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बिक्री करना गंगाजल का घोर अपमान: शंकराचार्य
hridwar uttrakhanda india
Updated Sun, 12 Jun 2016 12:19 AM IST
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हरिद्वार। ज्योर्तिपीठ एवं शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि गंगाजल को बेचना गंगा का सबसे बड़ा अपमान है। गंगा को शुद्ध करने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसका बाजारीकरण सर्वथा अनुचित है। सभी को मिलकर इसका विरोध करना चाहिए।
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शनिवार की देर शाम दिल्ली से हरिद्वार कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने पत्रकारों से वार्ता में गंगाजल की बिक्री का विरोध किया। इसके बाद उन्होंने यूपी के कैराना से हो रहे पलायन पर यूपी की सपा सहित केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार को भी जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश और केंद्र दोनों सरकारों को हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों को रोकने का प्रयास करना चाहिए। शंकराचार्य ने लंढौरा प्रकरण पर कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। प्रधानमंत्री के लगातार विदेश दौरों पर उन्होंने कहा कि विदेश यात्रा करना गलत नहीं है, लेकिन वह देश के हित में होनी चाहिए। उन्होंने मथुरा कांड के लिए यूपी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यूपी में यादववाद हावी है।
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भाजपा के दलित प्रेम पर ली चुटकी
भाजपा के दलित प्रेम पर शंकराचार्य ने कहा कि दलित हो या अन्य कोई भी समाज। गंगा मां हो या क्षिप्रा नदी, सभी में कोई भी स्नान कर सकता है। इसके लिए कोई अलग घाट बनाने या अलग समय की जरूरत नहीं है। समाज में एकरूपता लाने के लिए हमने भी दलितों के साथ स्नान करने को कहा था। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दलितों के साथ भोजन करके कोई नया काम नहीं कर रहे हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ---------------------
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