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अर्द्धकुंभ में भगवा रंग भरने की बेताबी
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sun, 03 Jan 2016 12:13 AM IST
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हरिद्वार। अर्द्धकुंभ पर किसी एक स्नान की परंपरा को लेकर संतों में भारी असमंजस है। कई महत्वपूर्ण संत चाहते हैं कि एक स्नान हो जाए ताकि कुंभ की भांति अर्द्धकुंभ में भी भगवा का रंग भरा जा सके। अखाड़ा परिषद के दो खेमों में बंटे होने के कारण कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है। जब तक अखाड़ा परिषद अगवाई नहीं करेगी तब तक स्नान की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
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साधु संत इस समय अपनी-अपनी ढपली बजा रहे हैं। आश्चर्यजनक कदम बैरागियों के निर्मोही अणी अखाड़े ने उठाते हुए बैरागी द्वीप स्थित अपने हनुमान मंदिर में कुंभ की भांति धर्मध्वजा फहरा दी है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हरिद्वार में बैरागियों के आश्रम तो हैं लेकिन अखाड़े नहीं। पिछले कुंभ पर बैरागियों के तीनों अखाड़ों ने तीन मंदिर बैरागी द्वीप पर बना लिए थे। तब से बैरागी उन्हीं स्थलों पर जमे हैं और मंदिरों को अखाड़ों का रूप दे रहे हैं। बैरागियों के तीनों अखाड़े चाहते हैं कि कोई एक स्नान हो जाए। लेकिन इसके लिए महंत ज्ञानदास हरी झंडी देने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं।
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एक स्नान की नई परंपरा शुरू करने का बिगुल जूना अखाड़े के संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरी ने बजाया था। उज्जैन कुंभ में व्यस्त होने के कारण वह लगातार उज्जैन में बने हुए हैं और सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई हैं। संतों की उहापोह का लाभ उठाते हुए मोहन सिंह रावत गांववासी ने उत्तराखंड के देवताओं की डोलियों के शाही स्नान की रूप रेखा तैयार कर डाली है। अब देखना है कि दो खेमों में बंटे अखाड़े एक मंच पर आ पाते हैं अथवा नहीं। न आ पाए तो हरिद्वार अर्द्धकुंभ पर कोई एक शाही स्नान करने का विचार मात्र विचार बनकर रह जाएगा।
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