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हनुमान ने कराई राम-सुग्रीव की मित्रता
ब्यूूराो/ अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sun, 09 Oct 2016 12:36 AM IST
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रामलीला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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हरिद्वार। शहर से देहात तक जगह-जगह रामलीला का मंचन जारी है। जैसे-जैसे रामलीला समाप्ति की ओर है दर्शकों की भीड़ बढ़ रही है।
शुक्रवार रात शहर की मुख्य रामलीला के मंच पर सुग्रीव मैत्री, बाली वध और हनुमान-रावण संवाद का मंचन किया गया। कमेटी के महामंत्री कृष्ण मूर्ति भट्ट के संचालन और मुख्य दिग्दर्शक महाराज कृष्ण सेठ के निर्देशन में शबरी-राम दर्शन के माध्यम से भगवान की असहायों के प्रति कृपा दृष्टि की प्रस्तुति की गई। जबकि सुग्रीव और राम की मित्रता कराने में हनुमान की भूमिका सराही गई। इस प्रसंग के माध्यम से जनता को सीधे प्रेरणा दी गई कि परस्पर मिलन से दोनों के काम सिद्ध हो जाते हैं।
बाली ने अपने छोटे भाई की पत्नी को रखकर दुष्टता का परिचय दिया। इसीलिए भगवान राम ने उसे छिपकर मारा। सुग्रीव ने भी राम के उपकार का बदला चुकाने के लिए अपनी संपूर्ण सेना को सीता की खोज में लगा दिया गया। हनुमान ने जब लंका जाकर माता सीता को राम की मुद्रिका दी तो वह आश्चर्य चकित हो गईं और प्रमाण स्वरूप अपना चूड़ामणि हनुमान को देकर विदा किया।
इन सभी दृश्यों को मनोहारी बनाने में हनुमान के रूप में अरुण वर्मा, शबरी-हरी, बाली-सचिन गौड़, सुग्रीव जितेंद्र खन्ना और रावण के रूप में गुरजीत सिंह की भूमिका सराहनीय रही। मेघनाद के रूप में पवन खैरवाल, अक्षय कुमार, अंकित तिवारी और माता सीता के रूप में मोहित गिरि ने भारतीय नारी के गौरव को बढ़ाया।
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आज की रामलीला में सर्वाधिक जन समुदाय के समक्ष सर्वाधिक दृष्यों का मंचन करने में सराहनीय भूमिका का निर्वाह करने वालों में गंगाशरण मददगार, कृष्ण मूर्ति भट्ट, महाराज कृष्ण सेठ, रविकांत अग्रवाल, डॉ. संदीप कपूर, भगवत शर्मा, नरेंदरा शर्मा, रमन शर्मा, अनिल सुखीजा, सुनील वधावन, श्रीकृष्ण खन्ना, वीरेंद्र गोस्वामी, सुनील भसीन, राकेश गोयल, महेश गौड़ और पवन शर्मा का योगदान सराहनीय रहा। प्रेस प्रभारी डॉ. संदीप कपूर ने बताया कि नौ अक्तूबर को कुंभकरण-मेघनाद वध और सुलोचना विलाप की लीला का दर्शन होगा। जबकि 10 अक्तूबर को रात्रि विश्राम रहेगा। रामनगर ज्वालापुर में चल रही रामलीला में भी कई दृश्यों का मंचन किया गया।
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शुक्रवार रात शहर की मुख्य रामलीला के मंच पर सुग्रीव मैत्री, बाली वध और हनुमान-रावण संवाद का मंचन किया गया। कमेटी के महामंत्री कृष्ण मूर्ति भट्ट के संचालन और मुख्य दिग्दर्शक महाराज कृष्ण सेठ के निर्देशन में शबरी-राम दर्शन के माध्यम से भगवान की असहायों के प्रति कृपा दृष्टि की प्रस्तुति की गई। जबकि सुग्रीव और राम की मित्रता कराने में हनुमान की भूमिका सराही गई। इस प्रसंग के माध्यम से जनता को सीधे प्रेरणा दी गई कि परस्पर मिलन से दोनों के काम सिद्ध हो जाते हैं।
बाली ने अपने छोटे भाई की पत्नी को रखकर दुष्टता का परिचय दिया। इसीलिए भगवान राम ने उसे छिपकर मारा। सुग्रीव ने भी राम के उपकार का बदला चुकाने के लिए अपनी संपूर्ण सेना को सीता की खोज में लगा दिया गया। हनुमान ने जब लंका जाकर माता सीता को राम की मुद्रिका दी तो वह आश्चर्य चकित हो गईं और प्रमाण स्वरूप अपना चूड़ामणि हनुमान को देकर विदा किया।
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इन सभी दृश्यों को मनोहारी बनाने में हनुमान के रूप में अरुण वर्मा, शबरी-हरी, बाली-सचिन गौड़, सुग्रीव जितेंद्र खन्ना और रावण के रूप में गुरजीत सिंह की भूमिका सराहनीय रही। मेघनाद के रूप में पवन खैरवाल, अक्षय कुमार, अंकित तिवारी और माता सीता के रूप में मोहित गिरि ने भारतीय नारी के गौरव को बढ़ाया।
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आज की रामलीला में सर्वाधिक जन समुदाय के समक्ष सर्वाधिक दृष्यों का मंचन करने में सराहनीय भूमिका का निर्वाह करने वालों में गंगाशरण मददगार, कृष्ण मूर्ति भट्ट, महाराज कृष्ण सेठ, रविकांत अग्रवाल, डॉ. संदीप कपूर, भगवत शर्मा, नरेंदरा शर्मा, रमन शर्मा, अनिल सुखीजा, सुनील वधावन, श्रीकृष्ण खन्ना, वीरेंद्र गोस्वामी, सुनील भसीन, राकेश गोयल, महेश गौड़ और पवन शर्मा का योगदान सराहनीय रहा। प्रेस प्रभारी डॉ. संदीप कपूर ने बताया कि नौ अक्तूबर को कुंभकरण-मेघनाद वध और सुलोचना विलाप की लीला का दर्शन होगा। जबकि 10 अक्तूबर को रात्रि विश्राम रहेगा। रामनगर ज्वालापुर में चल रही रामलीला में भी कई दृश्यों का मंचन किया गया।