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38 किलो मारक झमता वाली गन माउंट बनाएगा बीएचईएल
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‘मेक इन इंडिया’ मिशन के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बीएचईएल ने डिफेंस एवं एयरोस्पेस बिजनेस ग्रुप (डीएबीजी) को ओर से विस्तारण परियोजना फेज-1 का शिलान्यास किया। कंपनी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. नलिन सिंघल ने बीएचईएल हरिद्वार के कार्यपालक निदेशक प्रवीण चंद्र झा की महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया। इस परियोजना में भारतीय नौ सेना के लिए सुपर रैपिड गन माउंट (एसआरजीएम) बनाए जाएंगे। माउंट की शूटिंग रेंज 38 किलोमीटर की होगी।
डा. नलिन सिंघल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर रक्षा क्षेत्र का बाजार तेजी से बदल रहा है। बदलते व्यापारिक परिवेश का लाभ उठाने के लिए अपनी तकनीक को उन्नत करना होगा। आज किसी भी देश के लिए अपनी अखंडता एवं संप्रभुता को बनाए रखने, उसके रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। कार्यपालक निदेशक प्रवीण चंद्र झा ने कहा कि विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग उपक्रम होने के नाते बीएचईएल को डिफेंस सेक्टर में भी अपनी क्षमता, दक्षता तथा उत्कृष्टता को बरकरार रखना होगा।
40 करोड़ रुपये की लागत वाली डीएबीजी विस्तारण परियोजना के अंतर्गत भारतीय नौ सेना के लिए प्रति वर्ष तीन उन्नत सुपर रैपिड गन माउंट (एसआरजीएम) का निर्माण किया जाएगा। इस उन्नत एसआरजीएम में मल्टीपल फीडिंग सिस्टम लगा है। जिससे कन्वेंशनल वेपन के साथ ही डार्ट (गाइडेड) वेपन एवं वुलकानो वेपन भी चलाया जा सकते हैं। इसकी शूटिंग रेंज भी 16 किलोमीटर से बढ़कर 38 किलोमीटर हो गई है। यह एसआरजीएम विमानरोधी, जहाजरोधी होने के साथ-साथ तटीय इलाकों पर भी हमला करने में सक्षम है। बीएचईएल को अब तक 2 उन्नत एसआरजीएम का आर्डर प्राप्त हो चुका है। भविष्य में 53 एसआरजीएम के और आर्डर मिलने की संभावना है।
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डा. नलिन सिंघल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर रक्षा क्षेत्र का बाजार तेजी से बदल रहा है। बदलते व्यापारिक परिवेश का लाभ उठाने के लिए अपनी तकनीक को उन्नत करना होगा। आज किसी भी देश के लिए अपनी अखंडता एवं संप्रभुता को बनाए रखने, उसके रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। कार्यपालक निदेशक प्रवीण चंद्र झा ने कहा कि विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग उपक्रम होने के नाते बीएचईएल को डिफेंस सेक्टर में भी अपनी क्षमता, दक्षता तथा उत्कृष्टता को बरकरार रखना होगा।
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40 करोड़ रुपये की लागत वाली डीएबीजी विस्तारण परियोजना के अंतर्गत भारतीय नौ सेना के लिए प्रति वर्ष तीन उन्नत सुपर रैपिड गन माउंट (एसआरजीएम) का निर्माण किया जाएगा। इस उन्नत एसआरजीएम में मल्टीपल फीडिंग सिस्टम लगा है। जिससे कन्वेंशनल वेपन के साथ ही डार्ट (गाइडेड) वेपन एवं वुलकानो वेपन भी चलाया जा सकते हैं। इसकी शूटिंग रेंज भी 16 किलोमीटर से बढ़कर 38 किलोमीटर हो गई है। यह एसआरजीएम विमानरोधी, जहाजरोधी होने के साथ-साथ तटीय इलाकों पर भी हमला करने में सक्षम है। बीएचईएल को अब तक 2 उन्नत एसआरजीएम का आर्डर प्राप्त हो चुका है। भविष्य में 53 एसआरजीएम के और आर्डर मिलने की संभावना है।
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