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बीमा की किश्त के रूपये लौटाने के दिए फोरम ने आदेश
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जिला उपभोक्ता फोरम ने पीएनबी मेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड व उसके शाखा कार्यालय को उपभोक्ता सेवा में लापरवाही व कमी पाते हुए बीमा पॉलिसी की जमा किश्त व अन्य चार्ज के रूप में 67,669 रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से लौटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही वाद खर्च के रूप में दो हजार रुपये शिकायतकर्ता को देने होंगे।
सहदेव सिंह पुत्र लक्ष्मी चंद्र निवासी ग्राम अलीपुर बहादराबाद ने पीएनबी मेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड कार्यालय बैंगलोर कर्नाटक व मुंबई कार्यालय और स्थानीय शाखा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। बताया कि उनका बैंक खाता स्थानीय शाखा में चला आ रहा है। स्थानीय एरिया मैनेजर ने उनसे संपर्क कर बीमा पॉलिसी के बारे में बताया था। इस पर उन्होंने एक पॉलिसी मेट लाइफ गारंटेड इनकम प्लान लेते हुए प्रथम किश्त, अन्य चार्ज समेत 67,669 रुपये जमा कराए थे। बताया था कि पांच वर्षों तक 65,669 पैसे जमा कराने के बाद बीमा कंपनी प्रत्येक वर्ष 44 हजार रुपये देगी। यही नहीं, दस साल के बाद पांच लाख रुपये देगी। इसमें चार लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर भी होगा, लेकिन जब शिकायतकर्ता द्वितीय किश्त जमा करने के लिए गया था तब पता चला कि दस वर्ष के बाद केवल एक लाख 20 हजार रुपये ही दिए जाएंगे। जब शिकायतकर्ता के इस संबंध में आलाधिकारियों से बात की तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद फोरम की शरण ली थी। शिकायत की सुनवाई करते हुए फोरम के अध्यक्ष कंवर सैन, सदस्य अंजना चड्डा व विपिन कुमार ने बीमा कंपनी को उपभोक्ता सेवा में कमी व लापरवाही पाते हुए उपरोक्त आदेश सुनाया।
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सहदेव सिंह पुत्र लक्ष्मी चंद्र निवासी ग्राम अलीपुर बहादराबाद ने पीएनबी मेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड कार्यालय बैंगलोर कर्नाटक व मुंबई कार्यालय और स्थानीय शाखा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। बताया कि उनका बैंक खाता स्थानीय शाखा में चला आ रहा है। स्थानीय एरिया मैनेजर ने उनसे संपर्क कर बीमा पॉलिसी के बारे में बताया था। इस पर उन्होंने एक पॉलिसी मेट लाइफ गारंटेड इनकम प्लान लेते हुए प्रथम किश्त, अन्य चार्ज समेत 67,669 रुपये जमा कराए थे। बताया था कि पांच वर्षों तक 65,669 पैसे जमा कराने के बाद बीमा कंपनी प्रत्येक वर्ष 44 हजार रुपये देगी। यही नहीं, दस साल के बाद पांच लाख रुपये देगी। इसमें चार लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर भी होगा, लेकिन जब शिकायतकर्ता द्वितीय किश्त जमा करने के लिए गया था तब पता चला कि दस वर्ष के बाद केवल एक लाख 20 हजार रुपये ही दिए जाएंगे। जब शिकायतकर्ता के इस संबंध में आलाधिकारियों से बात की तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद फोरम की शरण ली थी। शिकायत की सुनवाई करते हुए फोरम के अध्यक्ष कंवर सैन, सदस्य अंजना चड्डा व विपिन कुमार ने बीमा कंपनी को उपभोक्ता सेवा में कमी व लापरवाही पाते हुए उपरोक्त आदेश सुनाया।
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