{"_id":"57e6ba704f1c1b3276a8329c","slug":"160-pakistani-hindus-immerse-the-ashes","type":"story","status":"publish","title_hn":"160 पाकिस्तानी हिंदुओं की अस्थियां विसर्जित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
160 पाकिस्तानी हिंदुओं की अस्थियां विसर्जित
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 24 Sep 2016 11:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पाकिस्तान के 160 हिंदुओं सहित भारत के विभिन्न राज्यों से एकत्रित कर लाए गए 6325 अस्थि कलश यात्रा के रूप में बैंडबाजों के साथ कनखल के सतीघाट पर पहुंचे जहां विधि विधान के साथ गंगा मेें विसर्जित किया गया। आयोजकों व संतों ने कहा कि लावारिस अस्थियों को मां गंगा की गोद में विसर्जित करने से बड़ा पुण्य कोई और नहीं हो सकता है।
पाकिस्तान के कराची शहर स्थित श्री पंचमुंखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्रा अपने भतीजे कबीर मिश्रा के साथ एक पखवाड़े पहले 160 हिंदुओं की अस्थियां लेकर भारत आए थे। इन अस्थि कलशों को दिल्ली के निगम बोध घाट पर रखा गया। जहां दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा आदि से एकत्रित किए गए अन्य अस्थि कलशों को साथ मिलाकर शुक्रवार की रात कलश यात्रा यहां पहुंची। यहां इन अस्थि कलशों को निष्काम सेवा ट्रस्ट में रखा गया। शनिवार सुबह बैंडबाजाें और पुष्प वर्षा के बीच देवोत्थान सेवा समिति व धर्मयात्रा महासंघ के बैनर तले अस्थि कलशों को खड़ख़ड़ी भीमगोड़ा, हरकी पैड़ी, अपर रोड से कनखल होते हुए सतीघाट पर लाया गया। यहां वैदिक रीति रिवाज के साथ अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर दिया गया।
स्तान के करांची शहर से अस्थि कलश लेकर आए श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्रा ने कहा कि सनातन संस्कृति सबसे महान है। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की यह इच्छा रहती है कि उनकी अस्थियां मां गंगा की गोद में विसर्जित की जाए। इसलिए उन्होंने अस्थियां हरिद्वार लाने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
कनखल के सतीघाट पर आयोजित अस्थिविसर्जन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मां गंगा में अस्थिकलशों का विसर्जन कराकर उन्हें खुद बड़ा सुकून मिल रहा है। यात्रा में सहयोग करने के लिए धर्मयात्रा महासंघ तथा देवोत्थान समिति के पदाधिकारियों का आभार जताया।
दिल्ली स्थित श्री कालिका पीठाधीश्वर स्वामी सुरेंद्र नाथ अवधूत ने कहा कि अस्थियों को जो लोग मां गंगा की गोद तक पहुंचाते हैं उनसे बड़ा परोपकारी कोई नहीं है। स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने भी इसे सबसे बड़ा पुण्य का काम बताया।
देवोत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने कहा कि महासंघ के साथ मिलकर लगातार धर्मयात्रा करते रहेंगे।
कार्यक्रम का संचालन पत्रकार रजनीकांत शुक्ला ने किया।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कालका पीठाधीश्वर सुरेंद्र नाथ अवधूत, स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, देवोत्थान सेवा समिति के संयोजक विजय शर्मा, धर्मयात्रा संघ के राष्ट्रीय महामंत्री कृष्ण कुमार अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, रामकृष्ण लोहिया, नरेंद्र कुमार अरोड़ा, अवधेश शर्मा, रघुवीर दयाल, भाजपा नेता काशीनाथ, इंद्रराज दुग्गल, अनुज वालिया, डा. चंद्रधर प्रकाश काला, रविंद्र मिश्रा, किरणदीप कौर, पूजा बराड़, नरेंद्र अरोड़ा, रामकिशन लोहिया, गोपाल वर्मा शारदा प्रसाद, विजय कुमार, नमन शर्मा, प्रदीप जैन अशोक आहूजा, सतीश शर्मा तथघा समेत अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
पाकिस्तान के कराची शहर स्थित श्री पंचमुंखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्रा अपने भतीजे कबीर मिश्रा के साथ एक पखवाड़े पहले 160 हिंदुओं की अस्थियां लेकर भारत आए थे। इन अस्थि कलशों को दिल्ली के निगम बोध घाट पर रखा गया। जहां दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा आदि से एकत्रित किए गए अन्य अस्थि कलशों को साथ मिलाकर शुक्रवार की रात कलश यात्रा यहां पहुंची। यहां इन अस्थि कलशों को निष्काम सेवा ट्रस्ट में रखा गया। शनिवार सुबह बैंडबाजाें और पुष्प वर्षा के बीच देवोत्थान सेवा समिति व धर्मयात्रा महासंघ के बैनर तले अस्थि कलशों को खड़ख़ड़ी भीमगोड़ा, हरकी पैड़ी, अपर रोड से कनखल होते हुए सतीघाट पर लाया गया। यहां वैदिक रीति रिवाज के साथ अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर दिया गया।
विज्ञापन
स्तान के करांची शहर से अस्थि कलश लेकर आए श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्रा ने कहा कि सनातन संस्कृति सबसे महान है। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की यह इच्छा रहती है कि उनकी अस्थियां मां गंगा की गोद में विसर्जित की जाए। इसलिए उन्होंने अस्थियां हरिद्वार लाने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
कनखल के सतीघाट पर आयोजित अस्थिविसर्जन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मां गंगा में अस्थिकलशों का विसर्जन कराकर उन्हें खुद बड़ा सुकून मिल रहा है। यात्रा में सहयोग करने के लिए धर्मयात्रा महासंघ तथा देवोत्थान समिति के पदाधिकारियों का आभार जताया।
दिल्ली स्थित श्री कालिका पीठाधीश्वर स्वामी सुरेंद्र नाथ अवधूत ने कहा कि अस्थियों को जो लोग मां गंगा की गोद तक पहुंचाते हैं उनसे बड़ा परोपकारी कोई नहीं है। स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने भी इसे सबसे बड़ा पुण्य का काम बताया।
देवोत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने कहा कि महासंघ के साथ मिलकर लगातार धर्मयात्रा करते रहेंगे।
कार्यक्रम का संचालन पत्रकार रजनीकांत शुक्ला ने किया।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कालका पीठाधीश्वर सुरेंद्र नाथ अवधूत, स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, देवोत्थान सेवा समिति के संयोजक विजय शर्मा, धर्मयात्रा संघ के राष्ट्रीय महामंत्री कृष्ण कुमार अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, रामकृष्ण लोहिया, नरेंद्र कुमार अरोड़ा, अवधेश शर्मा, रघुवीर दयाल, भाजपा नेता काशीनाथ, इंद्रराज दुग्गल, अनुज वालिया, डा. चंद्रधर प्रकाश काला, रविंद्र मिश्रा, किरणदीप कौर, पूजा बराड़, नरेंद्र अरोड़ा, रामकिशन लोहिया, गोपाल वर्मा शारदा प्रसाद, विजय कुमार, नमन शर्मा, प्रदीप जैन अशोक आहूजा, सतीश शर्मा तथघा समेत अन्य लोग भी उपस्थित रहे।