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असंतुलित विकास से बिगड़ रहा पहाड़ी राज्यों का संतुलन: बछेंद्री
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लोक माता देवी अहिल्याबाई होल्कर महाशक्तिपीठ ट्रस्ट की और से आयोजित कार्यक्रम में देश की पहली एव?
- फोटो : HARIDWAR
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धर्मनगरी पहुंची एवरेस्ट महिला विजेता बछेंद्री पाल ने हिमालय पर्वत श्रृंखला के पहाड़ों को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि असंतुलित विकास के कारण आज उत्तराखंड ही नही बल्कि देश के अन्य पहाड़ी राज्यों में पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमालय को बचाने के लिए सरकार के साथ-साथ आम जनसहयोग भी बहुत जरूरी है।
लोक माता देवी अहिल्याबाई होल्कर महाशक्तिपीठ ट्रस्ट के कार्यक्रमों के अंतर्गत गठित हरित धरा पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन कार्यक्रम के तहत अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त माउंट एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल का पाल मैंसन जमुना पैलस में अभिनंदन किया गया। संस्था के अध्यक्ष विजय सिंह पाल ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय बहुल क्षेत्रों के मद्देनजर प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए यह महसूस किया जा रहा है। यहां से निकलने वाली नदियां भारत की जीवन रेखा का कार्य करती हैं। इसलिए गंभीरतपूर्वक इन प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बछेंद्री पाल न सिर्फ भारत के बल्कि समस्त हिमालयी राज्यों की वस्तु स्थिति से परिचित हैं। इसलिए उन्हें संस्था की ओर से हिमालयी राजदूत की उपाधि दी गई। इसके साथ ही उन्हें उन्हें विश्व संसद में मनोनीत करके भेजा जाएगा। जिससे वह पृथ्वी की वास्तविक धरोहरों को बचाने के रचनात्मक कार्य की रूपरेखा तैयार कर सकें।
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इस दौरान बछेंद्री पाल को संस्था की छात्राओं द्वारा तैयार कुमाऊंनी गुड़िया भी भेंट की। इस दौरान संस्था की उत्तराखंड अध्यक्ष उमा सिसोदिया, सरफराज मलिक, सोनम पाल, आरजू गुलाटी, महक शर्मा, मीनाक्षी सिंह, मुस्कान सुखीजा, किरण, अंकिता रानी, सुशांत पाल, गणेश पाल, पूरन सिंह पाल मौजूद रहे। डायमंड डिजाइनर विपुल पाल के द्वारा अपने हाथ से तैयार किये देवी अहिल्याबाई के तेल चित्र को भेंट किया। जिसे महाशक्तिपीठ भूपतवाला में सुश्री बछेंद्री पाल द्वारा स्थापित किया गया।
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लोक माता देवी अहिल्याबाई होल्कर महाशक्तिपीठ ट्रस्ट के कार्यक्रमों के अंतर्गत गठित हरित धरा पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन कार्यक्रम के तहत अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त माउंट एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल का पाल मैंसन जमुना पैलस में अभिनंदन किया गया। संस्था के अध्यक्ष विजय सिंह पाल ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय बहुल क्षेत्रों के मद्देनजर प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए यह महसूस किया जा रहा है। यहां से निकलने वाली नदियां भारत की जीवन रेखा का कार्य करती हैं। इसलिए गंभीरतपूर्वक इन प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि बछेंद्री पाल न सिर्फ भारत के बल्कि समस्त हिमालयी राज्यों की वस्तु स्थिति से परिचित हैं। इसलिए उन्हें संस्था की ओर से हिमालयी राजदूत की उपाधि दी गई। इसके साथ ही उन्हें उन्हें विश्व संसद में मनोनीत करके भेजा जाएगा। जिससे वह पृथ्वी की वास्तविक धरोहरों को बचाने के रचनात्मक कार्य की रूपरेखा तैयार कर सकें।
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इस दौरान बछेंद्री पाल को संस्था की छात्राओं द्वारा तैयार कुमाऊंनी गुड़िया भी भेंट की। इस दौरान संस्था की उत्तराखंड अध्यक्ष उमा सिसोदिया, सरफराज मलिक, सोनम पाल, आरजू गुलाटी, महक शर्मा, मीनाक्षी सिंह, मुस्कान सुखीजा, किरण, अंकिता रानी, सुशांत पाल, गणेश पाल, पूरन सिंह पाल मौजूद रहे। डायमंड डिजाइनर विपुल पाल के द्वारा अपने हाथ से तैयार किये देवी अहिल्याबाई के तेल चित्र को भेंट किया। जिसे महाशक्तिपीठ भूपतवाला में सुश्री बछेंद्री पाल द्वारा स्थापित किया गया।