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बाल्टिक देशों की संस्कृतियों को मजबूती मिलेगी: राज्यपाल
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:12 AM IST
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सेंटर का शुभारंभ
- फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में बाल्टिक कल्चर एंड स्टडीज सेंटर का शिलान्यास राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल ने किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि राज्यपाल ने कहा कि बाल्टिक संस्कृति में भी पृथ्वी व प्रकृति के साथ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।
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मृत्युंजय सभागार में दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद विवि के कुलगीत के बाद कार्यक्रम शुरू हुआ। राज्यपाल ने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय में इस सेंटर के स्थापित होने से हमारी और बाल्टिक देशों की संस्कृतियों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि बाल्टिक सेंटर के माध्यम से संयुक्त प्रकाशनों, सीखने के संसाधनों, अनुसंधानिक गतिविधियों एवं छात्रों के आदान-प्रदान को भी संयुक्त रूप से बढ़ावा मिलेगा।
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शांतिकुंज के प्रमुख एवं विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि विश्व को धनात्मक दिशा में ले जाने केलिए इस तरह के प्रयास न केवल करने की जरूरत है, बल्कि उसे शिखर तक पहुंचाने के लिए धरातलीय अभ्यास भी निरंतर करने होंगे। उन्होंने कहा कि संस्कृति, संस्कार और संवेदनाएं तीनों ही इस मंच पर तीन देशों का प्रतिनिधित्व करती हुई देवभूमि पर अवतरित हुई है। कुलपति शरद पारधी, प्रतिकुलपति डा. चिंमय पंड्या ने भी अपने विचार रखे।
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इस मौके पर लात्विया के राजदूत माननीय एवरिस ग्रोज ने कहा कि सेंटर के प्रारंभ होने से आपसी जुड़ाव होगा। एक दूसरे की संस्कृति को जानेंगे और कौशल का विकास होने में सहायक होगा। एस्टोनिया के राजदूत माननीय रिहो क्रुव ने कहा कि इस सेंटर के माध्यम भारत व एस्टोनिया के बीच के संबंध और प्रगाढ़ होंगे। लिथुएनिया के राजदूत लैमोचनास तलत केलप्सा ने कहा कि ऐसे करीब 400 शब्द मिले है जो भारत के साथ उनके देशों में भी प्रचलित है।
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नमस्ते कहने पर बजी तालियां
लिथूएनिया के भारत में एंबेसडर लैमोनस तलटत केलप्सा ने अपना भाषण देते हुए हिंदी में नमस्ते कहा तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने कहा कि आज के दिन का बड़ा महत्व है। उन्होंने तालियां बजाने पर धन्यवाद कहते हुए भागीदारी जारी रहेगी भी हिंदी में बोला।