानिर्वाणी अखाड़े के साथ अटल अखाड़ा स्नान करने जाएंगे। इन सातों संन्यासी अखाड़ों के पीछे तीन बैरागी अणियां चलेगी। इनका क्रम दिगंबर, निर्मोही और निर्वाणी अणियों के रूप में रहेगा। बैरागियों के पीछे बड़ा अखाड़ा उदासीन, नया अखाड़ा उदासीन चलेंगे। सबसे पीछे स्नान का समय निर्मल अखाड़े को दिया गया है। इस प्रकार सभी 13 अखाड़ों के शाही स्नान हरिद्वार कुंभ में सभी कुंभ स्नान पर्वों पर सम्पन्न होंगे।
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किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी त्रिपाठी विगत दिनों हरिद्वार आकर कुंभ संबंधी व्यवस्थाओं की चर्चा जूना अखाड़े के साथ कर चुकी है। जूना अखाड़े के संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने बताया कि जूना अखाड़े ने प्रयाग में किन्नर अखाड़े को पूर्ण सम्मान दिया था। इस अखाड़े का स्नान जूना अखाड़े के साथ कराया गया था। हरिद्वार कुंभ में भी किन्नर अखाड़ा कुंभ के सभी स्नान अखाड़े के साथ करेगा। साथ ही माईबाड़ों के तमाम महामंडलेश्वर जूना अखाड़े के साथ डुबकी लगाने जाएंगे। इस प्रकार जूना अखाड़ा ऐसा अकेला अखाड़ा बन गया है, जिसके साथ तीन अखाड़े स्नान करेंगे। इन चारों अखाड़ों का समय हरिद्वार के प्रत्येक कुंभ स्नान पर अलग अलग होगा। जूना अखाड़े के पीछे आह्वान, अग्नि और किन्नर अखाड़े चलेंगे। सभी अखाड़ों के महामंडलेश्वर अग्रिम पंक्ति में शामिल रहेंगे। चारों आचार्य महामंडलेश्वर सबसे आगे अखाड़े के जुलूस का नेतृत्व करेंगे। इसी प्रकार अखाड़ों की पेशवाईयों और धर्म ध्वजाओं के समय भी किन्नर अखाड़ा उपस्थित रहेगा। चारों अखाड़ों के लिए कुंभ के मेला क्षेत्र में एक साथ भूमि आवंटन किया जाएगा। जूना अखाड़े ने इसकी सूचना पहले ही कुंभ मेला प्रशासन को देते हुए चार अखाड़ों के लिए अधिक जमीन की मांग की है।
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स्नानों में अखाड़े के क्रम का विशेष महत्व
जूना के साथ अग्नि, आह्वान और किन्नर, निरंजनी अखाड़े के साथ आनंद, महानिर्वाणी अखाड़े के साथ अटल अखाड़ा स्नान करने जाएंगे। इन सातों संन्यासी अखाड़ों के पीछे तीन बैरागी अणियां चलेगी। इनका क्रम दिगंबर, निर्मोही और निर्वाणी अणियों के रूप में रहेगा। बैरागियों के पीछे बड़ा अखाड़ा उदासीन, नया अखाड़ा उदासीन चलेंगे। सबसे पीछे स्नान का समय निर्मल अखाड़े को दिया गया है। इस प्रकार सभी 13 अखाड़ों के शाही स्नान हरिद्वार कुंभ में सभी कुंभ स्नान पर्वों पर सम्पन्न होंगे।
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