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इस बार नहीं रखे गए फायर वाचर
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एक तरफ तो सरकार की ओर से जंगलों केे बचाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ आग से बचाने के लिए अस्थाई तौर पर राजाजी टाइगर रिजर्व में रखे जाने वाले फायर वाचरों के लिए बजट तक जारी नहीं किया गया है।
राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज का सीमावर्ती जंगल का हिस्सा शहर की आबादी से लगा हुआ है। जिसके कारण मनसा देवी मंदिर समेत विभिन्न क्षेत्रों के जंगलों में आग की घटनाएं हो रही हैं। इसको देखते हुए फायर सीजन के चार महीने में रेंज क्षेत्र में आठ से दस हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर करीब 25 फायर वाचर रखे जाते थे। इन फायर वाचरों के जरिए जंगल के संवेदनशील इलाकों पर हर समय नजर रखी जाती है। आग लगने पर फायर वाचर बुझा देते थे। पर इस साल शासन की ओर से फायर वाचरों की अस्थायी तैनाती के लिए बजट ही जारी नहीं किया गया है। जिससे रेंज क्षेत्र में एक भी फायर वाचर नहीं रखा गया है। जिससे फायर सीजन में मैन पावर की समस्या बनी हुई है। ऐसी स्थिति में स्थायी कर्मचारियों से ही आग को बुझाने के लिए लगाया गया है। जबकि उनकी जिम्मेदारी वनों की सुरक्षा से लेकर जंगली जानवरों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने की भी है। इससे आग की घटना को काबू करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में बुधवार को मनसा देवी मंदिर के पहाड़ी के जंगल में आग लगने लगभग ढाई हेक्टेयर जंगल जल गया गया था। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग शांत किया जा सका था। पर शुक्रवार की शाम को फिर से उसी क्षेत्र में आग लग गई है। इससे शुक्रवार रात दस बजे तक वन कर्मचारी आग को बुझाने के लिए लगे रहे।
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इस साल फायर वाचरों को अस्थायी तौर पर रखने के लिए बजट नहीं मिला है। इसके कारण फायर सीजन में मैन पावर की समस्या बनी हुई है। फिर भी आग लेकर कर्मचारी सतर्क हैं।
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- विजय सैनी, रेंजर, हरिद्वार
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राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज का सीमावर्ती जंगल का हिस्सा शहर की आबादी से लगा हुआ है। जिसके कारण मनसा देवी मंदिर समेत विभिन्न क्षेत्रों के जंगलों में आग की घटनाएं हो रही हैं। इसको देखते हुए फायर सीजन के चार महीने में रेंज क्षेत्र में आठ से दस हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर करीब 25 फायर वाचर रखे जाते थे। इन फायर वाचरों के जरिए जंगल के संवेदनशील इलाकों पर हर समय नजर रखी जाती है। आग लगने पर फायर वाचर बुझा देते थे। पर इस साल शासन की ओर से फायर वाचरों की अस्थायी तैनाती के लिए बजट ही जारी नहीं किया गया है। जिससे रेंज क्षेत्र में एक भी फायर वाचर नहीं रखा गया है। जिससे फायर सीजन में मैन पावर की समस्या बनी हुई है। ऐसी स्थिति में स्थायी कर्मचारियों से ही आग को बुझाने के लिए लगाया गया है। जबकि उनकी जिम्मेदारी वनों की सुरक्षा से लेकर जंगली जानवरों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने की भी है। इससे आग की घटना को काबू करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में बुधवार को मनसा देवी मंदिर के पहाड़ी के जंगल में आग लगने लगभग ढाई हेक्टेयर जंगल जल गया गया था। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग शांत किया जा सका था। पर शुक्रवार की शाम को फिर से उसी क्षेत्र में आग लग गई है। इससे शुक्रवार रात दस बजे तक वन कर्मचारी आग को बुझाने के लिए लगे रहे।
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इस साल फायर वाचरों को अस्थायी तौर पर रखने के लिए बजट नहीं मिला है। इसके कारण फायर सीजन में मैन पावर की समस्या बनी हुई है। फिर भी आग लेकर कर्मचारी सतर्क हैं।
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- विजय सैनी, रेंजर, हरिद्वार