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चप्पे-चप्पे पर चौकसी के यह कैसे दावे
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार
Updated Sun, 24 Jul 2016 11:48 PM IST
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हरिद्वार। कांवड़ पटरी पर बहे युवा कांवड़िए के लहू ने बहादराबाद पुलिस की कार्यशैली की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। बहादराबाद पुलिस संवेदनशील कांवड़ मेले में कितनी चौकस है यह अंदाजा अलसुबह पटरी पर हुई हत्या से लगाया जा सकता है। पड़ताल में अब तक पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली हैं।
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यह घटना रविवार सुबह पांच बजे के आसपास की है। जाहिर है कि तब उजाला हो जाता है। कांवड़ियों की वापसी भी सुबह बड़ी तेजी से होती है। लिहाजा, पुलिस की चौकसी होना लाजिमी है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। हत्या से पहले मृतक कांवड़िए की तू-तू मैं-मैं से लेकर हाथापाई तक हुई होगी। कुछ वक्त गुजरा ही होगा उसी के बाद ही उस पर धारदार हथियार से गोदा गया होगा। यदि पुलिस सचेत होती तो कांवड़िए की जान बच सकती थी। पटरी पर पुलिस चौकस क्यों नहीं है यह जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है। अधिकारी भी अब लीपापोती में जुट गए हैं। यदि कांवड़िए के साथ साथी कांवड़िए होते तो बवाल होना तय था। फिर कई पुलिसकर्मियों पर गाज भी गिरती लेकिन अब तस्वीर दूसरी है। मृतक कांवड़िए के साथ कोई था नहीं। ऐसे में पुलिस के लिए चिंता की बात नहीं रह गई है। यह तस्वीर उस कांवड़ पटरी की है जहां चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती का दम शासन से लेकर प्रशासन के अधिकारी तक भर रहे हैं। लेकिन स्थिति आप सब लोगों के सामने है।
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