गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की ओर से ‘आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि भावी पीढ़ी को संस्कारित करने का सबसे सर्वोत्तम अवसर जीवात्मा का अपनी मां के गर्भ में आने से प्रारंभ हो जाना चाहिए। यही से जीवात्मा को सुसंस्कार देना चाहिए। इससे आने वाली जीवात्मा निश्चित रूप से मां के गर्भ में मिले संस्कार के अनुसार आगे बढ़ता है।
आओ गढ़े संस्कार पीढ़ी कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. गायत्री शर्मा ने कहा कि इस वेबिनार के माध्यम से भावी माताओं को उनके बच्चों की परवरिश के बारे जागरूक करना है। भावी माता एवं उनके परिवार वाले मनचाहे प्रवृत्ति वाले संतान की प्राप्ति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमारे ऋषियों के बताए गए सूत्रों को वैज्ञानिकता के साथ जानने, समझने की आवश्यकता है। वर्तमान परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए सरलतम पद्धतियों हम अपने बालक को उसके व्यक्तित्व में चिंतन, चरित्र एवं व्यवहार में उत्कृष्टता, शालीनता जैसे अनेक दैवीय गुणों से युक्त तैयार सकते हैं। उन्होंने बताया कि नौ दिन चलने वाले इस वेबिनार में देश-विदेश के कई स्त्रीरोग विशेषज्ञ और वैज्ञानिकों के अलावा बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के स्वयं सेवक शामिल हो रहे हैं।