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राष्ट्रीय स्तर पर ई-गवर्नेंस के दायरे में आएगी कृषि भूमि
अंकित कुमार गर्ग
Updated Fri, 06 Nov 2015 12:14 AM IST
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भारत सरकार के नेशनल लैंड रिकार्ड मार्डनाइजेशन प्लान (एनएलआरएम) की शुरूआत आईआईटी रुड़की की तकनीक के जरिए छत्तीसगढ़ प्रदेश से होगी। तकनीक लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश होगा। जिसमें प्रदेश के सभी गांवों की कृषि भूमि को राष्ट्रीय स्तर पर ई-गवर्नेंस के दायरे में लाया जाएगा।
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आईआईटी द्वारा दी जा रही तकनीक की खूबी यह होगी कि सभी किसानों की भूमि का एकीकृत नक्शा उसके विवरण के साथ इंटरनेट पर सरकारी उपयोग के लिए प्रदर्शित होगा। इसके लिए वैज्ञानिकों ने खुद का जीपीएस सिस्टम तैयार किया है। जिसके जरिए डाटा बेस और मैप को इंटीग्रेशन किए जाने का देश में अपनी तरह का पहला काम होगा।
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एनएलआरएम के तहत देश भर में छत्तीगढ़ प्रदेश ने सबसे पहले आनलाइन ई-गवर्नेंस के लिए अपने यहां के किसानों की भूमि विवरण सहित एकीकृत नक्शे को प्रोजेक्ट किए जाने की कवायद शुरू की है।
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जिसके बाद प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर भू-उपयोग और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए यह नक्शा ऑनलाइन प्राप्त हो सकेगा। इस कवायद को अंजाम देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने आईआईटी रुड़की के सिविल विभाग को जियो रेफरेंस्ड सर्वे टू मैप फिजिकल बाउंड्रीज ऑफ ईच लैंड होल्डिंग एट कैडस्ट्रल लेवल नामक प्रोजेक्ट दिया गया है।
वैज्ञानिक डा. कमल जैन ने बताया कि अभी तक किसी प्रदेश में यह काम नहीं हो पाया है। इसके लिए उन्होंने डिफरेंशियल जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) तैयार किया है। जिसके जरिए भूमि सर्वे के बाद डाटा बेस और मैप का इंटीग्रेशन किया जाएगा। ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में यह अपनी तरह का पहला काम होगा। जिसका उपयोग विभिन्न सरकारी कार्यालयों में और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए किया जा सकेगा।
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एक लाख 60 हजार हेक्टेयर भूमि का होगा सर्वे
वैज्ञानिक डा. कमल जैन ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत छत्तीसगढ़ की 1600 किलोमीटर के दायरे में एक लाख 60 हजार हेक्टेयर भूमि का सर्वे किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को तीन साल में पूरा करना है। जिसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। प्रोजेक्ट से पूर्व दिल्ली में प्रधान सचिव के समक्ष प्रस्तुतिकरण दिया गया था। जिसमें तकनीक की उपयोगिता को काफी सराहा गया था।
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ई-गर्वनेंस तकनीक को मिलेगा बल
वैज्ञानिक डा. कमल जैन ने बताया कि अभी तक ई-गवर्नेंस के तहत संबंधित किसान या खसरा खतौनी की आईडी के आधार पर अलग-अलग नक्शे का विवरण जारी करने की तकनीक उपलब्ध है। जिनका एक दूसरे के साथ कोई कनेक्शन नहीं था। लेकिन अब नई तकनीक से सभी नक्शे को एक साथ सेंट्रलाइज्ड (एकीकृत) किया जा सकेगा। इसके बाद इस तकनीक को विभिन्न प्रदेशों में लागू किया जा सकेगा।