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अमृत योजना के अफसरों पर भारी पड़ी लापरवाही
Updated Sat, 14 Jul 2018 12:13 AM IST
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हरिद्वार। दस दिन पहले दी गई चेतावनी के बाद भी अमृत योजना के अफसरों की नींद नहीं टूटी। नतीजा यह रहा कि सीवर लाइन डालने के लिए खोदी गई सड़कों को समतल नहीं किया जा सका। डीएम ने इन सड़कों का हाल देखा तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। पड़ताल कराई गई तो योजना के अधिकतर अधिकारी शहर से नदारद मिले। डीएम ने एक अधिशासी अभियंता, एक सहायक अभियंता, और तीन अवर अभियंताओं का वेतन रोकने के आदेश के साथ ही सभी से स्पष्टीकरण भी तलब किया है। संतोषजनक जबाव न देने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए गए हैं। साथ ही कार्यालय से नदारद मिली एक संविदा कर्मचारी की सेवा भी समाप्त कर दी गई।
शुक्रवार की दोपहर जिलाधिकारी दीपक रावत एक कार्यशाला में भाग गए थे। इस दौरान वे ऋषिकुल और देवपुरा के पास से गुजरे तो वहां खोदी गई सड़कों की हालत देखकर उन्हें हैरानी हुई। दस दिन पहले उन्होंने गड्ढे भरने के आदेश यहां सीवर लाइन डालने वाले अमृत योजना के अफसरों को दिए थे। अधिशासी अभियंता संजय कुमार का वेतन भी रोका था। इसके बाद भी अफसरों ने सड़कों की सुध नहीं ली। कार्यशाला समाप्त होने के बाद नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे डीएम ने जिलाधिकरी ने अमृत योजना के स्थानीय अफसरों को तलब किया। तब पता चला कि अधिशासी अभियंता संजय कुमार बिना अनुमति लिए शहर से बाहर हैं। उनका मोबाइल फोन भी नहीं मिला। एई आरके त्रिपाठी के पास अधिशासी अभियंता का भी चार्ज है, वे भी बिना अनुमति लिए देहरादून चले गए। फोन पर बात करने पर उन्होंने कहा कि वह विभागीय कार्य से ही देहरादून आए हैं। अवर अभियंता अंबिका भट्ट, सोनिया धीमान, इंदू शर्मा न ही कार्यालय में मिले और न ही फील्ड में उनकी मौजूदगी पाई गई।
एक अवर अभियंता राजेंद्र सिंह से फोन पर बात की गई तो उन्होंने खुद को कार्यालय में मौजूद बताया। डीएम ने नगर मजिस्ट्रेट मनीष सिंह और सूचना अधिकारी अर्चना के साथ वहां पहुंचकर देखा तो राजेंद्र वहां मौजूद मिले। लेकिन संविदा कर्मचारी पूजा अपनी सीट से नदारद थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने नदारद मिले अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता और सहायक अभियंता का वेतन रोकने के साथ ही उनसे स्पष्टीकरण भी तलब किया है। उन्होंने संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के भी आदेश दिए। वहीं संविदा कर्मचारी पूजा को अपने काम के प्रति गंभीर नहीं पाते हुए उनकी सेवा समाप्त करने के आदेश दिए। उन्होंने सड़कों के गड्ढे 24 घंटे के अंदर भरकर रिर्पोट भेजने के निर्देश भी दिए।
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शुक्रवार की दोपहर जिलाधिकारी दीपक रावत एक कार्यशाला में भाग गए थे। इस दौरान वे ऋषिकुल और देवपुरा के पास से गुजरे तो वहां खोदी गई सड़कों की हालत देखकर उन्हें हैरानी हुई। दस दिन पहले उन्होंने गड्ढे भरने के आदेश यहां सीवर लाइन डालने वाले अमृत योजना के अफसरों को दिए थे। अधिशासी अभियंता संजय कुमार का वेतन भी रोका था। इसके बाद भी अफसरों ने सड़कों की सुध नहीं ली। कार्यशाला समाप्त होने के बाद नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे डीएम ने जिलाधिकरी ने अमृत योजना के स्थानीय अफसरों को तलब किया। तब पता चला कि अधिशासी अभियंता संजय कुमार बिना अनुमति लिए शहर से बाहर हैं। उनका मोबाइल फोन भी नहीं मिला। एई आरके त्रिपाठी के पास अधिशासी अभियंता का भी चार्ज है, वे भी बिना अनुमति लिए देहरादून चले गए। फोन पर बात करने पर उन्होंने कहा कि वह विभागीय कार्य से ही देहरादून आए हैं। अवर अभियंता अंबिका भट्ट, सोनिया धीमान, इंदू शर्मा न ही कार्यालय में मिले और न ही फील्ड में उनकी मौजूदगी पाई गई।
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एक अवर अभियंता राजेंद्र सिंह से फोन पर बात की गई तो उन्होंने खुद को कार्यालय में मौजूद बताया। डीएम ने नगर मजिस्ट्रेट मनीष सिंह और सूचना अधिकारी अर्चना के साथ वहां पहुंचकर देखा तो राजेंद्र वहां मौजूद मिले। लेकिन संविदा कर्मचारी पूजा अपनी सीट से नदारद थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने नदारद मिले अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता और सहायक अभियंता का वेतन रोकने के साथ ही उनसे स्पष्टीकरण भी तलब किया है। उन्होंने संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के भी आदेश दिए। वहीं संविदा कर्मचारी पूजा को अपने काम के प्रति गंभीर नहीं पाते हुए उनकी सेवा समाप्त करने के आदेश दिए। उन्होंने सड़कों के गड्ढे 24 घंटे के अंदर भरकर रिर्पोट भेजने के निर्देश भी दिए।
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