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हरिद्वार से भी रहा सिमी के आतंकियों का कनेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Mon, 31 Oct 2016 11:55 PM IST
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मध्यप्रदेश में मुठभेड़ में मारे गए आतंकी संगठन सिमी के आतंकियों में से दो आतंकियों के तार हरिद्वार से भी जुड़े रहे हैं। बिजनौर के मोहल्ला जाटान से फरार होने के बाद दो आतंकी कार लूट के इरादे से हरिद्वार आए थे पर असफल रहे थे। इसके बाद दून और मसूरी में भी कार लूट में असफलता ही हाथ लगी थी।
सोमवार तड़के मध्यप्रदेश की सेंट्रल जेल भोपाल से हेड कांस्टेबल रमाशंकर की हत्या कर सिमी के आठ आतंकी दीवार फांदकर फरार हो गए थे। कुछ ही घंटों में दस किलोमीटर की दूरी पर गांव आचारपुरा के पास सभी आतंकी मारे गए थे। इन आतंकियों में से चार आतंकी वर्ष 2014 में सितंबर में बिजनौर के मोहल्ला जाटान से उस वक्त फरार हुए थे जब बनाते वक्त बम फटा था और एक आतंकी घायल भी हो गया था। घायल साथी को लेकर तीन साथी बिजनौर की सीमा पर एक खेत में छिप गए थे और दो आतंकी हरिद्वार आए थे। उनका इरादा था कि हरिद्वार से कार लूटकर वे अपने घायल साथी को लेकर मध्यप्रदेश की तरफ चले जाएं। लेकिन ऐसा हो नहीं सका था।
हरिद्वार में कई घंटे गुजारने के बाद वे इसी मकसद से देहरादून और मसूरी भी गए थे। वहां भी असफल ही रहे थे। फिर ट्रेन से मुरादाबाद पहुंचे थे और ढाई लाख में एक इंडिगो कार खरीदी थी। फिर ये आतंकी अपने घायल साथी को लेकर मध्यप्रदेश की तरफ निकल गए थे। इन्होंने करीब एक माह कार में ही बिताया था। फिर सभी मध्यप्रदेश पहुंचे थे और फिर दक्षिण भारत का रुख किया था। वर्ष 2016 में ये सभी दक्षिण भारत के राउरकेला से गिरफ्तार हुए थे और तब से जेल में ही थे।
सोमवार तड़के मध्यप्रदेश की सेंट्रल जेल भोपाल से हेड कांस्टेबल रमाशंकर की हत्या कर सिमी के आठ आतंकी दीवार फांदकर फरार हो गए थे। कुछ ही घंटों में दस किलोमीटर की दूरी पर गांव आचारपुरा के पास सभी आतंकी मारे गए थे। इन आतंकियों में से चार आतंकी वर्ष 2014 में सितंबर में बिजनौर के मोहल्ला जाटान से उस वक्त फरार हुए थे जब बनाते वक्त बम फटा था और एक आतंकी घायल भी हो गया था। घायल साथी को लेकर तीन साथी बिजनौर की सीमा पर एक खेत में छिप गए थे और दो आतंकी हरिद्वार आए थे। उनका इरादा था कि हरिद्वार से कार लूटकर वे अपने घायल साथी को लेकर मध्यप्रदेश की तरफ चले जाएं। लेकिन ऐसा हो नहीं सका था।
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हरिद्वार में कई घंटे गुजारने के बाद वे इसी मकसद से देहरादून और मसूरी भी गए थे। वहां भी असफल ही रहे थे। फिर ट्रेन से मुरादाबाद पहुंचे थे और ढाई लाख में एक इंडिगो कार खरीदी थी। फिर ये आतंकी अपने घायल साथी को लेकर मध्यप्रदेश की तरफ निकल गए थे। इन्होंने करीब एक माह कार में ही बिताया था। फिर सभी मध्यप्रदेश पहुंचे थे और फिर दक्षिण भारत का रुख किया था। वर्ष 2016 में ये सभी दक्षिण भारत के राउरकेला से गिरफ्तार हुए थे और तब से जेल में ही थे।
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