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Haridwar News: ट्रस्ट बनाने का झांसा देकर आश्रम संपत्ति हड़पने का आरोप
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हरिद्वार। नगर कोतवाली क्षेत्र के खड़खड़ी में एक वृद्ध संत की करोड़ों रुपये की आश्रम संपत्ति हड़पने का मामला सामने आया है। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर तीन आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, रामगढ़ नई बस्ती खड़खड़ी निवासी 80 वर्षीय स्वामी हरिहरानंद ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह पिछले करीब 50 वर्षों से अपनी शिष्या कमलेश भारती के साथ आश्रम में रह रहे हैं। वृद्धावस्था को देखते हुए वह आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा के लिए ट्रस्ट बनवाना चाहते थे। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले देवकी नंदन ने सरकारी कार्यालयों में अच्छी पहचान होने का भरोसा देकर ट्रस्ट बनाने में मदद का आश्वासन दिया।
आरोप है कि 31 अगस्त 2022 को देवकी नंदन उन्हें और उनकी शिष्या को सब रजिस्ट्रार कार्यालय ले गया। वहां ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेज तैयार कराने के नाम पर धोखाधड़ी करते हुए आश्रम की संपत्ति का बैनामा अपने दामाद नीरज यादव निवासी रुड़की के नाम करा दिया गया। इसकी जानकारी संत को अप्रैल 2024 में नगर निगम में गृहकर जमा कराने के दौरान हुई। स्वामी हरिहरानंद का आरोप है कि विरोध करने पर आरोपितों ने पहले गलती मानते हुए बैनामा निरस्त कराने का भरोसा दिया, लेकिन बाद में पांच अगस्त 2024 को दोबारा सब रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाकर संपत्ति का ततीमा भी नीरज यादव के नाम करा दिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर देवकी नंदन, उसकी पत्नी चेतना और नीरज यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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पुलिस के अनुसार, रामगढ़ नई बस्ती खड़खड़ी निवासी 80 वर्षीय स्वामी हरिहरानंद ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह पिछले करीब 50 वर्षों से अपनी शिष्या कमलेश भारती के साथ आश्रम में रह रहे हैं। वृद्धावस्था को देखते हुए वह आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा के लिए ट्रस्ट बनवाना चाहते थे। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले देवकी नंदन ने सरकारी कार्यालयों में अच्छी पहचान होने का भरोसा देकर ट्रस्ट बनाने में मदद का आश्वासन दिया।
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आरोप है कि 31 अगस्त 2022 को देवकी नंदन उन्हें और उनकी शिष्या को सब रजिस्ट्रार कार्यालय ले गया। वहां ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेज तैयार कराने के नाम पर धोखाधड़ी करते हुए आश्रम की संपत्ति का बैनामा अपने दामाद नीरज यादव निवासी रुड़की के नाम करा दिया गया। इसकी जानकारी संत को अप्रैल 2024 में नगर निगम में गृहकर जमा कराने के दौरान हुई। स्वामी हरिहरानंद का आरोप है कि विरोध करने पर आरोपितों ने पहले गलती मानते हुए बैनामा निरस्त कराने का भरोसा दिया, लेकिन बाद में पांच अगस्त 2024 को दोबारा सब रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाकर संपत्ति का ततीमा भी नीरज यादव के नाम करा दिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर देवकी नंदन, उसकी पत्नी चेतना और नीरज यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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