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महंगाई ने शादी वाले परिवारों का बजाया बैंड
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इन दिनों शादियों की धूम मची है। हर दिन शहर से लेकर देहात तक सैकड़ों शादियां हो रही हैं। शादियों के धूमधड़ाके पर भी महंगाई की मार है। सजावट, कैटरिंग और बैंडबाजा का किराया 30 से 40 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। डेस्टिनेशन वेडिंग में सीमित लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है।
शादियों में खाना पकाने के लिए उपयोग होने वाले व्यावसायिक सिलिंडर से लेकर किराना, सब्जी और फलों के दाम आसमान छू रहे हैं। साज-सजावट में इस्तेमाल होने वाले फूलों के दाम भी दोगुना तक हो चुके हैं। मजदूरी महंगी होने के कारण बैंडबाजा की जगह डीजे ने ले ली है। शहनाई वादक जो एक शादी के लिए सात हजार रुपये लेते थे, अब वह 11 से 15 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। शादी के सीजन में अच्छी कमाई करने वाले कैटरिंग संचालक, फ्लॉवर डेकोरेटर, बैंड संचालक से लेकर वाटिकाओं तक पर इस महंगाई की मार पड़ी है।
महंगाई के चलते लोगों के बजट में कटौती होने लगी है। मध्यमवर्गीय परिवारों में अब बैंडबाजे की धूम धड़ाका कम हो गई है। संपन्न लोग डेस्टिनेशन वेडिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्योंकि उसमें घर-परिवार सहित सिर्फ नजदीकी लोग ही शामिल होते हैं।
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कैटरिंग : इस समय व्यावसायिक सिलिंडर के दाम करीब 2465.60 रुपये है। एक शादी में आमतौर पर 8 से 10 सिलिंडर लग जाते हैं। किराने, फल, सब्जी, दूध, दही, पनीर के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। कैटरिंग में ठेका व्यवस्था होती है। जिसके तहत कैटरिंग संचालक को स्वयं ही सामान की व्यवस्था कर व्यंजन बनाने होते हैं। इसमें उन्हें मजदूरों व सामान की ढुलाई के लिए लोडिंग वाहन की जरूरत भी होती है। पहले जो एक प्लेट 400 से 450 में पड़ती थी, अब 550 से 600 रुपये तक पहुंच गई है।
बैंड-शहनाई और बग्घी: बैंड संचालकों के अनुसार बरातों में डीजे आने से उनके कारोबार पर असर पड़ा है। दरअसल, बैंड में बाजों के लिए 31 हजार और लाइटिंग के लिए 15 हजार रुपये लिए जाते थे। कुल मिलाकर 45 से 50 हजार रुपये का पैकेज होता था। अब डीजे में सिर्फ 30 हजार रुपये में गानों के साथ ही लाइटिंग का पैकेज होता है। शहनाई के लिए भी सात हजार रुपये के रेट बढ़कर अब 11 हजार रुपये हो चुके हैं। बग्घी पहले पांच हजार रुपये में होती थी, लेकिन इसका किराया भी 10 से 11 हजार रुपये हो चुका है। इसमें भी सिर्फ एक घोड़ा रहता है। दो घोड़ों की बग्घी के लिए अब 15 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं।
सजावट के लिए अधिकतर फूल दिल्ली से मंगाए जाते हैं। फूलों के दामों में बहुत बढ़ोतरी हुई है। यही कारण है कि शादियों में सजावट का पैकेज भी 30 प्रतिशत तक महंगा करना पड़ा है।
- उमेश कुमार, संचालक वेलकम फ्लावर्स
शहर में शादियां तो प्रतिदिन हो रही हैं, लेकिन महंगाई की वजह से कई बरातें बिना बैंड ही निकल रही हैं। लोडिंग वाहन और मजदूरी बढ़ने से अब लोग डीजे का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।
- प्रेम कुमार, प्रेम बैंड कनखल
- वर्तमान में सिलिंडर से लेकर किराना, सब्जी, फल, दूध आदि सभी के दाम बढ़े हुए हैं। ऐसे में लोग कैटरिंग के बजाय छोटे हलवाइयों से खाना बनवा रहे हैं। हम तो बुकिंग ही नहीं ले पा रहे हैं। - अधीर कौशिक, गुरुजी कैटर्स, हरिद्वार
- शादियों में लोग व्यंजनों में तो कटौती नहीं कर रहे हैं, लेकिन महंगाई की वजह से प्लेट की कीमत बढ़ी है। जिन्होंने पहले बुकिंग कर दी थी, उन्हें पुरानी रेट में ही खाना तैयार कर देना पड़ रहा है।
- चांद गिरि, चांद कैटर्स, खड़खड़ी
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शादियों में खाना पकाने के लिए उपयोग होने वाले व्यावसायिक सिलिंडर से लेकर किराना, सब्जी और फलों के दाम आसमान छू रहे हैं। साज-सजावट में इस्तेमाल होने वाले फूलों के दाम भी दोगुना तक हो चुके हैं। मजदूरी महंगी होने के कारण बैंडबाजा की जगह डीजे ने ले ली है। शहनाई वादक जो एक शादी के लिए सात हजार रुपये लेते थे, अब वह 11 से 15 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। शादी के सीजन में अच्छी कमाई करने वाले कैटरिंग संचालक, फ्लॉवर डेकोरेटर, बैंड संचालक से लेकर वाटिकाओं तक पर इस महंगाई की मार पड़ी है।
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महंगाई के चलते लोगों के बजट में कटौती होने लगी है। मध्यमवर्गीय परिवारों में अब बैंडबाजे की धूम धड़ाका कम हो गई है। संपन्न लोग डेस्टिनेशन वेडिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्योंकि उसमें घर-परिवार सहित सिर्फ नजदीकी लोग ही शामिल होते हैं।
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कैटरिंग : इस समय व्यावसायिक सिलिंडर के दाम करीब 2465.60 रुपये है। एक शादी में आमतौर पर 8 से 10 सिलिंडर लग जाते हैं। किराने, फल, सब्जी, दूध, दही, पनीर के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। कैटरिंग में ठेका व्यवस्था होती है। जिसके तहत कैटरिंग संचालक को स्वयं ही सामान की व्यवस्था कर व्यंजन बनाने होते हैं। इसमें उन्हें मजदूरों व सामान की ढुलाई के लिए लोडिंग वाहन की जरूरत भी होती है। पहले जो एक प्लेट 400 से 450 में पड़ती थी, अब 550 से 600 रुपये तक पहुंच गई है।
बैंड-शहनाई और बग्घी: बैंड संचालकों के अनुसार बरातों में डीजे आने से उनके कारोबार पर असर पड़ा है। दरअसल, बैंड में बाजों के लिए 31 हजार और लाइटिंग के लिए 15 हजार रुपये लिए जाते थे। कुल मिलाकर 45 से 50 हजार रुपये का पैकेज होता था। अब डीजे में सिर्फ 30 हजार रुपये में गानों के साथ ही लाइटिंग का पैकेज होता है। शहनाई के लिए भी सात हजार रुपये के रेट बढ़कर अब 11 हजार रुपये हो चुके हैं। बग्घी पहले पांच हजार रुपये में होती थी, लेकिन इसका किराया भी 10 से 11 हजार रुपये हो चुका है। इसमें भी सिर्फ एक घोड़ा रहता है। दो घोड़ों की बग्घी के लिए अब 15 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं।
सजावट के लिए अधिकतर फूल दिल्ली से मंगाए जाते हैं। फूलों के दामों में बहुत बढ़ोतरी हुई है। यही कारण है कि शादियों में सजावट का पैकेज भी 30 प्रतिशत तक महंगा करना पड़ा है।
- उमेश कुमार, संचालक वेलकम फ्लावर्स
शहर में शादियां तो प्रतिदिन हो रही हैं, लेकिन महंगाई की वजह से कई बरातें बिना बैंड ही निकल रही हैं। लोडिंग वाहन और मजदूरी बढ़ने से अब लोग डीजे का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।
- प्रेम कुमार, प्रेम बैंड कनखल
- वर्तमान में सिलिंडर से लेकर किराना, सब्जी, फल, दूध आदि सभी के दाम बढ़े हुए हैं। ऐसे में लोग कैटरिंग के बजाय छोटे हलवाइयों से खाना बनवा रहे हैं। हम तो बुकिंग ही नहीं ले पा रहे हैं। - अधीर कौशिक, गुरुजी कैटर्स, हरिद्वार
- शादियों में लोग व्यंजनों में तो कटौती नहीं कर रहे हैं, लेकिन महंगाई की वजह से प्लेट की कीमत बढ़ी है। जिन्होंने पहले बुकिंग कर दी थी, उन्हें पुरानी रेट में ही खाना तैयार कर देना पड़ रहा है।
- चांद गिरि, चांद कैटर्स, खड़खड़ी