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Haridwar News: दो पार्किंग वह भी यूपी सिंचाई विभाग की जमीन पर, अपनी एक भी नहीं

Thu, 10 Oct 2024 04:09 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 10 Oct 2024 04:09 AM IST
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In Haridwar, two parking lots are being operated between
I- अपनी जमीन बचाने में नगर निगम हो रहा है फेल, उधार की जमीन पर चल रही व्यवस्था
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I- दो पार्किंग में महज दो हजार वाहनों को पार्क करने की सुविधा, उमड़ते हैं 10 हजार से अधिक वाहनI

हरिद्वार में गंगा और हाईवे के बीच दो पार्किंग का संचालन किया जा रहा है। अनुबंध के आधार पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की इस भूमि को कांवड़ यात्रा, कुंभ और स्नान पर्व के लिए उपयोग में लेने की शर्त रखी गई है। बावजूद इसके इसी क्षेत्र में वेंडिंग जोन विकसित किया गया, इसी जमीन में पार्किंग विकसित कर दी गई। लापरवाही यह है कि यह सब करते हुए वर्ष 1996 में हुए हादसे की भी अनदेखी की गई, जिसमें एकल आयोग की जांच समिति ने गंगा पार घाटों के किनारे समूचे क्षेत्र को खाली रखने की सिफारिश की थी।

वर्तमान में हालत यह है कि छोटे स्नान पर्व और सप्ताहंत पर करीब 10 हजार वाहनों का बेड़ा धर्मनगरी में पहुंचता है। जबकि मौजूदा समय में पार्किंग की कुल क्षमता दो हजार वाहनों की भी नहीं है। हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद रोड़ीबेलवाला में खाली भूमि पर चल रही पार्किंग को हटा दिया गया। अब वहां एचआरडीए अवस्थापना विकास मद से सौंदर्यीकरण और अन्य कार्य कर रहा है। रोड़ीबेलवाला पार्किंग का संचालन ठप होने के बाद से यात्री जहां-तहां वाहन खड़े करते हैं। जिससे शहर से लेकर हाईवे तक पर जाम की स्थिति बनती है।
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शासन या नगर निकाय स्तर से भी स्थायी तौर पर पार्किंग की व्यवस्था को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है। ऐसे में सामान्य स्नान पर्व या सप्ताहंत पर भी शहर जाम की चपेट में रहता है। बीते कुछ स्नान पर्व पर पुलिस ने भी दावे किए और पूरा रोड मैप तैयार कर डायवर्जन तक किया गया, लेकिन जाम से मुक्ति दिलाने में नाकामयाबी हाथ लगी।
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Iयह बन सकते हैं विकल्पI

वर्तमान में गंगा घाट के क्षेत्र में दो पार्किंग का संचालन किया जा रहा है। इनमें दीनदयाल पार्किंग की क्षमता 650 वाहनों की है। वहीं पंतद्वीप पार्किंग में 1500 वाहन खड़े हो सकते हैं। लेकिन यह दोनों पार्किंग यात्रियों की भीड़ के आगे छोटी पड़ जाती है। विकल्प के रूप में पंतद्वीप पार्किग के सामने लालजीवाला में स्थायी पार्किंग बनाई जा सकती है। इसके अलावा चमगादड़ टापू की 1.40 लाख वर्ग मीटर की भूमि को भी पार्किंग बनाकर श्रद्धालुओं को सुविधा दी जा सकती है। इसके अलावा सर्वानंद घाट से लेकर लोकनाथ घाट तक बहुत बड़ा क्षेत्र है, इस पर अवैध तरीके से कब्जा है। इसे भी पार्किंग के रूप में विकसित किया जा सकता है। अगर यहां पार्किंग बने तो करीब 700 वाहन आसानी से पार्क किए जा सकते हैं। लालजीवाला पार्किंग को केवल कांवड़ में अस्थायी पार्किंग के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है।





Iसर्वाधिक दबाव रहता है भीमगोडा क्षेत्र मेंI



कुंभ मेले के दौरान जब पार्किंग के लिए लोग परेशान रहते हैं तो सूखी नदी को भी पार्किंग के रूप में आवंटित कर दिया जाता है। सामान्य स्नान पर्व और बीते कांवड़ के दौरान इसी सूखी नदी की धारा को मैदान समझकर कुछ लोगों ने अपने वाहन पार्क कर दिए। परिणाम स्वरूप अचानक आए पानी से छह वाहन गंगा की धारा में बह गए। श्रवण घाट आश्रम पर एक बड़े क्षेत्रफल की भूमि को नगर निगम ने प्रेम प्रकाश आश्रम को सौंदर्यीकरण के लिए दे दिया। आश्रम सौंदर्यीकरण कर पार्क बना चुका है। बैरागी कैंप में आगे के हिस्से को बड़े और भारी वाहनों के पार्किंग के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। यदि इन विकल्पों पर ध्यान दिया जाए तो शहर में जाम से मुक्ति मिल सकती है। बाजार क्षेत्र में रानीपुर मोड़ से लेकर वाल्मीकि चौक तक पार्किंग की व्यवस्था करने में नगर निगम फेल हो रहा है।






Iहाईकोर्ट के आदेश पर रोड़ीबेलवाला पार्किंग बंदI

वर्ष 1996 में हरकी पैड़ी गऊ घाट पर भारी भीड़ के चलते भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद तत्कालीन यूपी सरकार ने जांच के लिए जस्टिस राधा कृष्ण अग्रवाल की एकल जांच आयोग का गठन किया। आयोग ने अपने रिपोर्ट में पार्किंग को मूल कारण बताया और इसे बंद करने की पैरवी की थी। गंगा घाटों के आसपास आयोग ने पार्किंग हटाने की सिफारिश की थी। इसका संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय नैनीताल ने अगस्त 2024 में रोड़ीबेलवाला पार्किंग पर स्थगनादेश जारी कर दिया था। आयोग की इसी सिफारिश पर हादसे के बाद 1996 से 2023 तक रोड़ीबेलवाला मैदान पूरी तरह खाली रखा गया। इसी बीच 2023 में तत्कालीन नगर अयुक्त ने इस बफर जोन में पर्किंग और पिंक वेंडिंग जोन स्थापित कर दिया। इस पर सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए इस क्षेत्र को हरकी गंगा घाटों के आत्मा के रूप में माना और भीड़ नियंत्रित करने के लिए इस समूचे क्षेत्र को खाली रखने का निर्देश दिया।
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