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आधा सत्र बीतने पर सिलने दी गई वर्दी
Haridwar
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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हरिद्वार। शिक्षा अधिकारी के आदेश भी गुरुजी के लिए कोई मायने नहीं रखते, तभी तो आधा सत्र बीतने के बाद भी सरकारी स्कूलों के बच्चों को वर्दी मुहैया नहीं हो पाई है। वर्दी अभी सिलने के लिए भेजी गई हैं। मानक के अनुसार बच्चों को खाना भी नहीं खिलाया जा रहा। बच्चों की कम उपस्थिति के अलावा डीईओ बेेसिक के निरीक्षण में अन्य कई खामियां सामने आई।
स्कूली बच्चों को वर्दी मुहैया कराने के लिए हेेडमास्टरों को दिए साढ़े चार करोड़ रुपये आधा सत्र बीतने के बाद भी काम में नहीं लग सके। अधिकतर स्कूलों में अभी तक बच्चों को वर्दी नहीं मिली। सर्व शिक्षा अभियान की जिला परियोजना अधिकारी डा. पुष्पारानी वर्मा ने हेडमास्टरों को एक पत्र लिखकर 16 नवंबर तक हर हाल में बच्चों को वर्दी दिलाने के लिए आगाह किया था। चेतावनी दी गई थी कि जिन स्कूलों में इस तारीख तक बच्चों को वर्दी मुहैया नहीं होगी उनका वेतन रोक लिया जाएगा। लेकिन ऐसी घुड़कियों का शिक्षकों पर कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा।
मंगलवार को डीईओ बेसिक ने तीन विद्यालयों का निरीक्षण किया। शहर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय न.16 में बच्चे बिना वर्दी पहने हुए मिले। वहीं वहां पकाया जा रहा भोजन मानक के अनुसार नहीं था। यहां पंजीकृत 117 बच्चों में 99 उपस्थित थे। इसके बाद प्राथमिक विद्यालय न. 23 में भी बच्चों ने वर्दीयां नहीं पहनी थी। जो भोजन मंगलवार को पकाया जाना चाहिए वह नहीं बनाया गया था। 85 बच्चों के सापेक्ष 67 उपस्थित पाए गए। कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनखल में भी बच्चों ने वर्दीयां नहीं पहनी थी। भोजन नियमानुसार नहीं बना। वहीं 182 पंजीकृत छात्र छात्राओं में से 121 हाजिर मिले।
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कोई कार्यवाही नहीं की गई
सर्व शिक्षा अभियान की जिला परियोजना अधिकारी की ओर से 16 नंवबर के बाद बच्चों के पास वर्दी नहीं मिलने पर वेतन काटने की चेतावनी कोरी साबित हुई। निरीक्षण किए गए स्कूलों में बच्चे वर्दी नहीं पहने हुए मिले। शिक्षकों ने वर्दी सिलने के लिए दे रखी है कहकर पीछा छुड़ा लिया।
प्रबंध समिति से सबक लें गुरुजी
राजकीय प्राथमिक विद्यालय न. 23 में प्रबंध समिति के अध्यक्ष बच्चों को पढ़ाई कराते हुए मिले। जहां कितने ही सरकारी शिक्षक बच्चों को पढ़ाने से जी चुराते हैं वहीं प्रबंध समिति के अध्यक्ष से शिक्षकों को सबक लेना चाहिए।
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स्कूली बच्चों को वर्दी मुहैया कराने के लिए हेेडमास्टरों को दिए साढ़े चार करोड़ रुपये आधा सत्र बीतने के बाद भी काम में नहीं लग सके। अधिकतर स्कूलों में अभी तक बच्चों को वर्दी नहीं मिली। सर्व शिक्षा अभियान की जिला परियोजना अधिकारी डा. पुष्पारानी वर्मा ने हेडमास्टरों को एक पत्र लिखकर 16 नवंबर तक हर हाल में बच्चों को वर्दी दिलाने के लिए आगाह किया था। चेतावनी दी गई थी कि जिन स्कूलों में इस तारीख तक बच्चों को वर्दी मुहैया नहीं होगी उनका वेतन रोक लिया जाएगा। लेकिन ऐसी घुड़कियों का शिक्षकों पर कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा।
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मंगलवार को डीईओ बेसिक ने तीन विद्यालयों का निरीक्षण किया। शहर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय न.16 में बच्चे बिना वर्दी पहने हुए मिले। वहीं वहां पकाया जा रहा भोजन मानक के अनुसार नहीं था। यहां पंजीकृत 117 बच्चों में 99 उपस्थित थे। इसके बाद प्राथमिक विद्यालय न. 23 में भी बच्चों ने वर्दीयां नहीं पहनी थी। जो भोजन मंगलवार को पकाया जाना चाहिए वह नहीं बनाया गया था। 85 बच्चों के सापेक्ष 67 उपस्थित पाए गए। कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनखल में भी बच्चों ने वर्दीयां नहीं पहनी थी। भोजन नियमानुसार नहीं बना। वहीं 182 पंजीकृत छात्र छात्राओं में से 121 हाजिर मिले।
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कोई कार्यवाही नहीं की गई
सर्व शिक्षा अभियान की जिला परियोजना अधिकारी की ओर से 16 नंवबर के बाद बच्चों के पास वर्दी नहीं मिलने पर वेतन काटने की चेतावनी कोरी साबित हुई। निरीक्षण किए गए स्कूलों में बच्चे वर्दी नहीं पहने हुए मिले। शिक्षकों ने वर्दी सिलने के लिए दे रखी है कहकर पीछा छुड़ा लिया।
प्रबंध समिति से सबक लें गुरुजी
राजकीय प्राथमिक विद्यालय न. 23 में प्रबंध समिति के अध्यक्ष बच्चों को पढ़ाई कराते हुए मिले। जहां कितने ही सरकारी शिक्षक बच्चों को पढ़ाने से जी चुराते हैं वहीं प्रबंध समिति के अध्यक्ष से शिक्षकों को सबक लेना चाहिए।