{"_id":"586154c44f1c1bec14eebe60","slug":"hindi-has-been-abroad-on-several-research","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेशों में हिंदी पर हो रहे है अनेक शोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशों में हिंदी पर हो रहे है अनेक शोध
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Mon, 26 Dec 2016 11:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
इंटरनेशनल रोमा कल्चरल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति व पद्मश्री डा. श्याम सिंह शशि ने कहा कि हिंदी भाषा व्याकरण की दृष्टि से समृद्ध है। हिंदी भाषा आज विश्व के अनेक देशों में अपनाया जा रहा है। विदेशों में हिंदी पर अनेक शोध भी किए जा रहे हैं।
डा. श्याम सिंह शशि ने उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभाग में आयोजित व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व के अनेक देशों में पहुंचे भारतवंशियों ने हिंदी और संस्कृति को बचाए रखा है। विश्व में 80 प्रकार की रामायण है। इंडोनेशिया में रामायण पर मंचन भी होता है। जिससे यह पता चलता है कि उनके पूर्वज भारतीय थे। डा. शशि ने हिंदी भाषा के स्वरूप को बनाए रखने के लिए छात्र-छात्राओं से सोशल मीडिया पर व्याकरण को भी ध्यान में रखते हुए अच्छा लिखने और अच्छी पुस्तकें पढ़ने को कहा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने डा. श्याम सिंह शशि का स्वागत करते हुए उन्हें भारतीय संस्कृति का प्रचारक बताया। कुलपति ने संस्कृत भाषा को विश्व की भाषाओं की जननी बताया। कहा कि भारतीय संस्कृति को विश्व के लोगों तक पंहुचाने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्व शांति के लिए हिंदी और भारतीय संस्कृति दोनों की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद्र चमोला ने कहा कि हिंदी तथा भाषा विज्ञान के क्षेत्र में नए-नए विषयों की ओर छात्रों का ध्यान आकर्षित करते हुए उनके ज्ञान को बढ़ाना है। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं की ओर से कविता पाठ भी किया गया। हिंदी एवं भाषा विज्ञान के सहायक प्रो. डा. उमेश शुक्ला ने किया धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डा. अरविंद नारायण मिश्रा, डा. धीरज शुक्ला, आशुतोष दुबे, पूजा डबास, सुशील कुमार, मनोज गहतोड़ी आदि मौजूद थे।
डा. श्याम सिंह शशि ने उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभाग में आयोजित व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व के अनेक देशों में पहुंचे भारतवंशियों ने हिंदी और संस्कृति को बचाए रखा है। विश्व में 80 प्रकार की रामायण है। इंडोनेशिया में रामायण पर मंचन भी होता है। जिससे यह पता चलता है कि उनके पूर्वज भारतीय थे। डा. शशि ने हिंदी भाषा के स्वरूप को बनाए रखने के लिए छात्र-छात्राओं से सोशल मीडिया पर व्याकरण को भी ध्यान में रखते हुए अच्छा लिखने और अच्छी पुस्तकें पढ़ने को कहा।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने डा. श्याम सिंह शशि का स्वागत करते हुए उन्हें भारतीय संस्कृति का प्रचारक बताया। कुलपति ने संस्कृत भाषा को विश्व की भाषाओं की जननी बताया। कहा कि भारतीय संस्कृति को विश्व के लोगों तक पंहुचाने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्व शांति के लिए हिंदी और भारतीय संस्कृति दोनों की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद्र चमोला ने कहा कि हिंदी तथा भाषा विज्ञान के क्षेत्र में नए-नए विषयों की ओर छात्रों का ध्यान आकर्षित करते हुए उनके ज्ञान को बढ़ाना है। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं की ओर से कविता पाठ भी किया गया। हिंदी एवं भाषा विज्ञान के सहायक प्रो. डा. उमेश शुक्ला ने किया धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डा. अरविंद नारायण मिश्रा, डा. धीरज शुक्ला, आशुतोष दुबे, पूजा डबास, सुशील कुमार, मनोज गहतोड़ी आदि मौजूद थे।
विज्ञापन