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समृद्ध होती जा रही है हिंदी भाषा : डहेरिया
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भाषा एवं आधुनिक ज्ञान विज्ञान विभाग की ओर से उत्तराखंड संस्कृत विवि में हिंदी माह 2021 के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया।
विवि के सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए आधुनिक ज्ञान-विज्ञान संकाय के डीन प्रो. दिनेश चंद्र चमोला ने कहा कि हिंदी अपने गौरवशाली अतीत से लेकर आज सूचना क्रांति के दौर में विश्व में अपने वर्चस्व व क्षमता का लोहा मनवाती रही है। वह कालांतर से ही हमारी समृद्ध परंपराओं की संवाहक रही है। आज विश्व में हिंदी का बड़ा बाजार है। ज्ञान, विज्ञान या व्यापार को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए हिंदी का हाथ व साथ अपनाना ही पड़ेगा।
मुख्य वक्ता अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि भोपाल मध्यप्रदेश के कुलपति केएस डहेरिया ने कहा कि हिंदी वैश्विक स्तर पर विमर्श की भाषा बन गई है और जल्द ही हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनेगी। बाजार और व्यवसायिक कारणों से हिंदी समृद्ध होती जा रही है। समारोह के अध्यक्ष उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने राष्ट्र भाषा हिंदी के रूप में इसके महत्व व दीर्घकालीन उपयोग के बारे में बताया।
इस दौरान डॉ. शैलेश तिवारी, डॉ. बिंदुमती द्विवेदी, डॉ. श्वेता अवस्थी, डॉ. संजय त्रिपाठी, डॉ. अनीता चौबे, डॉ. कमलिनी, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, सुशील चमोली, मनमीत कौर, शोध छात्र अनूप बहुखंडी, ललित शर्मा, चित्रा पटेल, सविता, नीलम तिवारी, रितु श्रीवास्तव, नीलू वर्मा, निशा शर्मा, बबीता आर्य, पिंकी, गिरीश सती मौजूद रहे।
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विवि के सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए आधुनिक ज्ञान-विज्ञान संकाय के डीन प्रो. दिनेश चंद्र चमोला ने कहा कि हिंदी अपने गौरवशाली अतीत से लेकर आज सूचना क्रांति के दौर में विश्व में अपने वर्चस्व व क्षमता का लोहा मनवाती रही है। वह कालांतर से ही हमारी समृद्ध परंपराओं की संवाहक रही है। आज विश्व में हिंदी का बड़ा बाजार है। ज्ञान, विज्ञान या व्यापार को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए हिंदी का हाथ व साथ अपनाना ही पड़ेगा।
मुख्य वक्ता अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि भोपाल मध्यप्रदेश के कुलपति केएस डहेरिया ने कहा कि हिंदी वैश्विक स्तर पर विमर्श की भाषा बन गई है और जल्द ही हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनेगी। बाजार और व्यवसायिक कारणों से हिंदी समृद्ध होती जा रही है। समारोह के अध्यक्ष उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने राष्ट्र भाषा हिंदी के रूप में इसके महत्व व दीर्घकालीन उपयोग के बारे में बताया।
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इस दौरान डॉ. शैलेश तिवारी, डॉ. बिंदुमती द्विवेदी, डॉ. श्वेता अवस्थी, डॉ. संजय त्रिपाठी, डॉ. अनीता चौबे, डॉ. कमलिनी, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, सुशील चमोली, मनमीत कौर, शोध छात्र अनूप बहुखंडी, ललित शर्मा, चित्रा पटेल, सविता, नीलम तिवारी, रितु श्रीवास्तव, नीलू वर्मा, निशा शर्मा, बबीता आर्य, पिंकी, गिरीश सती मौजूद रहे।
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