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तीनों अस्पतालों में रोज होंगे अल्ट्रासाउंड
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 02 Mar 2016 12:13 AM IST
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हरिद्वार। अल्ट्रासाउंड करने के लिए अब मरीजों और इनके तीमारदारों को भटकना नहीं पड़ेगा। मेला अस्पताल को स्थायी रेडियोलॉजिस्ट मिल गया है। करीब सवा साल बाद इनकी नियुक्ति से प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड के लिए रेफर किए जाने वाले 40-45 मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। ज्वालापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी सभी कार्यदिवसों पर अल्ट्रासाउंड हो सकेंगे। इससे जिला अस्पताल की व्यवस्था में सुधार आएगा। तीन अस्पतालों में प्रतिदिन सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस रहे रेडियोलॉजिस्ट डा. राजेश गुप्ता का नवंबर-2014 में गोपेश्वर के लिए स्थानांतरण हो गया था। उस समय वह एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट थे। वह ही तीनों अस्पतालों के मरीजों के अल्ट्रासाउंड किया करते थे। उनके स्थानांतरण के बाद अल्ट्रासाउंड होने भी बंद हो गए। इनके बाद मेला अस्पताल में सीएमओ कार्यालय में नियुक्त एसीएमओ एवं रेडियोलॉजिस्ट डा. मनीष दत्त को नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें तीन दिन ज्वालापुर सीएचसी में अल्ट्रासाउंड करने के निर्देश जारी किए गए। उसी दौरान जिला अस्पताल में देहरादून से वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डा. मनोज उप्रेती को नियुक्त कर दिया गया। इससे जिला अस्पताल में लगातार और मेला अस्पताल में तीन दिन अल्ट्रासाउंड होने शुरू हो गए। स्थानांतरण के बाद डा. राजेश गुप्ता ने गोपेश्वर में ज्वाइन नहीं किया और इन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया। लेकिन वीआरएस स्वीकार नहीं किया गया। सवा साल कार्य से विरक्त रहने के बाद शासन ने उन्हें मेला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट बतौर नियुक्त किया। 27 फरवरी से उन्होंने कार्य शुरू कर दिया है। इससे जिला और मेला अस्पताल को एक स्थायी रेडियोलॉजिस्ट मिल गया है। डा. मनीष दत्त भी अब सीएचसी ज्वालापुर में लगातार अपनी सेवा दे सकेंगे। मेला अस्पताल के अधीक्षक डा. एचके सिंह ने बताया कि डा. राजेश गुप्ता ने अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी है।
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महिला अस्पताल में पद ही नहीं
महिला अस्पताल में सबसे अधिक जरूरत अल्ट्रासाउंड केंद्र की है। लेकिन महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद ही नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को जिला एवं मेला अस्पताल में भटकना पड़ता है। कई बार वहां इमरजेंसी, वीआईपी, नाइट आदि ड्यूटी करने के चलते रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं मिलते। अल्ट्रासाउंड न होने के चलते प्रसव को पहुंची महिला को रेफर करना पड़ जाता है। महिला अस्पताल की सीएमएस डा. भवानी पाल का कहना है कि कई बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। सभी अधिकारी और जन प्रतिनिधि केवल आश्वासन देते हैं। काम करवाने को कोई आगे नहीं आता।
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