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पहले हरिद्वार को मिले पानी, फिर बने योजना

Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
Haridwar
Haridwar Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
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हरिद्वार। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से गंगनहर के विस्तारीकरण की योजना का हरिद्वार जिले में विरोध शुरू हो गया है। जिले की आम जनता चाहती है कि पहले हरिद्वार जिले को पर्याप्त पानी मिले। उसके बाद यूपी किसी योजना के बारे में सोचे। हरिद्व्रार के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस निर्णय को अव्यवहारिक बताया है। किसान और टिहरी विस्थापित भी इस निर्णय के खिलाफ मुखर हो गए हैं।
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यूपी सिंचाई विभाग की ओर से गंगनहर की चौड़ाई पांच मीटर और बढ़ाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया है, ताकि गंगा का अधिक से अधिक पानी ले जाया जा सके। उत्तराखंड सिंचाई विभाग की ओर से जिले के लिए तीन नहरों का प्रस्ताव तैयार किया गया है लेकिन पानी न मिलने के चलते केंद्र सरकार की ओर से इन नहरों की खुदाई की स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। एक तरफ स्थानीय नहरों के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है दूसरी ओर यूपी सिंचाई विभाग यहां से और पानी लेना चाहता है। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री एवं हरिद्वार के सांसद हरीश रावत ने गंगनहर के विस्तारीकरण योजना का विरोध किया है। उनका कहना है उत्तर प्रदेश का निर्णय व्यवहार सम्मत नहीं है। गंगा में पानी की कमी है और हरिद्वार को पानी मिल नहीं रहा है। ऐसे में गंगनहर का विस्तार सोचा भी नहीं जाना चाहिए। जिले के किसानों ने इस फैसले को हरिद्वार विरोधी बताया है। वहीं टिहरी विस्थापितों का कहना है जिन लोगों ने विस्थापन का दंश झेला है, उन्हें ही बिजली-पानी नहीं मिलेगा तो फिर किसे मिलेगा। हर वर्ग गंगनहर विस्तारीकरण योजना के खिलाफ मुखर हो रहा है।
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हिस्सेदारी के लिए जनता करे पहल
उत्तराखंड किसान सभा के अध्यक्ष कामरेड बच्चीराम कौंसवाल का कहना है कि राज्य के लोगों को सस्ती बिजली और किसानों को मुफ्त पानी मिलना चाहिए। हरिद्वार के किसानों और उनके संगठनों को गंगनहर के पानी में हिस्सेदारी के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा सत्ता में कांग्रेस रहे या भाजपा उनके नेताओं में इतना दम नहीं कि उत्तर प्रदेश से हिस्सेदारी की बात कर सकें । जनता को ही इसके लिए पहल करनी होगी।
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प्रतिक्रियाएं
- उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2000 में जल में हिस्सेदारी देने का दायित्व उत्तर प्रदेश को दिया है। इसलिए वह मनमानी कर रहा है। गंगनहर विस्तारीकरण योजना पर उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश के साथ ही केंद्र सरकार के पास भी विरोध दर्ज कराना चाहिए। इस मसले पर केंद्र के सामने जिले की आवाज उठाई जाएगी।
-हरीश रावत, हरिद्वार सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री
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-केंद्र सरकार को पहल कर जल बंटवारे की नीति बनानी चाहिए। केंद्र को और देर किए बिना गंगनहर में उत्तराखंड का हिस्सा तय कर देना चाहिए। हरिद्वार में जो तीन नहरें बननी हैं उनके लिए 780 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए। केंद्र को कावेरी जैसा एक और विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए। -अंबरीष कुमार, पूर्व विधायक हरिद्वार
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- 12 साल में गंगा कैनाल संचालन का अधिकार तक उत्तराखंड को नहीं मिल पाया है। जब उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि घट रही है तब उसकी पानी की आवश्यकता क्यों बढ़ रही है और गंगनहर का विस्तार कर गंगा को सूखाने की योजना क्यों बना रहा है?। वह पूछने वाला उत्तराखंड में कोई नहीं है।

- अनीता खरौला, टिहरी विस्थापित एवं सदस्य जिला पंचायत
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- पहले सिंचाई जल के लिए हमें जिले में नहर चाहिए। हमारी तीन नहरें बनाई जाए और उनके पानी की आवश्यकता पूरी की जाए। इसके बाद गंगनहर विस्तारीकरण की योजना को आगे बढ़ने दिया जाएगा। अगर हमें पानी नहीं मिला तो फिर गंगनहर चौड़ी नहीं करने दी जाएगी।
- पदम सिंह रोड, प्रदेश उपाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
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