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एचआरडीए ने अपनों आदेशोंपर कुंडली मारी
Updated Tue, 23 Jan 2018 12:32 AM IST
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हरिद्वार। आश्रम और अखाड़ों के अलावा बड़े बिल्डरों के अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण व सील की कार्रवाई के आदेश को एचआरडीए के अधिकारी भूल गए। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला कनखल की निर्मला छावनी स्थित कुंभ मेला भूमि पर एक बिल्डर ग्रुप ने अवैध रूप से 40 फ्लैटों का निर्माण करा लिया है और अधिकारी आंखें मूंदे हैं।
एचआरडीए ने जब अवैध निर्माण के विरुद्ध अपने बायलॉज के अनुसार ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई करने का आदेश पारित किया तो अखाड़े की कुंभ छावनी के फ्लैट बनाने वाला बिल्डर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करने के लिए सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गया। जिस कारण अवैध निर्माण सील करने की कार्रवाई का आदेश प्राधिकरण अधिकारियों का मुहं चिढ़ा रहा है। आरोप है कि बिल्डरों ने अखाड़े के ही एक महंत को अपने साथ कर करोड़ों रुपये की भूमि को ठिकाने लगाने का षड्यंत्र किया है। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला कनखल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज का कहना है कि अखाड़े की भूमि बचाने और अवैध निर्माण के विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए उन्होंने वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए एचआरडीए के सचिव को 21 सितंबर को ज्ञापन दिया था। एचआरडीए सचिव को स्पष्ट रूप से मौखिक और लिखित में भी बता दिया गया था कि अखाड़े ने आश्रम के संतों की आवास की आवश्यकता के लिए बाईपास रोड की निर्मला छावनी की भूमि पर आश्रम बनाने का वर्ष 2012 में मानचित्र पास कराया था। उनका आरोप है कि अखाड़े के स्वीकृत मानचित्र की आड़ में ही अवैध रूप से फ्लैटों का निर्माण स्वीकृत मानचित्र वाली भूमि से अलग खसरा नंबर 102 में किया गया है।
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एचआरडीए बिना मानचित्र स्वीकृति के अवैध निर्माणों, स्वीकृत मानचित्र के विपरीत के निर्माणों और पूरी तरह से अवैध निर्माणों के खिलाफ बायलॉज के अनुसार निरंतर सील करने व ध्वस्तीकरण के आदेश पारित करता है। हाल के दिनों में हरिद्वार, रुड़की व ऋषिकेश क्षेत्र में अनेक अवैध निर्माणों व स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए निर्माणों को सील किया गया है। सीलिंग की कार्रवाई निरंतर की जा रही है। एचआरडीए के आदेश के खिलाफ लोग कमिश्नर न्यायालय अपील करते हैं और कई मामले शासन में भी चले जाते हैं। इसलिए अवैध निर्माण की सील करने की कार्रवाई में विलंब होता है। अखाड़े की भूमि पर अवैध रूप से फ्लैटों के निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जानी प्रस्तावित है।
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- बंशीधर तिवारी सचिव एचआरडीए
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एचआरडीए ने जब अवैध निर्माण के विरुद्ध अपने बायलॉज के अनुसार ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई करने का आदेश पारित किया तो अखाड़े की कुंभ छावनी के फ्लैट बनाने वाला बिल्डर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करने के लिए सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गया। जिस कारण अवैध निर्माण सील करने की कार्रवाई का आदेश प्राधिकरण अधिकारियों का मुहं चिढ़ा रहा है। आरोप है कि बिल्डरों ने अखाड़े के ही एक महंत को अपने साथ कर करोड़ों रुपये की भूमि को ठिकाने लगाने का षड्यंत्र किया है। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला कनखल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज का कहना है कि अखाड़े की भूमि बचाने और अवैध निर्माण के विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए उन्होंने वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए एचआरडीए के सचिव को 21 सितंबर को ज्ञापन दिया था। एचआरडीए सचिव को स्पष्ट रूप से मौखिक और लिखित में भी बता दिया गया था कि अखाड़े ने आश्रम के संतों की आवास की आवश्यकता के लिए बाईपास रोड की निर्मला छावनी की भूमि पर आश्रम बनाने का वर्ष 2012 में मानचित्र पास कराया था। उनका आरोप है कि अखाड़े के स्वीकृत मानचित्र की आड़ में ही अवैध रूप से फ्लैटों का निर्माण स्वीकृत मानचित्र वाली भूमि से अलग खसरा नंबर 102 में किया गया है।
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एचआरडीए बिना मानचित्र स्वीकृति के अवैध निर्माणों, स्वीकृत मानचित्र के विपरीत के निर्माणों और पूरी तरह से अवैध निर्माणों के खिलाफ बायलॉज के अनुसार निरंतर सील करने व ध्वस्तीकरण के आदेश पारित करता है। हाल के दिनों में हरिद्वार, रुड़की व ऋषिकेश क्षेत्र में अनेक अवैध निर्माणों व स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए निर्माणों को सील किया गया है। सीलिंग की कार्रवाई निरंतर की जा रही है। एचआरडीए के आदेश के खिलाफ लोग कमिश्नर न्यायालय अपील करते हैं और कई मामले शासन में भी चले जाते हैं। इसलिए अवैध निर्माण की सील करने की कार्रवाई में विलंब होता है। अखाड़े की भूमि पर अवैध रूप से फ्लैटों के निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जानी प्रस्तावित है।
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- बंशीधर तिवारी सचिव एचआरडीए