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उत्तराखंड के पहले कंपोस्ट प्लांट को हरी झंडी
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 10 Feb 2016 12:38 AM IST
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रतनमणी डोभाल
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हरिद्वार। जिले के गांव सराय में लगने वाले उत्तराखंड के पहले कंपोस्ट प्लांट का रास्ता साफ हो गया है। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्लांट लगाने के लिए केआरएल कंपनी को पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया है। 16 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत की इस परियोजना में कंपोस्ट प्लांट लगाने में लगभग 4-5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और यह लगभग तीन महीने में तैयार हो जाएगा।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मार्च 2015 में ही गांव सराय में नगर निगम हरिद्वार की जमीन पर प्लांट लगाने की अनुमति प्रदान कर दी थी। राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) ने सराय में कूड़ा डालने के विरोध संबंधी याचिका को खारिज कर नगर निगम को कंपोस्ट प्लांट लगाने की हरी झंडी प्रदान कर दी थी। इसके बाद उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी आज (मंगलवार) को इसके लिए एनओसी दे दी है। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद नगर निगम ने 13 जनवरी से सराय में कूड़ा डंप करना प्रारंभ कर दिया था। गौरतलब है कि जेएनएनयूआरएम की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना के तहत 2009 से कंपोस्ट प्लांट स्थापित करने की कवायद चल रही थी अब सात साल बाद जाकर इसका रास्ता साफ हो पाया है।
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मंगलवार को कंपोस्ट प्लांट लगाने की पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त हो गई है। प्लांट की बाउंड्रीवाल हो चुकी है और मशीनों को फीट करने के लिए फाउंडेशन का काम भी शीघ्र शुरू किया जाएगा। शहर के चार और वार्डों में घर-घर से कूड़ा एकत्रीकरण का कार्य भी शुरू किया जाएगा। धीरे-धीरे तीन महीने के अंदर नगर निगम के सभी 30 वार्डों को केएलआर अपने हैंडओवर ले लेगा। इसके साथ ही कूड़ा का जैविक व अजैविक में पृथकीकरण काम भी कंपनी करा रही है। उन्होंने दावा किया उत्तराखंड में पहला कंपोस्ट प्लांट हरिद्वार में तीन महीने में काम करना प्रारंभ कर देगा।
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- मनोज शर्मा, सुपरवाइजर केएलआर कंपनी
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नगर निगम की ओर से लगाए जाने वाले कंपोस्ट और मिथेनिष्ट प्लांट के लिए सोमवार को अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है। इस प्लांट के बनने से जहां जैविक और अजैविक कूड़े को पर्याप्त निस्तारण किया जाएगा। वहीं लैंड फिल साइट विकसित हो सकेगी। कूड़े के निस्तारण से मिथेन गैस बनाई जा सकती है जो रसोई गैस के रूप में प्रयोग होगी और अजैविक कूड़े से खाद भी बनाई जाएगी।
- विनोद सिंघल, सदस्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तराखंड