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फक्कड़ को तलाशना भूसे के ढेर से सुई ढूंढना
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 05 May 2017 11:18 PM IST
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रेप के बाद मासूम की हत्या करने की निर्मम वारदात ने कुंभनगरी को हिलाकर रख डाला है। वारदात के बाद जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तब गंगा तट पर दूर तक बसी अवैध झुग्गी बस्ती को देखकर दंग रह गई। इन बस्तियों में असंख्य अंजान चेहरे रह रहे हैं। फक्कड़ साधु ने ही जघन्य अपराध को अंजाम दिया तब उसके गिरेबां तक पहुंचना भी भूसे के ढेर से सुई तलाशने सरीखा है।
गंगा तटों पर बसी ये बस्तियां शहर के राजनीतिक दलों का वोट बैंक है और नेताओं के संरक्षण के चलते ही सिस्टम भी अपनी जिम्मेदारी से आंख चुराता आया है। जब-जब इन्हें उजाड़ने की रणनीति बनती है तब-तब नेता अवरोध बनते हैं। गंगा तट पर बसी इन झुग्गियों में बसे ये चेहरे कौन है। कहां से आए है। ऐसे तमाम सवाल तैरना लाजिमी हैं।
एक बारगी मान लेते है कि पुलिस की जांच सही दिशा में कार्य कर रही है और उन तीन बच्चों ने फक्कड़ साधु को उस वक्त घटनास्थल पर देखा था, लेकिन उस साधु तक पहुंचना टेढ़ी खीर से कम नही है। क्योंकि, हर फक्कड़ साधु की शक्ल लगभग एक जैसी ही होती है और साधु को तलाशना चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि गंगा तट पर हर कदम पर फक्कड़ ही फक्कड़ नजर आते हैं।
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40 वर्ष का है फक्कड़
मासूम बालिका का संभावित कातिल करीब चालीस वर्ष का है। ये भी बताया जा रहा है कि वह नशेड़ी हो सकता है। पुलिस की पूछताछ में तीन मासूमों ने यही जानकारी बयां की है।
सांस बंद होने से हुई मौत
मासूम की मौत मुंह में ठूंसे गए पत्थर से सांस रुकने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। दरअसल, कातिल ने रेप करने से पहले मासूम के मुंह में पत्थर ठूंस दिया था ताकि वह चीख चिल्ला न सकें। ये बात पुलिस मानकर चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मासूम की मौत की वजह भी मुंह में पत्थर ठूंस देना ही है, जिससे उसकी सांस रुक गई थी और उसकी मौत हुई।
इकलौती थी बेटी
पेशे से रिक्शा चालक की बेटी इकलौती थी। महिला ने उससे दूसरी शादी की थी। महिला के पहले पति से छह बच्चें थे, जो सभी पश्चिम बंगाल में ही रहते हैं। महिला के दो बच्चें भी उसे छोड़कर जा चुके है।
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गंगा तटों पर बसी ये बस्तियां शहर के राजनीतिक दलों का वोट बैंक है और नेताओं के संरक्षण के चलते ही सिस्टम भी अपनी जिम्मेदारी से आंख चुराता आया है। जब-जब इन्हें उजाड़ने की रणनीति बनती है तब-तब नेता अवरोध बनते हैं। गंगा तट पर बसी इन झुग्गियों में बसे ये चेहरे कौन है। कहां से आए है। ऐसे तमाम सवाल तैरना लाजिमी हैं।
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एक बारगी मान लेते है कि पुलिस की जांच सही दिशा में कार्य कर रही है और उन तीन बच्चों ने फक्कड़ साधु को उस वक्त घटनास्थल पर देखा था, लेकिन उस साधु तक पहुंचना टेढ़ी खीर से कम नही है। क्योंकि, हर फक्कड़ साधु की शक्ल लगभग एक जैसी ही होती है और साधु को तलाशना चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि गंगा तट पर हर कदम पर फक्कड़ ही फक्कड़ नजर आते हैं।
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40 वर्ष का है फक्कड़
मासूम बालिका का संभावित कातिल करीब चालीस वर्ष का है। ये भी बताया जा रहा है कि वह नशेड़ी हो सकता है। पुलिस की पूछताछ में तीन मासूमों ने यही जानकारी बयां की है।
सांस बंद होने से हुई मौत
मासूम की मौत मुंह में ठूंसे गए पत्थर से सांस रुकने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। दरअसल, कातिल ने रेप करने से पहले मासूम के मुंह में पत्थर ठूंस दिया था ताकि वह चीख चिल्ला न सकें। ये बात पुलिस मानकर चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मासूम की मौत की वजह भी मुंह में पत्थर ठूंस देना ही है, जिससे उसकी सांस रुक गई थी और उसकी मौत हुई।
इकलौती थी बेटी
पेशे से रिक्शा चालक की बेटी इकलौती थी। महिला ने उससे दूसरी शादी की थी। महिला के पहले पति से छह बच्चें थे, जो सभी पश्चिम बंगाल में ही रहते हैं। महिला के दो बच्चें भी उसे छोड़कर जा चुके है।