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एसी में बैठकर चटखारा लेना पड़ेगा महंगा
Haridwar
Updated Fri, 01 Mar 2013 05:30 AM IST
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हरिद्वार। आम बजट से आशाएं लगाए बैठे हरिद्वार के खासोआम को खास हाथ नहीं लगा। आयकर का दायरे में और ज्यादा छूट की आस लगाए व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को निराशा मिली। नए मोबाइल खरीदने और एसी रेस्टोरेंट में दावत उड़ाने के शौकीनों को आम बजट ने झटका दिया है।
धार्मिक नगरी होने के कारण हरिद्वार में होटल और रेस्टोरेंट ज्यादा हैं। इसके अलावा हरिद्वार का एक ऐसा वर्ग भी उभरा है जो बाहर दावत उड़ाने का शौकीन है। लेकिन, एसी में दावत उड़ाने का मजा आम बजट ने किरकिरा कर दिया है। हरिद्वार में दो से पांच लाख सालाना आय वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। सर्विस टैक्स लगने से लोगों की चिंताएं बढ़ गई है।
व्यापारी वर्ग आयकर छूट को दो लाख से बढ़ाकर कम से कम चार लाख तक करने की आस लगाए बैठा था। लेकिन, आयकर के स्लैब में कोई फेरबदल नहीं होने से इस वर्ग को निराशा हाथ लगी। हालांकि, पांच लाख रुपये की आय वाले लोगों को दस प्रतिशत टैक्स में दो हजार रुपये की छूट दी है, जो बेहद मामूली है।
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इनसेट
होम लोन में राहत से कारोबारी खुश
हरिद्वार। सिडकुल की स्थापना के बाद से हरिद्वार में तेजी से रिहायशी कॉलोनियां काटी जा रही हैं। आशियाना बनाने के लिए होम लोन पर आयकर में छूट से लोगों को राहत मिलने की संभावना है। अनुमान के मुताबिक हरिद्वार में दो दर्जन नई कॉलोनियां विकसित हुई है। इनमें से अधिकतर ने होमलोन लेकर अपना घर तैयार किया है। लिहाजा, अब लोन लेकर आशियाना बनाने में छूट होने के बाद प्रापर्टी कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, पचास लाख रुपये से अधिक की प्रापर्टी बेचने पर एक प्रतिशत टीडीएस से कारोबारियों की चिंता बढ़ी है।
इनसेट
उद्योगों को भी राहत नहीं
हरिद्वार। सिडकुल सहित अन्य औद्योगिक इलाकों में स्थित कंपनियां भी आम बजट से काफी उम्मीदें लगाई थी। लेकिन, दस करोड़ से ज्यादा टैक्सेबल इनकम वाली घरेलू कंपनियों पर सरचार्ज पांच प्रतिशत से दस प्रतिशत करने से उद्यमियों में निराशा है। सिडकुल मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग ने बताया कि आम बजट में उद्यमियों के लिए कुछ नहीं है न ही उनके विकास के लिए कुछ ठोस काम किया है।
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युवा बोले- हमें मिली बस महंगाई
हरिद्वार।
आम बजट पर युवाओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। युवाओं का कहना है कि बजट में उनके लिए कुछ नहीं है। ऊपर से मोबाइल महंगे कर दिए गए। दो हजार से ज्यादा महंगे मोबाइल खरीदने वालों को भी अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी। इससे युवाओं में निराशा है।
सिंगल फोटो
- बजट में युवाओं के लिए कुछ नहीं है। देश की बड़ी आबादी को दरकिनार किया गया है। बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया, जिससे रोजगार के रास्ते खुलते। - महेंद्र सिंह बिष्ट, मायापुर
- हर बार बजट से युवाओं को निराशा ही मिलती है। इस बार भी बजट में युवाओं के लिए कुछ खास नहीं है। बजट पेश करते समय युवाओं की मांगों का ध्यान रखा जाना चाहिए था।
- महेशचंद भारद्वाज, सर्वप्रिय विहार।
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सब्सिडी मिलती तो अच्छा था, कुछ तो मिला
हरिद्वार। आधी आबादी (महिलाओं) का कहना है कि आम बजट में घर का बजट संवारने की कोशिश की जानी चाहिए थी। गैस सिलेंडर पर सब्सिडी दी जाती तो अच्छा रहता। लेकिन बजट में महिलाओं की सुरक्षा की पहल का आधी आबादी ने स्वागत किया है।
सिंगल फोटो
- गैस सिलेंडर पर सब्सिडी बढ़ाई जानी चाहिए थी। सब्सिडी सिलेंडरों की संख्या बढ़ाई जाती तो अच्छा रहता। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा की चिंता की है, यह अच्छी बात है।
- सरोज शर्मा, विवेक विहार
- महिलाओं के लिए अलग से बैंक खोलने की पहल का स्वागत है। महिलाओं के लिए अलग से फंड बनाया जाना भी ठीक है। लेकिन गृहणियों की दृष्टि से बजट में कुछ नहीं है।
- अनीता शुक्ला, शिवलोक।
किसानों को लोन का मरहम, सब्सिडी नहीं
हरिद्वार। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को चार प्रतिशत पर कर्ज देने से किसानों में खुशी की लहर है। अधिकतर छोटे काश्तकार खेती के लिए लोन लेते हैं। अब लोन पर छूट मिलने से किसानों ने राहत की सांस ली है। हालांकि किसानों की मांग सब्सिडी पर बीज और खाद मिलने के साथ ही सब्सिडी पर डीजल की थी। किसानों की यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। इससे किसानों को मायूसी हाथ लगी है।
क्या कहते हैं किसान- सिंगल फोटो
- किसानों को कम ब्याज दर पर लोन देने का स्वागत है लेकिन कई मांगें अधूरी रह गई। किसानों को डीजल पर सब्सिडी मिलनी चाहिए। यह मांग अधूरी रह गई।
- विजयपाल सैनी, शिवदासपुर तेलीवाला
- किसानों को बीज एवं खाद में काफी छूट मिलनी चाहिए। जिससे किसानों को अधिक लाभ मिले सकता था। महंगे खाद और बीज ने किसानों का दम निकाल रखा है। लेकिन इसको लेकर बजट में कुछ नहीं हुआ।
- महिपाल सिंह, दौलतपुर
- कृषि यंत्रों के प्रयोग में काफी मात्रा में डीजल की खपत होती है। सरकार को इस बजट में किसानों को डीजल पर सब्सिडी देनी चाहिए थी।
- मुल्कीराज सैनी, धनौरा
-फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी को लेकर सरकार को बजट में कृषि यंत्रों पर छूट देनी चाहिए थी। कृषि यंत्रों मेें छूट मिलने से किसानों की फसलों की पैदावार बढ़ती। किसानों के लिए बजट में कुछ खास नहीं है।
- सुभाष सैनी, जसवावाला
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सिंगल फोटो
- बजट ने पूरी तरह निराश किया है। हरिद्वार में करीब सत्तर हजार छोटे-बड़े व्यापारी है। इस बड़े वर्ग को बजट से कोई राहत नहीं मिली है। उल्टा मोबाइल व अन्य सामान महंगे होने से युवाओं को मायूसी हाथ लगी है।
-कैलाश केशवानी, व्यापारी नेता
- सरकार को मझौले व्यापारियों के बारे में सोचना चाहिए था। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं किया गया है। बजट पूरी तरह निराशाजनक रहा है। टैक्स में दो हजार रुपए की छूट मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है।
- सुरेश गुलाटी, व्यापारी नेता
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एक्सपर्ट व्यू- 1 सिंगल फोटो
- बजट में संतुलन साधने की कोशिश की गई है। कोई विशेष परिवर्तन दिखाई नहीं दिया। सरकार ने परिवर्तन बजट से पहले किए हैं और अब बाद में करने का मन बनाया है। बजट पर सबकी नजर रहती है, इसलिए वित्त मंत्री ऐसी कोई घोषणा नहीं करना चाहते थे, जो जनविरोधी लगे। बजट से पहले ही घरेलू गैस और पेट्रोल आदि से सब्सिडी कम की गई है। बाद में भी ऐसा किए जाने की संभावना है। बजट में आर्थिक सुधारों पर फोकस किया गया है, जो धनी वर्ग के पक्ष में ज्यादा दिखता है।
- डा. एनके गर्ग, अर्थशास्त्री
एक्सपर्ट व्यू- 2 सिंगल फोटो
- आम बजट भारत में बसने वाले लोगों के लिए कुछ आशा लेकर आया है। लेकिन, इंडिया कल्चर में ढले लोगों के लिए आम बजट में कुछ नहीं है। बल्कि अमीरों पर टैक्स लगाकर आम लोगों से हमदर्दी दिखाने का प्रयास किया गया है। बजट में महंगाई रोकने के उपाय भी नहीं है, जो कि निराशाजनक है। इससे उद्योगों पर भी फर्क पड़ेगा।
- डा. सुनील बत्रा, वाणिज्यशास्त्री
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धार्मिक नगरी होने के कारण हरिद्वार में होटल और रेस्टोरेंट ज्यादा हैं। इसके अलावा हरिद्वार का एक ऐसा वर्ग भी उभरा है जो बाहर दावत उड़ाने का शौकीन है। लेकिन, एसी में दावत उड़ाने का मजा आम बजट ने किरकिरा कर दिया है। हरिद्वार में दो से पांच लाख सालाना आय वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। सर्विस टैक्स लगने से लोगों की चिंताएं बढ़ गई है।
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व्यापारी वर्ग आयकर छूट को दो लाख से बढ़ाकर कम से कम चार लाख तक करने की आस लगाए बैठा था। लेकिन, आयकर के स्लैब में कोई फेरबदल नहीं होने से इस वर्ग को निराशा हाथ लगी। हालांकि, पांच लाख रुपये की आय वाले लोगों को दस प्रतिशत टैक्स में दो हजार रुपये की छूट दी है, जो बेहद मामूली है।
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होम लोन में राहत से कारोबारी खुश
हरिद्वार। सिडकुल की स्थापना के बाद से हरिद्वार में तेजी से रिहायशी कॉलोनियां काटी जा रही हैं। आशियाना बनाने के लिए होम लोन पर आयकर में छूट से लोगों को राहत मिलने की संभावना है। अनुमान के मुताबिक हरिद्वार में दो दर्जन नई कॉलोनियां विकसित हुई है। इनमें से अधिकतर ने होमलोन लेकर अपना घर तैयार किया है। लिहाजा, अब लोन लेकर आशियाना बनाने में छूट होने के बाद प्रापर्टी कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, पचास लाख रुपये से अधिक की प्रापर्टी बेचने पर एक प्रतिशत टीडीएस से कारोबारियों की चिंता बढ़ी है।
इनसेट
उद्योगों को भी राहत नहीं
हरिद्वार। सिडकुल सहित अन्य औद्योगिक इलाकों में स्थित कंपनियां भी आम बजट से काफी उम्मीदें लगाई थी। लेकिन, दस करोड़ से ज्यादा टैक्सेबल इनकम वाली घरेलू कंपनियों पर सरचार्ज पांच प्रतिशत से दस प्रतिशत करने से उद्यमियों में निराशा है। सिडकुल मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग ने बताया कि आम बजट में उद्यमियों के लिए कुछ नहीं है न ही उनके विकास के लिए कुछ ठोस काम किया है।
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युवा बोले- हमें मिली बस महंगाई
हरिद्वार।
आम बजट पर युवाओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। युवाओं का कहना है कि बजट में उनके लिए कुछ नहीं है। ऊपर से मोबाइल महंगे कर दिए गए। दो हजार से ज्यादा महंगे मोबाइल खरीदने वालों को भी अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी। इससे युवाओं में निराशा है।
सिंगल फोटो
- बजट में युवाओं के लिए कुछ नहीं है। देश की बड़ी आबादी को दरकिनार किया गया है। बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया, जिससे रोजगार के रास्ते खुलते। - महेंद्र सिंह बिष्ट, मायापुर
- हर बार बजट से युवाओं को निराशा ही मिलती है। इस बार भी बजट में युवाओं के लिए कुछ खास नहीं है। बजट पेश करते समय युवाओं की मांगों का ध्यान रखा जाना चाहिए था।
- महेशचंद भारद्वाज, सर्वप्रिय विहार।
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सब्सिडी मिलती तो अच्छा था, कुछ तो मिला
हरिद्वार। आधी आबादी (महिलाओं) का कहना है कि आम बजट में घर का बजट संवारने की कोशिश की जानी चाहिए थी। गैस सिलेंडर पर सब्सिडी दी जाती तो अच्छा रहता। लेकिन बजट में महिलाओं की सुरक्षा की पहल का आधी आबादी ने स्वागत किया है।
सिंगल फोटो
- गैस सिलेंडर पर सब्सिडी बढ़ाई जानी चाहिए थी। सब्सिडी सिलेंडरों की संख्या बढ़ाई जाती तो अच्छा रहता। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा की चिंता की है, यह अच्छी बात है।
- सरोज शर्मा, विवेक विहार
- महिलाओं के लिए अलग से बैंक खोलने की पहल का स्वागत है। महिलाओं के लिए अलग से फंड बनाया जाना भी ठीक है। लेकिन गृहणियों की दृष्टि से बजट में कुछ नहीं है।
- अनीता शुक्ला, शिवलोक।
किसानों को लोन का मरहम, सब्सिडी नहीं
हरिद्वार। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को चार प्रतिशत पर कर्ज देने से किसानों में खुशी की लहर है। अधिकतर छोटे काश्तकार खेती के लिए लोन लेते हैं। अब लोन पर छूट मिलने से किसानों ने राहत की सांस ली है। हालांकि किसानों की मांग सब्सिडी पर बीज और खाद मिलने के साथ ही सब्सिडी पर डीजल की थी। किसानों की यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। इससे किसानों को मायूसी हाथ लगी है।
क्या कहते हैं किसान- सिंगल फोटो
- किसानों को कम ब्याज दर पर लोन देने का स्वागत है लेकिन कई मांगें अधूरी रह गई। किसानों को डीजल पर सब्सिडी मिलनी चाहिए। यह मांग अधूरी रह गई।
- विजयपाल सैनी, शिवदासपुर तेलीवाला
- किसानों को बीज एवं खाद में काफी छूट मिलनी चाहिए। जिससे किसानों को अधिक लाभ मिले सकता था। महंगे खाद और बीज ने किसानों का दम निकाल रखा है। लेकिन इसको लेकर बजट में कुछ नहीं हुआ।
- महिपाल सिंह, दौलतपुर
- कृषि यंत्रों के प्रयोग में काफी मात्रा में डीजल की खपत होती है। सरकार को इस बजट में किसानों को डीजल पर सब्सिडी देनी चाहिए थी।
- मुल्कीराज सैनी, धनौरा
-फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी को लेकर सरकार को बजट में कृषि यंत्रों पर छूट देनी चाहिए थी। कृषि यंत्रों मेें छूट मिलने से किसानों की फसलों की पैदावार बढ़ती। किसानों के लिए बजट में कुछ खास नहीं है।
- सुभाष सैनी, जसवावाला
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सिंगल फोटो
- बजट ने पूरी तरह निराश किया है। हरिद्वार में करीब सत्तर हजार छोटे-बड़े व्यापारी है। इस बड़े वर्ग को बजट से कोई राहत नहीं मिली है। उल्टा मोबाइल व अन्य सामान महंगे होने से युवाओं को मायूसी हाथ लगी है।
-कैलाश केशवानी, व्यापारी नेता
- सरकार को मझौले व्यापारियों के बारे में सोचना चाहिए था। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं किया गया है। बजट पूरी तरह निराशाजनक रहा है। टैक्स में दो हजार रुपए की छूट मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है।
- सुरेश गुलाटी, व्यापारी नेता
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एक्सपर्ट व्यू- 1 सिंगल फोटो
- बजट में संतुलन साधने की कोशिश की गई है। कोई विशेष परिवर्तन दिखाई नहीं दिया। सरकार ने परिवर्तन बजट से पहले किए हैं और अब बाद में करने का मन बनाया है। बजट पर सबकी नजर रहती है, इसलिए वित्त मंत्री ऐसी कोई घोषणा नहीं करना चाहते थे, जो जनविरोधी लगे। बजट से पहले ही घरेलू गैस और पेट्रोल आदि से सब्सिडी कम की गई है। बाद में भी ऐसा किए जाने की संभावना है। बजट में आर्थिक सुधारों पर फोकस किया गया है, जो धनी वर्ग के पक्ष में ज्यादा दिखता है।
- डा. एनके गर्ग, अर्थशास्त्री
एक्सपर्ट व्यू- 2 सिंगल फोटो
- आम बजट भारत में बसने वाले लोगों के लिए कुछ आशा लेकर आया है। लेकिन, इंडिया कल्चर में ढले लोगों के लिए आम बजट में कुछ नहीं है। बल्कि अमीरों पर टैक्स लगाकर आम लोगों से हमदर्दी दिखाने का प्रयास किया गया है। बजट में महंगाई रोकने के उपाय भी नहीं है, जो कि निराशाजनक है। इससे उद्योगों पर भी फर्क पड़ेगा।
- डा. सुनील बत्रा, वाणिज्यशास्त्री