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पर्यटकों के लिए जनवरी में खोल दिया जाएगा आस्था पथ
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चंडी घाट पुल के पास बनता आस्था पथ का निर्माण कार्य।
- फोटो : HARIDWAR
कुंभ की दिव्यता और भव्यता को चार चांद लगाने और पर्यटकों को शांत वातावरण उपलब्ध कराने के लिए गंगा किनारे तैयार किए जा रहे आस्था पथ को जनवरी के अंत में पर्यटकों के हवाले कर दिया जाएगा। इससे पर्यटकों को गंगा संग सेल्फी लेने का मौका मिलेगा। साथ ही पर्यटकों को शांत वातावरण में मॉर्निंग वॉक, योग और ध्यान करने का लाभ भी मिल सकेगा। धर्मनगरी में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आस्था पथ मील का पत्थर साबित हो सकता है।
रिवर फ्रंट डवलपमेंट योजना के तहत गंगा किनारे पड़ी जमीन पर कुंभ मेला बजट से आस्था पथ का निर्माण किया जा रहा है। पंतद्वीप पार्किंग से लेकर चंडीघाट पुल तक करीब एक किलोमीटर का यह आस्था पथ बनाया जा रहा है। आस्था पथ पर शहर के साथ ही दूर-दराज से आने वाले पर्यटक गंगा के किनारे मॉर्निंग वॉक कर सकेंगे। खास बात यह है कि आस्था पथ में बीच-बीच में पर्यटकों के लिए कुछ ऐसे प्वाइंट बनाए गए हैं। इनमें जल दर्शन, सूर्य दर्शन, दिग दर्शन, रमिया दर्शन प्वाइंट हैं। इनमें से दिग दर्शन से चारों तरफ धर्मनगरी को देख सकेंगे। यहां से श्रद्धालु मां मनसा देवी मंदिर व चंडीदेवी मंदिर के दर्शन दूर से ही कर सकेंगे। रमिया दर्शन से लोग गंगा नदी के साथ सेल्फी ले सकेंगे। यहीं पर लीला दर्शन मंच भी बनाया गया है। यह ओपन एयर थिएटर है। इस कला मंच पर छोटे कार्यक्रम किए जा सकेंगे। कुंभ मेले में इस मंच पर धार्मिक कार्यक्रम किए जाने की योजना है। इसके साथ ही 15 हजार वर्ग मीटर पार्क भी बनाया जा रहा है। सिंचाई विभाग उत्तराखंड के सहायक अभियंता सुमित मालवाल ने बताया कि आस्था पथ का 91 फीसदी कार्य हो पूरा चुका है। उम्मीद है कि जनवरी के अंत में आस्था पथ को पर्यटकों के हवाले कर दिया जाएगा। संवाद
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2016 में प्लान, अब चढ़ी योजना परवान
सिंचाई विभाग के अनुसार, इस योजना पर वर्ष 2016 में काम शुरू हो गया था, लेकिन तब से लेकर अब तक शासन की ओर से बजट जारी नहीं किया गया था, लेकिन कुंभ आने पर सरकार की ओर से 20 करोड़ 70 लाख रुपये का बजट जारी किया गया। बजट जारी होने पर अब योजना को परवान चढ़ाया जा रहा है। कुंभ मेले में आस्था पथ अपनी एक अलग पहचान बनाएगा।
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पहले था अतिक्रमण, अब बदल रहा नजारा
जहां यह आस्था पथ बनाया जा रहा है, यहां पहले अतिक्रमण हुआ रहता था। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण को हटवाया भी जाता था, लेकिन फिर से अतिक्रमणकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लेते थे, पर अब आस्था पथ बनाने से जहां अतिक्रमण से मुक्ति मिल गई है। वहीं, इस क्षेत्र का नजारा भी बदल गया है।
आस्था पथ पर श्रद्धालुओं को शांत वातावरण मिलेगा। पर्यटक यहां आकर योग, ध्यान कर सकेंगे। गंगा किनारे बन रहे आस्था पथ पर आने से पर्यटकों को विशेष प्रकार की अनुभूति महसूस हो सकेगी। इससे आस्था पथ कुंभ का सौंदर्यीकरण बढ़ाने के साथ ही धर्मनगरी में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने भी मददगार साबित होगा।
- दयानंद सरस्वती, उप मेलाधिकारी, कुंभ
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रिवर फ्रंट डवलपमेंट योजना के तहत गंगा किनारे पड़ी जमीन पर कुंभ मेला बजट से आस्था पथ का निर्माण किया जा रहा है। पंतद्वीप पार्किंग से लेकर चंडीघाट पुल तक करीब एक किलोमीटर का यह आस्था पथ बनाया जा रहा है। आस्था पथ पर शहर के साथ ही दूर-दराज से आने वाले पर्यटक गंगा के किनारे मॉर्निंग वॉक कर सकेंगे। खास बात यह है कि आस्था पथ में बीच-बीच में पर्यटकों के लिए कुछ ऐसे प्वाइंट बनाए गए हैं। इनमें जल दर्शन, सूर्य दर्शन, दिग दर्शन, रमिया दर्शन प्वाइंट हैं। इनमें से दिग दर्शन से चारों तरफ धर्मनगरी को देख सकेंगे। यहां से श्रद्धालु मां मनसा देवी मंदिर व चंडीदेवी मंदिर के दर्शन दूर से ही कर सकेंगे। रमिया दर्शन से लोग गंगा नदी के साथ सेल्फी ले सकेंगे। यहीं पर लीला दर्शन मंच भी बनाया गया है। यह ओपन एयर थिएटर है। इस कला मंच पर छोटे कार्यक्रम किए जा सकेंगे। कुंभ मेले में इस मंच पर धार्मिक कार्यक्रम किए जाने की योजना है। इसके साथ ही 15 हजार वर्ग मीटर पार्क भी बनाया जा रहा है। सिंचाई विभाग उत्तराखंड के सहायक अभियंता सुमित मालवाल ने बताया कि आस्था पथ का 91 फीसदी कार्य हो पूरा चुका है। उम्मीद है कि जनवरी के अंत में आस्था पथ को पर्यटकों के हवाले कर दिया जाएगा। संवाद
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2016 में प्लान, अब चढ़ी योजना परवान
सिंचाई विभाग के अनुसार, इस योजना पर वर्ष 2016 में काम शुरू हो गया था, लेकिन तब से लेकर अब तक शासन की ओर से बजट जारी नहीं किया गया था, लेकिन कुंभ आने पर सरकार की ओर से 20 करोड़ 70 लाख रुपये का बजट जारी किया गया। बजट जारी होने पर अब योजना को परवान चढ़ाया जा रहा है। कुंभ मेले में आस्था पथ अपनी एक अलग पहचान बनाएगा।
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पहले था अतिक्रमण, अब बदल रहा नजारा
जहां यह आस्था पथ बनाया जा रहा है, यहां पहले अतिक्रमण हुआ रहता था। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण को हटवाया भी जाता था, लेकिन फिर से अतिक्रमणकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लेते थे, पर अब आस्था पथ बनाने से जहां अतिक्रमण से मुक्ति मिल गई है। वहीं, इस क्षेत्र का नजारा भी बदल गया है।
आस्था पथ पर श्रद्धालुओं को शांत वातावरण मिलेगा। पर्यटक यहां आकर योग, ध्यान कर सकेंगे। गंगा किनारे बन रहे आस्था पथ पर आने से पर्यटकों को विशेष प्रकार की अनुभूति महसूस हो सकेगी। इससे आस्था पथ कुंभ का सौंदर्यीकरण बढ़ाने के साथ ही धर्मनगरी में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने भी मददगार साबित होगा।
- दयानंद सरस्वती, उप मेलाधिकारी, कुंभ