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निगम कर्मियों को मिलेग रुका हुआ वेतन
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार।
Updated Tue, 02 May 2017 10:44 PM IST
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नगर निगम के नियमित कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। उन्हें जनवरी से अप्रैल तक का रुका हुआ वेतन अगले दो दिन में मिल जाएगा। इसके लिए लेखा विभाग के कर्मचारी चेक बनाने में जुटे हैं। निगम के करीब 650 नियमित कर्मचारियों को 6 करोड़ 70 लाख रुपये का भुगतान होगा। इसमें दिसंबर का बकाया देय फंड और सोसायटी के ऋण की किश्त भी शामिल है। ऐसे में नियमित कर्मचारी को औसतन एक लाख रुपये से अधिक की राशि मिलेगी।
कर्मचारियों को यह भुगतान सातवें वेतनमान लागू करने के लिए चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से प्राप्त रिवाइज वेतन अनुदान के 7 करोड़ 39 लाख रुपये में से किया जा रहा है। जिसका मतलब हुआ कि निगम कर्मचारियों को शासनादेश तथा नगर निगम बोर्ड की स्वीकृति के बाद भी सातवें वेतनमान के लिए अभी इंतजार करना होगा। इससे कर्मचारियों को एक बड़ा हिस्सा खासा नाराज है। उनकी मांग है कि चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से बढ़ी हुई ग्रांट मिलने के बाद सातवें वेतनमान के हिसाब से भुगतान किया जाए और इस ग्रांट से पेंशन का भुगतान करने की नियम विरुद्ध परंपरा पर विराम लगाया जाए। इस संबंध में कुछ कर्मचारी संगठनों ने नगर आयुक्त को ज्ञापन भी दिया।
पेंशन और संविदा कर्मियों का भी होगा भुगतान
नगर निगम का लेखा विभाग एक महीने की पेंशन और संविदा कर्मियों के एक महीने के वेतन भुगतान के चेेेक भी बना रहा है। योजना यह है कि चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से प्राप्त ग्रांट में बचे लगभग 70 लाख रुपये भुगतान कर दिया जाए, किंतु कुछ कर्मचारी संगठनों के विरोधी स्वर से अधिकारी सहमे हुए हैं। नियमानुसार नगर निगम अधिकारी वेतन ग्रांट को अन्य मद में खर्च नहीं कर सकते हैं।
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सबको कुछ न कुछ मिलेगा
नगर निगम के अपने सभी नियमित, सेवानिवृत्त और संविदा कर्मचारियों को कुछ न कुछ मिलेगा। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को इसका आश्वासन दिया गया है। सातवां वेतनमान लागू करने से पहले शासन से अनुमोदन प्राप्त किया जाना बाकी है। शासनादेश में ही इसका प्रावधान है कि बोर्ड से प्रस्ताव पास कराकर शासन से अनुुमोदन के बाद ही सातवां वेतनमान लागू किया जा सकता है। शासनादेश में यह प्रावधान है कि स्वीकृत ग्रांट से अधिक व्ययभार को नगर निगम को स्वयं उठाना होगा। जिसके लिए आय बढ़ाने की कई योजनाएं नगर निगम के पाइप लाइन में हैं।- अशोक पांडेय, नगर आयुक्त।
कर्मचारियों को यह भुगतान सातवें वेतनमान लागू करने के लिए चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से प्राप्त रिवाइज वेतन अनुदान के 7 करोड़ 39 लाख रुपये में से किया जा रहा है। जिसका मतलब हुआ कि निगम कर्मचारियों को शासनादेश तथा नगर निगम बोर्ड की स्वीकृति के बाद भी सातवें वेतनमान के लिए अभी इंतजार करना होगा। इससे कर्मचारियों को एक बड़ा हिस्सा खासा नाराज है। उनकी मांग है कि चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से बढ़ी हुई ग्रांट मिलने के बाद सातवें वेतनमान के हिसाब से भुगतान किया जाए और इस ग्रांट से पेंशन का भुगतान करने की नियम विरुद्ध परंपरा पर विराम लगाया जाए। इस संबंध में कुछ कर्मचारी संगठनों ने नगर आयुक्त को ज्ञापन भी दिया।
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पेंशन और संविदा कर्मियों का भी होगा भुगतान
नगर निगम का लेखा विभाग एक महीने की पेंशन और संविदा कर्मियों के एक महीने के वेतन भुगतान के चेेेक भी बना रहा है। योजना यह है कि चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से प्राप्त ग्रांट में बचे लगभग 70 लाख रुपये भुगतान कर दिया जाए, किंतु कुछ कर्मचारी संगठनों के विरोधी स्वर से अधिकारी सहमे हुए हैं। नियमानुसार नगर निगम अधिकारी वेतन ग्रांट को अन्य मद में खर्च नहीं कर सकते हैं।
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सबको कुछ न कुछ मिलेगा
नगर निगम के अपने सभी नियमित, सेवानिवृत्त और संविदा कर्मचारियों को कुछ न कुछ मिलेगा। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को इसका आश्वासन दिया गया है। सातवां वेतनमान लागू करने से पहले शासन से अनुमोदन प्राप्त किया जाना बाकी है। शासनादेश में ही इसका प्रावधान है कि बोर्ड से प्रस्ताव पास कराकर शासन से अनुुमोदन के बाद ही सातवां वेतनमान लागू किया जा सकता है। शासनादेश में यह प्रावधान है कि स्वीकृत ग्रांट से अधिक व्ययभार को नगर निगम को स्वयं उठाना होगा। जिसके लिए आय बढ़ाने की कई योजनाएं नगर निगम के पाइप लाइन में हैं।- अशोक पांडेय, नगर आयुक्त।